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फर्जी चकबंदी अधिकारी ने हजारों विवादित मामलों में किया था फैसला, बैठाई गई जांच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 02 Jun 2018 01:35 PM IST
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चकबंदी के दौरान जनपद में चकबंदी अधिकारी रहे बंश बहादुर सिंह की नियुक्ति फर्जी थी। कथित सीओ ने करीब 2698 मामलों में फैसला सुनाया था, जो विवादित थे। यह खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुई है। इन्हीं मामलों में सोहावल की ग्राम पंचायत मोइया कपूरपुर के 34 मामले भी शामिल हैं।
जिनमें कुछ मामलों में कोर्ट में निगरानी दाखिल की गई है। वर्ष 92 में जनपद में चकबंदी अधिकारी के रूप में बंश बहादुर सिंह कथित तौर पर तैनात थे। बताया गया है कि इनके द्वारा करीब 2698 मामलों की सुनवाई कर फैसला सुनाया गया। इसमें मोइया कपूरपुर सोहावल के करीब 34 मामले थे।
फैसलों को 1995 में गांव निवासी चंद्र मोहन ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी तो उच्च न्यायालय के आदेश पर कथित चकबंदी अधिकारी हटाए गए और जांच बैठा दी गई। नायब तहसीलदार पैगाम हैदर बताते हैं न्यायालय के आदेश पर मामले में अभी भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
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जिनमें कुछ मामलों में कोर्ट में निगरानी दाखिल की गई है। वर्ष 92 में जनपद में चकबंदी अधिकारी के रूप में बंश बहादुर सिंह कथित तौर पर तैनात थे। बताया गया है कि इनके द्वारा करीब 2698 मामलों की सुनवाई कर फैसला सुनाया गया। इसमें मोइया कपूरपुर सोहावल के करीब 34 मामले थे।
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फैसलों को 1995 में गांव निवासी चंद्र मोहन ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी तो उच्च न्यायालय के आदेश पर कथित चकबंदी अधिकारी हटाए गए और जांच बैठा दी गई। नायब तहसीलदार पैगाम हैदर बताते हैं न्यायालय के आदेश पर मामले में अभी भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
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जिले में नहीं थे कभी कार्यरत
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सोहावल निवासी गुड़िया सिंह ने जनसूचना चाही तो बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने सूचना दी है कि जनपद में चकबंदी अधिकारी के रूप में बंश बहादुर सिंह की नियुक्ति कभी नहीं थी। धारा 52 का प्रकाशन 1997 में चकबंदी आयुक्त द्वारा किया गया था।डीएम डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि तत्कालीन कथित अधिकारी के सभी फैसले निरस्त किए जा चुके हैं।
सोहावल तहसील क्षेत्र के मोइयाकपूरपुर गांव के संदर्भ में फैसले के मद्देनजर स्थलीय और अभिलेखीय जांच अपर जिलाधिकारी प्रशासन को सौंप दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ब्रत देव पांडेय ने बताया कि चकबंदी अधिकारी बंश बहादुर सिंह इस जिले में कभी कार्यरत नहीं थे। अन्य कार्रवाईयों के साथ उनके द्वारा किए गए कई फैसलों को तत्कालीन जिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया था
सोहावल तहसील क्षेत्र के मोइयाकपूरपुर गांव के संदर्भ में फैसले के मद्देनजर स्थलीय और अभिलेखीय जांच अपर जिलाधिकारी प्रशासन को सौंप दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ब्रत देव पांडेय ने बताया कि चकबंदी अधिकारी बंश बहादुर सिंह इस जिले में कभी कार्यरत नहीं थे। अन्य कार्रवाईयों के साथ उनके द्वारा किए गए कई फैसलों को तत्कालीन जिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया था