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यूपी में फर्जी फास्टैग घोटाला: अब तक पांच करोड़ से अधिक की चपत, फुटेज से छेड़छाड़ की आशंका
Sun, 27 Sep 2026 08:51 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 27 Sep 2026 08:51 AM IST
सार
Fastag scam in UP: अब एसटीएफ डीवीआर और सर्वर से पुराना डाटा रिकवर कराने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे आशंका है कि सुबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई हो सकती है।
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यूपी में फास्टैग में फर्जीवाड़ा।
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों से फास्टैग बनवाकर टोल पार करने के मामले में जांच में बड़ा राजस्व नुकसान सामने आया है। अब तक चिन्हित 142 वाहनों ने पांच करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की चपत लगाई है। यह शुरुआती आकलन है। जांच पूरी होने के बाद नुकसान की रकम और भी बढ़ सकती है।
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आरटीओ ने तीन अप्रैल 2026 को सरोजनीनगर थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों से फास्टैग बनवाकर टोल पार करने की शिकायत के बाद विवेचना एसटीएफ को सौंपी गई। एसटीएफ ने पांच आरोपी गिरफ्तार किए थे। बीते मंगलवार को एसटीएफ ने टोल प्लाजा पर छापा मारकर डीवीआर, सर्वर और दस्तावेज कब्जे में लिए।
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अब एसटीएफ डीवीआर और सर्वर से पुराना डाटा रिकवर कराने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे आशंका है कि सुबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई हो सकती है। फुटेज और सर्वर डाटा मिलने के बाद यह स्पष्ट होगा कि फर्जी नंबर वाले वाहन कब-कब और कितनी बार टोल से गुजरे।
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