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खेतों में बिछ गया धान, दलहन-तिलहन को भी नुकसान

Wed, 20 Oct 2021 01:45 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 01:45 AM IST
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farmers upset due to heavy rain
राजधानी में दो दिन की बेमौसम बरसात ने किसानों को खासा नुकसान पहुंचाया है। खास तौर पर धान की खड़ी तैयार फसल बारिश में भीगकर खेतों में ही बिछ गई। कई जगह कटा हुआ धान भी भीग गया। वहीं लौकी, तरोई, बैंगन जैसी सब्जियों को भी खेतों में पानी भरने से काफी नुकसान हुआ है। आलू की अगेती बुआई प्रभावित हुई है। तिलहन व दलहन की फसलों के लिए भी यह पानी नुकसान दायक है।
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किसानों के साथ विशेषज्ञ भी इस बारिश को किसानों के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं। अमर उजाला ने विभिन्न क्षेत्रों में बारिश के फसल पर प्रभाव की पड़ताल की तो कुछ ऐसी ही स्थिति सामने आई। आइए जानते हैं कहां क्या है स्थिति..
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नगराम : धान की लागत निकलना भी मुश्किल
किसानों के अनुसार अतिवृष्टि से धान की फसल क्षतिग्रस्त होने से लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। खरगापुर के किसान ब्रजेश मिश्र ने बताया कि चार बीघा खेत में धान की फसल की रोपाई कराई थी। सपना संजोया था कि धान की बिक्री के बाद मिलने वाली रकम से लड़की हाथ पीले करेंगे, लेकिन खेत में तैयार धान की फसल गिर गई। बचनखेड़ा के अंबरीष वर्मा भी बेटी की शादी करने वाले थे, मगर अब निराश हैं। जौखंडी के ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि बैंक से कर्ज लेकर फसल पर खर्च किया था। अब कर्ज कैसे अदा हो सकेगा। दोरिया के बंशीलाल, सिरौना के रामकुमार पांडेय को भी लागत न निकलने का डर है। कृषि विशेषज्ञ कृष्ण कुमार का कहना है कि अधिकांश जगह बारिश व तूफान से धान की फसलें गिर गई हैं। इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अगर खेतों में पानी भरा रहेगा तो धान अंकुरित हो सकता है व धान का रंग काला पड़ सकता है। बाजार में उचित कीमत नहीं मिलेगी।
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मलिहाबाद : फलपट्टी के बागवानों को राहत
मलिहाबाद क्षेत्र में सैकड़ों बीघा धान की फसल बारिश व तेज हवाओं से खेत में बिछ गई। पुरवा गांव के किसान संजय सिंह के अनुसार ज्यादातर धान की फसल पकने के कगार पर थी, लेकिन सब बर्बाद हो गई। फसल गिरने से अब धान कमजोर हो जाएगा और पैदावार में भारी कमी देखने को मिलेगी। साथ ही पयाल भी खराब होगा। हालांकि इस बारिश से फलपट्टी क्षेत्र के बागवानों को राहत पहुंची है। आम के पेड़ों पर पनपने वाले कीट धुल गए हैं। बागों में समाप्त हो रही नमी फिर से बन गयी है, जो आगामी फसल के लिए फायदेमंद साबित होगी। उधर, एडीओ कृषि रामऔतार गुप्ता ने बताया कि क्षेत्र के कुछ इलाकों में बारिश व हवाओं से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। आकलन कराया जा रहा है। किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
काकोरी : खेत बने तालाब, फसल हो रहीं बर्बाद
काकोरी क्षेत्र में धान के साथ दलहनी व तिलहनी फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। साथ ही आलू, सरसों और मटर की अगेती बुवाई करने वालों की फसल भी नष्ट होने का अंदेशा है। बरसात का पानी खेतों के बीच से बह रहा है। जलभराव से लौकी, तोरई, बैंगन सहित अनेक सब्जियों की फसलें तो पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगी। इस बार दलहनी व तिलहनी फसलें अच्छी थीं। किसानों ने रतजगा कर इन फसलों को छुट्टा मवेशियों से बचा कर रखा था। बारिश ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसान मुन्ना, विजय, कल्लू यादव, सोनू व अन्य ने बताया कि बेमौसम बरसात किसानों के लिए दैवीय आपदा से कम नहीं है। आगे की फसल बुवाई भी प्रभावित हो रही है। किसानों ने प्रशासन से खराब हो चुकीं फसलों का आकलन करा मुआवजा दिलाने की मांग उठाई है। केंद्रीय उपोषण बागवानी संस्थान रहमान खेड़ा लखनऊ के डॉ. प्रभात कुमार शुक्ला के अनुसार तेज बारिश से किसानों की फसलों पर 15 से 20 प्रतिशत तक असर पड़ा है। यदि आगे ऐसे दो-चार दिन तेज हवाओं के साथ बारिश हुई तो फसलें बर्बाद हो जाएंगी।
निगोहां : मड़ाई के लिए हफ्ते भर इंतजार
निगोहां में लगभग तीस प्रतिशत तक किसानों की धान की फसलें खेतों में कटी पड़ी थीं, जो भीग गईं। अब किसानों को मड़ाई के लिए लगभग एक हफ्ते इंतजार करना होगा। यदि बारिश फिर हो गई तो फसल का बीज अंकुरित होने लगेगा। नयाखेड़ा के किसान मनीष, कृपा शंकर द्विवेदी, करुणाशंकर व अन्य किसानों ने बताया कि एक तो पैदावार कम ही हुई है, ऊपर से ये आफत आन पड़ी। आलू की बुवाई पर भी असर पड़ा है। बारिश के एकाध दिन पहले तिलहन की बुवाई कराने वाले किसान भी चिंतित हैं, क्योंकि मिट्टी दब गई है। बीज अंकुरित होकर न निकला तो बुवाई और जुताई फिर करानी पड़ेगी। उधर, मोहनलालगंज में सिसेंडी के बृजेश समेत कई किसानों ने बताया कि सबसे ज्यादा उस धान की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिस फसल में बालियां आ रहीं हैं। ऐसी फसल गिर गईं जो अब दोबारा सीधी नहीं हो सकती। मोहनलालगंज के सिसेण्डी, मऊ, भदेसुवा, जबरौली समेत तमाम गांवों में फसलें बर्बाद हो गई हैं।

सरोजनीनगर, माल में किसान परेशान
खेतों में पानी भरने से धान की फसल सड़ने की आशंका है। इसको लेकर किसान काफी चिंतित हैं। बंथरा निवासी रामकिशोर यादव ने बताया कि हम एक-दो दिन में कटाई शुरू करने वाले थे, लेकिन अधिक बरसात से हमारी धान की फसल खेत में गिर गई। भटगवां पांडे निवासी अभिलाष ने बताया कि हमारी साल भर की कमाई दांव पर लग गई है। माल क्षेत्र में रामनगर गांव के सब्जी उत्पादक किसान संतोष कुमार ने बताया बारिश के कारण लौकी की पूरी बारी खराब हो गई है। नौबस्ता गांव के किसान लालऊ का कहना है कि सरसों लाही की बुवाई कर दी थी, अब पानी के कारण वह खराब हो रही है। अगेती आलू की खेती करने वाले पीरनगर निवासी किसान रामनरायन ने बताया कि कुछ हिस्से में आलू की बुवाई हो चुकी है, वह बर्बाद हो जाएगी। साथ ही कटा आलू समय से बोया नहीं जा सकेगा, जिससे उसमें भी बड़ी हानि हुई है। अमलौली गांव के किसान अवधेश कुमार सिंह व माल के अजय प्रताप सिंह का कहना है कि तिल्ली और उरद की फसल को भी बरसात से काफी नुकसान हुआ है। सब्जी उत्पादन करने वाले अधिकांश किसान परेशान हैं। सहायक कृषि अधिकारी वीरेंद्र कुमार वर्मा के अनुसार धान की फसल को काफी नुकसान होगा। खेतों में कटी पड़ी फसल का उत्पादन कम होगा। हालांकि जो फसल अभी खेतों में खड़ी है, उसमें कोई नुकसान नहीं होगा।
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