बसपा शासन में ग्रेटर नोएडा में हुईं नियुक्तियां रद्द करने की तैयारी, योगी सरकार ने मांगी जानकारी
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बसपा शासन में ग्रेटर नोएडा में नियम-कायदे को ताक पर रखकर की गई भर्ती में बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। औद्योगिक विकास विभाग ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ से अनियमित भर्ती के दायरे में आए 58 कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। सूचना मिलने के बाद कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में वर्ष 2002-03 में मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर से लेकर चपरासी के 67 पदों पर भर्ती की गई थी। बसपा सरकार जाने के बाद 15 वर्ष से अब तक इस मामले की तीन बार जांच हो चुकी है। हर बार भर्ती में अनियमिता की पुष्टि हुई और 58 लोगों की नियुक्ति नियम विरुद्ध करार दी गई। लेकिन कार्रवाई कभी नहीं हुई।
योगी सरकार बनने के बाद जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने यह मामला फिर उठाया था जिस पर मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के लिए निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देश के बाद औद्योगिक विकास विभाग के विशेष सचिव प्रभांशु श्रीवास्तव ने सीईओ ग्रेटर नोएडा को पत्र लिखकर जांच में अवैध नियुक्ति के चिह्नित कर्मियों के पदनाम, उनसे संबंधित आरोप पत्र और साक्ष्य सहित सभी जानकारी शासन को उपलब्ध कराने को कहा है। कार्रवाई शासन स्तर से होनी है।
माना जा रहा है कि अथॉरिटी से सूचनाएं आते ही कार्रवाई होगी। विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक मंगलवार शाम तक अथॉरिटी से सूचनाएं प्राप्त नहीं हुई हैं।
5 चरण में 67 भर्ती, 58 फर्जी
अथॉरिटी ने पांच चरणों में 67 लोगों की भर्ती की थी। इसमें से 58 कर्मियों की भर्ती में अलग-अलग तरह का फर्जीवाड़ा किया गया था। तमाम लोगों की भर्ती शैक्षिक योग्यता शिथिल कर की गई।
बैकलाग के आठ पद थे, लेकिन नियुक्ति 23 की कर दी गई। इसी तरह संविदा के 39 पद थे, लेकिन नियमित नियुक्ति कर दी गई। एससी-एसटी के लिए सुरक्षित पदों पर 5 गैर आरक्षित वर्ग के लोगों की नियुक्ति की गई।