फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   fee refund processing pending

फिर लटकी छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति

Wed, 23 Oct 2013 12:09 AM IST
मोहन कुमार मंगलम/लखनऊ
मोहन कुमार मंगलम/लखनऊ Updated Wed, 23 Oct 2013 12:09 AM IST
विज्ञापन
fee refund processing pending

कमजोर तबके के छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति के मामले में जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

विज्ञापन


शुल्क की प्रतिपूर्ति किए जाने के हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने डबल बेंच में अपील की, जहां से उसे सुनवाई की अगली तारीख 22 अक्तूबर तक के लिए स्टे मिल गया है।

यह मामला पिछले साल नवंबर से हाईकोर्ट में विचाराधीन है और अब तक की स्थिति से साफ है कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को राहत देने के मूड में नहीं है।

हर बार अदालत में नया शपथपत्र दाखिल करके अफसर बच निकलने का रास्ता ढूंढते दिखे। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 54612 रुपये से कम सालाना आमदनी वाले परिवारों के छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
विज्ञापन


पढ़ें-शिक्षक भर्तीः काउंसलिंग के लिए रहें तैयार
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसा न हो पाने की स्थिति में यह भी आदेश दिया था कि संबंधित विभागों के सचिव इस आशय के शपथपत्र (जवाब) के साथ उपस्थित हों कि क्यों न उनके खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की कार्यवाही शुरू की जाए।

शासन की नीति के अनुरूप शुल्क की प्रतिपूर्ति न होने पर पिछले साल कुछ विद्यार्थी और संस्थान राहत पाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे।

इस तरह की सभी याचिकाओं को एक साथ करते हुए नवंबर में ‘राहुल सिंह एवं अन्य बनाम यूपी राज्य एवं अन्य’ के तहत सुनवाई शुरू हुई।

अदालत ने समाज कल्याण विभाग से पूछा कि शासनादेश के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति क्यों नहीं की जाती? इसके लिए हर बार रिट याचिका दायर करने की जरूरत क्यों पड़ती है?

कौन इसकी मॉनिटरिंग करता है कि जिन विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति की जा रही है, वे कोर्स पूरा कर भी रहे हैं या नहीं?

जवाब में राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार से उसके हिस्से की रकम न मिलने की बात कही गई, मगर इस तर्क को कोर्ट ने सही नहीं माना।

अदालत ने कहा कि छात्रों और संस्थानों को शुल्क प्रतिपूर्ति का शासनादेश राज्य सरकार का है, इससे छात्रों और संस्थानों को क्या मतलब कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच क्या तय हुआ है।

पढ़ें- मुंबई के लिए एसी स्पेशल ट्रेन 25 से

कुछ जिलों में अधिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति कर दिए जाने, जबकि दूसरे जिलों में उससे कम आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को शुल्क की प्रतिपूर्ति न किए जाने को अदालत ने बड़ी अनियमितता माना।

खुद राज्य के महाधिवक्ता एसपी गुप्ता ने अदालत में स्वीकार किया कि इन याचिकाओं में शामिल मुद्दा गंभीर है और इसके दूरगामी परिणाम (दुष्परिणाम) हो सकते हैं।

वहीं अपर महाधिवक्ता सीबी यादव ने अदालत को बताया कि राज्य के पास ऐसा कोई डाटा नहीं है, जिससे पता चल सके कि जिन विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति की गई है, उनमें से कितनों ने कोर्स पूरा किया और परीक्षा में बैठे।


अदालत ने अपने अंतरिम परमादेश में कहा कि विद्यार्थियों का वर्ग श्रेणी (अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक) के आधार पर बनता है।

संस्थान का स्थान यानी जिला वर्गीकरण का वैध आधार नहीं हो सकता। इसलिए राज्य सरकार 54612 रुपये से कम सालाना आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को शुल्क की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करे।

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने डबल बेंच में अपील की, जहां से उसे अगली तारीख तक स्टे मिल गया है। अब इस मामले की सुनवाई 22 अक्तूबर को होगी।

लखनऊ की और खबरों के लिए क्लिक करें यहां

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed