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Lucknow News: चंदे से किसानों ने शुरू कराई माइनर की सफाई, करेंगे खेत की सिंचाई

Tue, 25 Jun 2024 05:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Tue, 25 Jun 2024 05:26 AM IST
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Farmers started cleaning of minor with donations, will irrigate the fields
जगतपुर क्षेत्र में शंकरपुर माइनर की सफाई करती जेसीबी। - फोटो : संवाद
जगतपुर (रायबरेली)। शंकरपुर माइनर की सिल्ट किसानों को पिछले पांच से रुला रही है। सिंचाई विभाग सिल्ट सफाई के नाम पर खानापूर्ति करता है और उसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। खेती के जरिए पेट और परिवार पालने वाले किसानों के लिए शंकरपुर की सूखी माइनर किसी अभिशाप से कम नहीं है। ऐसे में 60 किसानों ने 30 हजार रुपये का चंदा एकत्र कर तीन किमी तक फैली माइनर की सिल्ट सफाई का काम शुरू कर दिया है।
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शारदा सहायक से निकली माइनर जगतपुर से शंकरपुर तक करीब छह किमी लंबी है। इसपर भटपुरवा, दौलतपुर, शिवगंज, उड़वा, बिछिया, उमरी, तिवारीपुर, पंडित का पुरवा समेत 30 गांवों की खेत की सिंचाई टिकी है। धान रोपाई का जब समय आता है तो किसानों को सिल्ट सफाई का खुद ही बीड़ा उठाना पड़ता है। असल में शुरुआती तीन किमी माइनर निची है तो सिल्ट होने के बाद भी वहां पानी पहुंच जाता है।
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उसके बाद तीन किमी ऊंचाई अधिक है। यह स्थान पूरब गांव, दौलतपुर, उमरी, जमोड़ी, सिंघापुर भटौली, शंकरपुर में आता है। ऐसे में इन गांवों में पानी नहीं पहुंच पाता। शुक्रवार को किसानों ने करीब 30 रुपये चंदा एकत्र कर सिल्ट की सफाई शुरू करा दी।
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72 घंटे से चल रही जेसीबी, एक हजार रुपये किराया
तीन किमी माइनर की सफाई के लिए दो जेसीबी लगाई गई हैं। एक जेसीबी एक हजार रुपये प्रतिघंटे का किराया ले रही है। अब तब 72 घंटे में 2.5 किमी माइनर की सफाई हुई है। मंगलवार को तीन किमी माइनर की सफाई हो जाएगी।
कोई नहीं सुनता
किसान अनिल वाजपेयी बताते हैं कि तीन किमी माइनर की सफाई कराई जा रही है। सिंचाई विभाग मांगों पर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। ऐसे में हमें चंदा एकत्र कर सफाई करानी पड़ रही है।
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पांच साल से मशक्कत
किसान विकास तिवारी कहते हैं कि सिंचाई विभाग के पास पांच साल से शिकायती पत्र दिया जा रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। चंदा एकत्र करने के बाद भी जो अलग से खर्चा आता है, उसे दिया जाता है।
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माइनर पर ही टिकी सिंचाई
किसान कल्लू सिंह कहते हैं कि शंकरपुर माइनर का पानी किसानों के लिए बहुत जरूरी है। खरीफ की पूरी फसल इसी के पानी पर निर्भर रहती है। सिंचाई विभाग मसले पर गंभीर नहीं है। स्थानीय लोगों का बुरा हाल है।
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बस चंदे का सहारा
किसान विमलेश सिंह कहते हैं कि सिंचाई विभाग के साथ प्रशासन को भी इस पर ध्यान देना चाहिए। किसानों की यह बड़ी समस्या है, लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है। इस कारण चंदे का सहारा लिया जा रहा है।

खरीफ के लिए नहीं मिलता बजट
सिल्ट सफाई के लिए रबी सीजन में बजट मिलता है। खरीफ में कोई बजट नहीं है। किसानों ने चंदा लगाकर यदि सफाई कराई है तो इसकी जानकारी नहीं है।
राम विलास सिंह
एक्सईएन, सिंचाई खंड दक्षिणी

कराई जाएगी जांच
शंकरपुर माइनर में सिल्ट जमा है और पानी नहीं आ रहा है तो सिंचाई विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। किसानों की समस्या का हर हाल में निस्तारण कराया जाएगा।
प्रफुल्ल त्रिपाठी, एडीएम प्रशासन

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