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नेक राह पर चलने की सीख देता है रोजा: मौलाना खालिद रशीद
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लखनऊ। रोजा इंसान को इच्छाओं पर नियंत्रण और नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। जन्नत में रोजेदारों के लिए ‘रैय्यान’ नाम का विशेष दरवाजा है, जिससे रोजेदार ही प्रवेश करेंगे। ये बातें मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने रमजानुल मुबारक के दूसरे जुमे पर जामा मस्जिद ईदगाह में दिए खुतबे में कहीं। उन्होंने कहा कि इस्लाम की बुनियाद ईमान, नमाज, जकात, रोजा और हज पर आधारित है। रोजा इंसान में तकवे की भावना पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि रोजे मुसलमानों पर इसलिए फर्ज किए गए हैं ताकि इंसान बुराइयों से दूर रहकर आत्मसंयम अपनाए। बिना जायज वजह के रोजा छोड़ना गुनाह है। मौलाना ने कहा कि रोजा ऐसी इबादत है जिसमें इंसान खाने-पीने की सुविधा होने के बावजूद अल्लाह की रज़ा के लिए खुद को रोकता है। रोजे का सवाब अल्लाह अता करते हैं। उन्होंने बताया कि दारुल इफ्ता फरंगी महल ने इस वर्ष सदका-ए-फित्र की रकम 70 रुपये तय की है। लोगों से अपील की गई कि जरूरतमंदों को ईद की खुशियों में शामिल करने के लिए सदका-ए-फित्र जरूर अदा करें।
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उन्होंने कहा कि रोजे मुसलमानों पर इसलिए फर्ज किए गए हैं ताकि इंसान बुराइयों से दूर रहकर आत्मसंयम अपनाए। बिना जायज वजह के रोजा छोड़ना गुनाह है। मौलाना ने कहा कि रोजा ऐसी इबादत है जिसमें इंसान खाने-पीने की सुविधा होने के बावजूद अल्लाह की रज़ा के लिए खुद को रोकता है। रोजे का सवाब अल्लाह अता करते हैं। उन्होंने बताया कि दारुल इफ्ता फरंगी महल ने इस वर्ष सदका-ए-फित्र की रकम 70 रुपये तय की है। लोगों से अपील की गई कि जरूरतमंदों को ईद की खुशियों में शामिल करने के लिए सदका-ए-फित्र जरूर अदा करें।
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