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पढ़िए, सरकारी 'दामाद' और 'माया' का एक जैसा खेल

Mon, 01 Dec 2014 12:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 01 Dec 2014 12:38 PM IST
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Yadav Singh and Mayawati's Similar Farm House Scam

बसपा राज में एक हजार करोड़ के जिस फार्म हाउस घोटाले में लोकायुक्त ने क्लोजर रिपोर्ट लगा दी है, उसमें भी खेल तो यादव सिंह जैसा ही हुआ था।

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नोएडा प्राधिकरण ने फार्म हाउस के नाम पर बेशकीमती जमीन कंपनियों और चहेतों को औने-पौने दाम में आवंटित कर दी थी। इसमें 10 हजार वर्ग मीटर से लेकर 15 हजार वर्ग मीटर तक के प्लॉट हैं।
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खेल तो ऐसा भी हुआ कि प्लॉट पहले आवंटित कर दिए गए और कंपनी बाद में बनी। एक ही परिवार में कई फार्म हाउस बांट दिए गए।

इनमें यादव सिंह जैसे सभी सरकार के चहेतों में शुमार पोंटी चड्ढा, पान मसाला व्यवसायी और बिल्डर, नेता व अफसर भी हैं। इससे सरकार को एक हजार करोड़ रुपये की चपत लगी।
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लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा की क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि फॉर्म हाउस की दरें तय करने में शासन या नोएडा प्राधिकरण को कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ।

लोकायुक्त का तर्क यह भी है कि जमीन की कीमत तो नोएडा प्राधिकरण ने पहले ही निकल आई थी। फार्म हाउस की जमीन की कीमत तो नोएडा प्राधिकरण का मुनाफा है।

सालभर पहले माया को मिली थी क्लीनचिट

Yadav Singh and Mayawati's Similar Farm House Scam

घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती पर भी सवाल उठे थे लेकिन लोकायुक्त ने उनको तो करीब साल भर पहले ही क्लीनचिट दे दी थी। चार दिन पहले बृहस्पतिवार को मामले में क्लोजर रिपोर्ट भी लगा दी। यह पहला मामला नहीं है।

बसपा सरकार के स्मारक घोटाले में लोकायुक्त की जांच पर सवाल उठे थे। लोकायुक्त ने अपनी जांच में तत्कालीन मंत्रियों और इंजीनियरों को तो दोषी पाया लेकिन फाइलों पर दस्तखत करने वाले एक भी आईएएस अफसर को जिम्मेदार नहीं माना था।

लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने बताया कि जमीन का अधिग्रहण कैसे होता है, यह मेरी जांच का विषय नहीं था। अफसरों ने बताया कि नोएडा में इमरजेंसी क्लॉज से ही जमीन ली जाती रही है इसलिए मैंने इस पर गौर नहीं किया।

फॉर्म हाउस योजना में एक परिवार के दो प्लॉट लेने पर भी रोक नहीं थी। मैंने किसी दबाव में जांच बंद नहीं की।

इस घोटाले का खुलासा स्थानीय लेखा परीक्षा की जांच में हुआ। जांच में सामने आया कि नोएडा के अफसरों ने मनमाने तरीके से जमीनों का आवंटन किया है।

इसके लिए न तो टेंडर मांगे गए और न ही खुली बोली लगाई गई जबकि नियमानुसार ऐसी जमीनों को आवंटित करने के लिए टेंडर निकालते हुए खुली बोलियां लगाई जानी चाहिए जिससे अथॉरिटी को अधिक से अधिक फायदा होता।

मोहिंदर के समय हुआ खेल

Yadav Singh and Mayawati's Similar Farm House Scam

बसपा शासन में नोएडा प्राधिकरण में फार्म हाउस आवंटन घोटाले के समय मोहिंदर सिंह मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। सत्ता बदलते ही अखिलेश सरकार ने इसकी जांच लोकायुक्त को सौंप दी।

कहा तो यहां तक जाता है कि लोकायुक्त जांच के लिए अखिलेश सरकार के कृपापात्रों में रहे मोहिंदर सिंह के रिटायर होने का इंतजार किया गया ताकि दोषी पाए जाने पर उनकी पेंशन न रुक जाए। इस जांच में मोहिंदर समेत 13 अन्य अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

3100 वर्ग मीटर की दर से बांटे 7 हजार से अधिक के प्लॉट
जमीन का आवंटन 3100 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से किया गया जबकि आंतरिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक पहली योजना में 6,921 और दूसरी में 7650 रुपये वर्ग मीटर होनी चाहिए।

कम दरों पर प्लाटों के आवंटन से पहली योजना में सरकार को 605.97 करोड़ तथा दूसरी योजना में 394.90 करोड़ रुपये (कुल 1000.87 करोड़) की चपत लगी।

इमरजेंसी क्लॉज से हासिल की जमीन

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नोएडा में फार्म हाउस के लिए जमीन का अधिग्रहण धारा 4/17 यानी इमरजेंसी क्लॉज लागते हुए की गई। इस धारा का इस्तेमाल सरकारी परियोजनाओं के लिए तत्काल जमीन की जरूरत होने पर की जाती है।

किसानों से फार्म हाउस के लिए कृषि की जमीनें ली गईं। फार्म हाउस के लिए आवंटित होने वाले जमीन के आधे से अधिक क्षेत्रफल का इस्तेमाल कृषि के लिए ही किया जाना चाहिए, लेकिन यहां तो होटल, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हाल तक खुल गए।

फार्म हाउस के नाम पर ली गई अधिकतर जमीनों का व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू हो गया। इन जमीनों को यदि आवासीय या व्यावसायिक में नोएडा ने करके बेचा होता तो अरबों रुपये का फायदा होता।

प्रमुख कंपनियां व लोग जिन्हें मिला प्लाट
गाजियाबाद के उद्योगपति ज्ञान प्रकाश गोयल, अनिल कुमार मित्तल व उनके परिजन को 11 भूखंड। रियल स्टेट कंपनी थ्री-सी यूनीवर्सल डवलपर के निदेशक व प्रमोटर को कुल आठ भूखंड। रजनीगंधा पान मसाला कंपनी के मालिक धर्मपाल-सत्यपाल संस को कुल छह भूखंड।

गुरदीप सिंह चड्ढा उर्फ पोंटी चड्ढा, राजेंद्र सिंह चड्ढा, जावेद अहमद, जतिंदर कौर की कंपनी को तीन भूखंड। शांति भूषण व जयंत भूषण दोनों वरिष्ठ वकील हैं इन्हें दो भूखंड। यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के पूर्व महाप्रबंधक ललित विक्रम की पत्नी अलका की कंपनी को दो भूखंड।

बसपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य अखिलेश दास की पत्नी अलका दास को एक भूखंड। विनीता नायर व पूर्व एडिशनल सालिसिटर जनरल विकास सिंह को एक-एक भूखंड। सैनिक फॉर्म नई दिल्ली के नाम पर अलग-अलग कंपनियों को पांच भूखंड।

यादव सिंह सिंडीकेट के आज खुलेंगे लाकर्स

Yadav Singh and Mayawati's Similar Farm House Scam

आयकर विभाग नोएडा अथॉरिटी के इंजीनियर यादव सिंह सिंडीकेट पर सोमवार से शिकंजा कसने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इस दौरान यादव सिंह और 40 कंपनियों के डायरेक्टर के 13 लाकर्स को भी खोला जाएगा। इस लाकर्स के खुलने से भ्रष्टाचार का नया जिन्न बाहर निकल सकता है।

आयकर अफसरों का मानना कि जिन दो डायरेक्टर ने 50 करोड़ की काली कमाई सरेंडर की उसके दस्तावेज लाकर्स से बरामद हो सकते हैं।

आयकर महानिदेशक (जांच) कृष्णा सैनी ने बताया कि यादव सिंह सिंडीकेट के 20 ठिकानों से जब्त किए गए अभिलेखों को सूचीबद्ध करने के बाद सोमवार से गहन जांच की प्रक्रिया शुरू होगी। इस जांच में जो दायरे में आएगा उसको तलब कर पूछतांछ की जाएगी।

वहीं आयकर निदेशक (जांच) अशोक कुमार त्रिपाठी के मुताबिक यादव सिंह उसकी पत्नी कुसुम लता और डायरेक्टर राजेंद्र मनोचा, नम्रता मनोचा, अनिल पेशावरी के ठिकानों से नोएडा एवं गाजियाबाद की आधा दर्जन बैंक में 13 लाकर्स का विवरण मिलने के बाद 27 नवंबर को सील कर दिया गया था।

इनमें अधिकतर लाकर्स यादव सिंह के हैं। उन्होंने बताया कि सभी लाकर्स को सोमवार सुबह से खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी। निदेशक का अनुमान है कि इन लाकर्स से कैश, गहने, निवेश एवं कारोबारी अभिलेख निकल सकते हैं।

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