सेहत के लिए फेन्टा सॉफ्टड्रिंक खतरनाक
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फेन्टा ब्रांड से बिकने वाली सॉफ्टड्रिंक सेहत के लिए अनसेफ है। इसके सेवन से पेट और स्किन की बीमारियां हो सकती हैं।
यह खुलासा फेन्टा की एफएसडीए की लैब टेस्टिंग रिपोर्ट में हुआ है। फेन्टा बोतल के सीलबंद नमूने की जांच में सेहत के लिए घातक माईसिलिया व र्स्पोस की पुष्टि हुई है।
इससे पेट संबंधी गड़बड़ियों के साथ-साथ स्किन की बीमारी भी हो सकती है। एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के प्रोडक्ट फेन्टा के नमूने कंपनी के झांसी डिपो से लिए गए थे। इनकी बॉटलिंग राजधानी के सफेदाबाद प्लांट से हुई थी।
सूत्रों के अनुसार राजधानी लखनऊ से सटे सफेदाबाद स्थित बृन्दावन बॉटलर्स प्रा. लि. के बॉटलिंग प्लांट में तैयार व पैक हुई फेन्टा ब्रांड की बैच नंबर एफएक्स 11 ईपीओ नंबर 7072 वाली सॉफ्टड्रिक बोतल झांसी डिपो को सप्लाई हुई थी।
16 सितंबर को झांसी में एफएसडीए टीम की कार्रवाई के बाद उक्त डिपो से फेन्टा के बोतल का नमूना जांच के लिए भेजा गया था।
30 सितंबर को इसकी रिपोर्ट आई। लैब एनालिस्ट डॉ. एससी तिवारी ने रिपोर्ट में माईसीलिया व स्पोर्स की पुष्टि करते हुए नमूने को निगेटिव व अनसेफ श्रेणी में दर्शाया है।
निगेटिव रिपोर्ट के बाद भी सो रहे जिम्मेदार एफएसडीए के जिम्मेदार अधिकारियों ने भी इस रिपोर्ट के आने के एक माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। न तो अनसेफ पाए गए सॉफ्टड्रिक के अन्य शहरों में बिकने वाले फेन्टा ब्रांड को जांचने परखने की जरूरत समझी गई और न ही इस दौरान सॉफ्ट ड्रिंक की कोई सैंपलिंग कराई गई।
यह स्थिति तब है जब सुप्रीम कोर्ट ने एफएसडीए अधिकारियों को बाजारों में बिक रही सॉफ्टडिंक की नियमित तौर पर जांच पड़ताल का निर्देश भी जारी कर रखा है।
मामला रफा-दफा करने की तैयारी कार्रवाई की जगह एफएसडीए मुख्यालय से जुड़े कुछ अधिकारी इस पूरे मामले को रफा-दफा कराने के लिए जोड़-तोड़ में जुट गए हैं। इसके लिए उत्पादन से जुड़ी कंपनी के जिम्मेदारों को आयुक्त स्तर पर लैब रिपोर्ट को चुनौती दिए जाने की अपील दायर कराने की कवायद है।
पहले भी चर्चा में आई थी कंपनी सफेदाबाग स्थित सॉफ्टड्रिंक्स बनाने वाली बॉटलिंग कंपनी के लखनऊ स्थित डिपो व सफेदाबाद स्थित प्लांट पर एफएसडीए टीम पांच माह पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। यह कार्रवाई सॉफ्ट ड्रिक्स में खतरनाक बेन्जीन की आशंका वाली गंभीर शिकायत के बाद हुई थी।
जांच टीम ने कार्रवाई के दौरान पाया था कि बॉटलिंग प्लांट में पैक स्टाक को मई-जून की तीखी गर्मी में भी खुले स्थान पर रखा था। बाद में लैब स्तर पर बेन्जीन जांच की सुविधा व संसाधन न हो पाने विवशता दर्शाते हुए जारी रिपोर्ट में पैकेजिंग एक्ट की अनदेखी दर्शाते हुए पूरा मामला निपटा दिया गया।