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लोहिया विधि विवि की छात्रों पर 56 लाख फीस बकाया
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छात्रों पर विवि की लाखों रुपये बकाया है फीस। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की छात्रों पर 56 लाख रुपये फीस बकाया है। कोरोना के चलते फीस जमा करने के सिस्टम में जो बदलाव किया है उसका नतीजा यह रहा कि छात्र फीस जमा करने में लापरवाही बरत रहे हैं।
इनमें बीएएलएलबी ऑनर्स, एलएलएम के छात्र और पीएचडी के शोधार्थी शामिल हैं। कई बार नोटिस देने के बाद भी करीब 141 छात्रों ने फीस नहीं जमा की है।
कोरोना काल में छात्रों की डिमांड पर विवि प्रशासन ने फीस जमा करने की प्रक्रिया में बदलाव किया। सेशन की शुरूआत में ली जाने वाली एकमुश्त फीस को दो किस्तों में लेने का निर्णय लिया था।
विवि बंद था और छात्र घर पर रहकर पढ़ाई कर रहे थे, इसलिए विवि ने दोनों किस्तों में डिस्काउंट भी दिया। दो साल तक यह सिलसिला चलता रहा।
छात्र घर पर बैठकर ऑनलाइन पढ़े और परीक्षा भी ऑनलाइन दी। पर फीस जमा करने में लापरवाही बरतने लगे। हालत यह है कि अभी करीब 56 लाख रुपये बकाया है।
वह भी तब जब छात्रों को कई बार फीस जमा करने को नोटिस दिया गया। बताया जा रहा है कि पहले करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये बकाया था।
बार-बार नोटिस देने पर अंतिम वर्ष के अधिकतर छात्रों ने फीस जमा कर दी। अभी बीएएलएलबी ऑनर्स और एलएलएम के 94 छात्रों की फीस बकाया है, जबकि पीएचडी के 47 शोधार्थियों ने फीस जमा नहीं कराई है। किसी की 50 हजार तो किसी की तीन लाख रुपये से ज्यादा की फीस बकाया है।
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नोटिस जारी, रोक दिया जाएगा रिजल्ट
विवि प्रशासन ने फीस जमा न करने वाले सभी छात्रों को नोटिस जारी किया है। 15 मई तक फीस जमा करने का अल्टीमेटम दिया है। विवि प्रशासन ने छात्रों को नोटिस के माध्यम से कहा है कि फीस जमा न करने पर जुलाई में होने वाले सेमेस्टर परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। रिजल्ट भी रोक दिया जाएगा। वहीं, पीएचडी के शोधार्थियों का नामांकन निरस्त करने का नोटिस दिया है। पूरे मामले पर कुलपति प्रो. एसके भटनागर ने बताया कि कोविड की वजह से जो सिस्टम में बदलाव किया उससे यह स्थिति पैदा हुई है। सबकुछ ऑनलाइन था और छात्र घर पर थे। अब सभी छात्र हॉस्टल में आ जाएंगे तो किसी की भी फीस बकाया नहीं रहेगी।
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इनमें बीएएलएलबी ऑनर्स, एलएलएम के छात्र और पीएचडी के शोधार्थी शामिल हैं। कई बार नोटिस देने के बाद भी करीब 141 छात्रों ने फीस नहीं जमा की है।
कोरोना काल में छात्रों की डिमांड पर विवि प्रशासन ने फीस जमा करने की प्रक्रिया में बदलाव किया। सेशन की शुरूआत में ली जाने वाली एकमुश्त फीस को दो किस्तों में लेने का निर्णय लिया था।
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विवि बंद था और छात्र घर पर रहकर पढ़ाई कर रहे थे, इसलिए विवि ने दोनों किस्तों में डिस्काउंट भी दिया। दो साल तक यह सिलसिला चलता रहा।
छात्र घर पर बैठकर ऑनलाइन पढ़े और परीक्षा भी ऑनलाइन दी। पर फीस जमा करने में लापरवाही बरतने लगे। हालत यह है कि अभी करीब 56 लाख रुपये बकाया है।
वह भी तब जब छात्रों को कई बार फीस जमा करने को नोटिस दिया गया। बताया जा रहा है कि पहले करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये बकाया था।
बार-बार नोटिस देने पर अंतिम वर्ष के अधिकतर छात्रों ने फीस जमा कर दी। अभी बीएएलएलबी ऑनर्स और एलएलएम के 94 छात्रों की फीस बकाया है, जबकि पीएचडी के 47 शोधार्थियों ने फीस जमा नहीं कराई है। किसी की 50 हजार तो किसी की तीन लाख रुपये से ज्यादा की फीस बकाया है।
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नोटिस जारी, रोक दिया जाएगा रिजल्ट
विवि प्रशासन ने फीस जमा न करने वाले सभी छात्रों को नोटिस जारी किया है। 15 मई तक फीस जमा करने का अल्टीमेटम दिया है। विवि प्रशासन ने छात्रों को नोटिस के माध्यम से कहा है कि फीस जमा न करने पर जुलाई में होने वाले सेमेस्टर परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। रिजल्ट भी रोक दिया जाएगा। वहीं, पीएचडी के शोधार्थियों का नामांकन निरस्त करने का नोटिस दिया है। पूरे मामले पर कुलपति प्रो. एसके भटनागर ने बताया कि कोविड की वजह से जो सिस्टम में बदलाव किया उससे यह स्थिति पैदा हुई है। सबकुछ ऑनलाइन था और छात्र घर पर थे। अब सभी छात्र हॉस्टल में आ जाएंगे तो किसी की भी फीस बकाया नहीं रहेगी।