{"_id":"5fae9eac8ebc3e9b7a5c045d","slug":"farmers-youth-have-never-had-such-bad-conditions-akhilesh","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों, नौजवानों के इतने बुरे हालात कभी नहीं रहे: अखिलेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों, नौजवानों के इतने बुरे हालात कभी नहीं रहे: अखिलेश
Fri, 13 Nov 2020 08:26 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 13 Nov 2020 08:26 PM IST
विज्ञापन
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि किसान और नौजवान भाजपा सरकार की गलत नीतियों के चलते गहरी मायूसी में है। इनकी दीवाली काली हो गई है। इतने बुरे हालात इनके कभी नहीं रहे। सरकार के तमाम दावे गीले पटाखो की तरह फुस्स हो गए हैं। गरीब की कहीं सुनवाई नहीं है। अब लोगों को वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों का बेसब्री से इंतजार है जब वह अपनी तकलीफों का एक-एक कर हिसाब लेंगे।
अखिलेश ने कहा, किसानों का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बिकने के बजाय बिचौलियों-आढ़तियों की भेंट चढ़ गया। करीब 20 लाख गन्ना किसानों का मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल की चीनी मिलों पर पिछले पेराई सत्र के 3,343 करोड़ रुपये बकाया है। प्रदेश में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये गन्ना किसानों का बकाया है। धान क्रय केंद्रों पर अनियमितताओं के चलते किसान को अपनी फसल बेचने में नाकों चने चबाने पड़े। अकेले संभल में धान खरीदी का 28 करोड़ रुपया बकाया है। किसानों का बकाया चुकता करने में देरी दुखद है। आखिर किसान कैसे मनाए त्योहार? पश्चिमी यूपी के किसानों की दीवाली भी फीकी रहेगी।
सपा अध्यक्ष ने कहा, स्वयं प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में धान खरीद के हालात अच्छे नहीं है। वहां 40 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक सिर्फ 670 मीट्रिक टन धान ही खरीदा जा सका है। धान लेकर आ रहे किसानों को बाद में आने के लिए कहा जा रहा है। उनको धान बेचने के लिए 2021 का टोकन दिया जा रहा है। अगली फसल की बुवाई के लिए किसान बिचौलियों को 1868 रुपये प्रति कुंतल रेट के बजाय 1100 में धान बेचने को किसान मजबूर है। नौजवानों का भविष्य भी अंधकार में है। अब तक न तो कहीं निवेश आया और न ही उद्योगों के लगने से रोजगार बढ़े। लॉकडाउन के दौरान बचे खुचे उद्योग भी बंद हो गए। कल कारखानों में छंटनी हो गईं।भाजपा सरकार बहकाने के लिए नई नौकरियां देने के दावे चाहे जितने करे हकीकत यह है कि नौकरियां मिलनी तो दूर उनके जाने का खतरा ज्यादा बड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अखिलेश ने कहा, किसानों का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बिकने के बजाय बिचौलियों-आढ़तियों की भेंट चढ़ गया। करीब 20 लाख गन्ना किसानों का मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल की चीनी मिलों पर पिछले पेराई सत्र के 3,343 करोड़ रुपये बकाया है। प्रदेश में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये गन्ना किसानों का बकाया है। धान क्रय केंद्रों पर अनियमितताओं के चलते किसान को अपनी फसल बेचने में नाकों चने चबाने पड़े। अकेले संभल में धान खरीदी का 28 करोड़ रुपया बकाया है। किसानों का बकाया चुकता करने में देरी दुखद है। आखिर किसान कैसे मनाए त्योहार? पश्चिमी यूपी के किसानों की दीवाली भी फीकी रहेगी।
विज्ञापन
सपा अध्यक्ष ने कहा, स्वयं प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में धान खरीद के हालात अच्छे नहीं है। वहां 40 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक सिर्फ 670 मीट्रिक टन धान ही खरीदा जा सका है। धान लेकर आ रहे किसानों को बाद में आने के लिए कहा जा रहा है। उनको धान बेचने के लिए 2021 का टोकन दिया जा रहा है। अगली फसल की बुवाई के लिए किसान बिचौलियों को 1868 रुपये प्रति कुंतल रेट के बजाय 1100 में धान बेचने को किसान मजबूर है। नौजवानों का भविष्य भी अंधकार में है। अब तक न तो कहीं निवेश आया और न ही उद्योगों के लगने से रोजगार बढ़े। लॉकडाउन के दौरान बचे खुचे उद्योग भी बंद हो गए। कल कारखानों में छंटनी हो गईं।भाजपा सरकार बहकाने के लिए नई नौकरियां देने के दावे चाहे जितने करे हकीकत यह है कि नौकरियां मिलनी तो दूर उनके जाने का खतरा ज्यादा बड़ा है।
विज्ञापन