अखिलेश ने भाजपा के नेताओं पर खाई रहम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्रुखाबाद में माया शासनकाल में प्रभात फेरी निकालने के दौरान
सरकार द्वारा इस मुकदमे को वापस लेने के लिए कोर्ट की सहमति मिल चुकी है।
सरकार
ने यह फैसला जनहित में किया है। घटना 18 जनवरी 2009 को जिले के पंडाबाग
मंदिर से प्रभात फेरी निकालने के बाद हुई थी।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के
राष्ट्रीय मंत्री प्रांशुदत्त द्विवेदी की अध्यक्षता में यह प्रभात फेरी
बगैर जिलाधिकारी की अनुमति के निकाली गई थी।
जब इसे रोका गया तो भाजपा
कार्यकर्ताओं और पुलिस में तीखी झड़प हुई जो कुछ ही देर में हिंसक संघर्ष
में बदल गई थी।
इसमें न सिर्फ पुलिस पर पथराव हुआ बल्कि हवा में फायरिंग
करने के साथ ही वाहनों में आगजनी भी की गई थी। संघर्ष में घायल होने वालों
में भाजपा के साथ सपा नेता भी शामिल थे।
पुलिस
ने कुल 65 लोगों को नामजद करते हुए 500-600 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट
दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने 50 लोगों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र
भी दाखिल कर दिया था।
जिनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ, उनमें सपा नेता
मनमोहन मिश्र का नाम भी शामिल था। बाद में मुकदमे में फंसे सपा व भाजपा
नेताओं ने सरकार से मुकदमा वापस लेने का आग्रह किया था।
नेताओं
के इस आग्रह पर सरकार ने जनहित में मुकदमा वापस लेने का फैसला करते हुए
जिले के डीएम से इसके लिए रिपोर्ट मंगाकर न्याय विभाग का परामर्श लेकर
अदालत से इसकी अनुमति मांगी। मामले पर विचार करने के बाद अपर जिला जज पीएन
श्रीवास्तव ने मुकदमा वापस लेने की अनुमति दे दी।