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टीवी नहीं गैजेट्स हैं लखनऊ के टीनएजर्स की पहली पसंद
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 26 Jun 2014 04:38 AM IST
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पीढ़ी बदल चुकी है और उनके शौक भी। टीनएजर्स की गैजेट लिस्ट से टेलीविजन गायब हो चुके हैं। अब स्मार्ट फोन और उस पर मौजूद फेसबुक जैसी सोशल मीडिया उनकी पहली पसंद बन चुकी है।
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यह दावा है टाटा कंसल्टेंसी सर्विस द्वारा हुए जनरेशन-वाई सर्वेक्षण के निष्कर्ष का। इस सर्वे में लखनऊ सहित विभिन्न शहर के पब्लिक स्कूलों में पढ़ रहे करीब डेढ़ हजार टीनएजर्स को शामिल किया गया था।
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सर्वे में सर्वाधिक 1400 टीनएजर्स बच्चे लखनऊ के थे। टीसीएस ने बुधवार को सर्वेक्षण के लखनऊ के नतीजे जारी किए। इसमें 37.99 प्रतिशत बच्चों ने बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में उन्हें अपना स्मार्ट फोन सबसे प्यारा है।
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दूसरे नंबर पर 33.75 प्रतिशत के साथ टैबलेट व लैपटॉप रहे तो तीसरे व चौथे पर म्यूजिक प्लेयर व गेमिंग कंसोल को क्रमश: 16.93 प्रतिशत और 16.28 प्रतिशत बच्चों ने पसंद किया गया।
इस लिस्ट में टेलीविजन को कहीं जगह नहीं मिली है। करीब चार दशक तक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक गैजेट रहे टेलीविजन को लखनऊ की नई उभरती पीढ़ी नकारती दिख रही है तो इसकी वजह उनकी बदलती जरूरतें है।
वे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के संपर्क में हर समय रहना चाहती हैं। उनकी इस जरूरत को स्मार्ट फोन और उस पर मौजूद सोशल मीडिया पूरी कर रहा है।
वे दुनिया भर की जानकारी पलक झपकते सामने चाहते हैं, जो टेबलेट और लैपटॉप में मौजूद इंटरनेट दे रहा है।
हां, वे अपनी पसंद का मनोरंजन भी चाहते हैं, पसंद का गीत सुनने के लिए टीवी पर इंतजार करने का समय उनके पास नहीं, इसलिए म्यूजिक प्लेयर में मनचाही प्ले लिस्ट चला रहे हैं।
लखनऊ सहित मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, अहमदाबाद, बंगलुरु, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, हैदराबाद, इंदौर, कोच्चि, कोलकाता, पुणे, नागपुर जैसे 14 शहरों के कक्षा 8 से 12 में पढ़ रहे 18,196 बच्चे इस सर्वेक्षण में शरीक हुए थे।
हालांकि यह सर्वे शहरी और पब्लिक स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों पर किया था। इसमें ग्रामीण व सरकारी स्कूलों के बच्चों की भागीदारी नाममात्र की है।
इसके बावजूद वे मानते हैं कि इसके जरिये भावी युवा पीढ़ी किस दिशा में जाने की तैयारी में है यह समझा जा सकता है। वे ‘हाईपर कनेक्टेड’ हैं।
उनके पास संपर्क में रहने के लिए सेलफोन, सोशल नेटवर्किंग, वॉट्सएप, ई-मेल, एसएमएस जैसे कई माध्यम हैं।
स्मार्टफोन सबसे प्रिय
लखनऊ के 95.23 प्रतिशत बच्चों के पास स्मार्टफोन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 86.68 प्रतिशत ही है।
म्यूजिक प्लेयर 62.93 प्रतिशत के पास है जो मेट्रो सिटीज के औसत 48.40 प्रतिशत से कहीं आगे है। 72.89 प्रतिशत किशोरों के पास अपने लैपटॉप हैं।
जबकि राष्ट्रीय औसत 55.05 प्रतिशत ही रहा। इसमें बढ़त के लिए कुछ हद तक समाजवादी पार्टी द्वारा लैपटॉप वितरण भी वजह माना जा सकता है, जहां बड़े भाई-बहनों को मिले लैपटॉप से घर में उन्हें यह सुविधा मिलने लगी।
वहीं 75.94 प्रतिशत के घरों में पर्सनल कंप्यूटर भी है, जो राष्ट्रीय औसत से 77.03 प्रतिशत से कुछ कम रहा। यह बताता है कि लखनऊ के किशोरों के बीच लैपटॉप ज्यादा लोकप्रिय है और उनकी पहुंच में है।
सोशल मीडिया के महारथी हमारे टीनएजर्स
सोशल मीडिया में लखनऊ के टीनएजर्स ने खुद को देश में धुरंधर साबित किया है। इंटरनेट पर 10 में से 9 छात्र रोजाना 30 मिनट से अधिक समय बिता रहे हैं।
6 में से एक किशोर रोजाना 2 घंटे से अधिक समय इंटरनेट पर गुजार रहा है। जहां देश में औसतन 85.97 प्रतिशत बच्चे फेसबुक पर हैं, वहीं लखनऊ के 94.23 प्रतिशत बच्चों के फेसबुक प्रोफाइल हैं।
इसी तरह 72.91 प्रतिशत के फेसबुक फ्रेंड्स की संख्या 120 से अधिक है, जबकि राष्ट्रीय औसत 53.09 प्रतिशत ही है।
सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के लिए 26.89 प्रतिशत टीनएजर्स अपने प्रोफाइल से जहां रोजाना पोस्ट कर रहे हैं, वहीं 38.56 प्रतिशत हफ्ते में तीन दफा।
राष्ट्रीय औसत क्रमश: 21.94 और 25.68 प्रतिशत ही है। प्रोफेशनल वेबसाइट लिंक्डइन पर 13.91 प्रतिशत का प्रोफाइल है तो राष्ट्रीय औसत 8.59 प्रतिशत ही है।
हालांकि वे ट्विटर पर प्रोफाइल बनाने में राष्ट्रीय औसत 22.93 से 1 प्रतिशत पीछे रहे।
एफबी सबसे प्रिय, गूगल+ भी हो रहा लोकप्रियकिशोरों में 80.94 प्रतिशत ने फेसबुक को अपनी सबसे प्रिय सोशल मीडिया साइट बताया।
वहीं देश में इसका औसत 75.85 प्रतिशत था। दूसरे स्थान पर रोचक ढंग से गूगल+ रहा। इसे 19.93 प्रतिशत ने अपना पसंदीदा बताया।
राष्ट्रीय स्तर पर केवल 17.64 प्रतिशत किशोरों ने इसे पसंद किया है।
दोस्तों के लिए समय नहीं दे रहा सोशल मीडिया
80 प्रतिशत लखनवी बच्चों ने स्वीकारा कि सोशल मीडिया की वजह से वे अपने वास्तविक जीवन के दोस्तों से कम मिल पाते हैं।
हालांकि 48 प्रतिशत यह भी कहते हैं कि उन्हें सोशल मीडिया पर अधिक दोस्त बनाने का मौका मिल रहा है।
दूसरी ओर 77 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें पढ़ाई में सोशल मीडिया से मदद मिलती है तो साथ ही नॉलेज भी बढ़ती है।
संवाद आमने- सामने हो तो अधिक मजा
दूसरी लखनऊ के टीनएजर्स को अब भी अपने दोस्तों के साथ समय बिताना और बातचीत करना सबसे ज्यादा पसंद है, जिनका औसत 51.96 प्रतिशत रहा।
इस मामले में राष्ट्रीय औसत 45.56 प्रतिशत रहा। संवाद के लिए वे सोशल नेटवर्किंग और फोन कॉल पर निर्भर हैं। इसके बाद ईमेल, एसएमएस, और अन्य तरीके हैं।
साइबर कैफे खत्म होने की कगार पर
82.94 विद्यार्थियों ने कहा कि वे घर पर इंटरनेट का उपयोग करते हैं। देश में यह औसत 79 प्रतिशत था।
वहीं, स्मार्टफोन से इंटरनेट का उपयोग करने वालों का प्रतिशत 11.57 रहा। यह बताता है कि साइबर कैफे पर लखनऊ के किशोरों की निर्भरता खत्म हो रही है।
69.10 प्रतिशत किशोरों के अनुसार वे सोशल मीडिया के लिए कंप्यूटर-लैपटॉप का उपयोग घर से करते हैं तो 23.69 प्रतिशत ने स्मार्टफोन पर खुद को आश्रित बताया। इस मामले में राष्ट्रीय औसत 50.45 और 24.54 प्रतिशत था।
ऑनलाइन शॉपिंग भी जमकरलखनऊ के 61.01 प्रतिशत किशोर ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं जो राष्ट्रीय औसत 68.12 प्रतिशत से कुछ पीछे है।
ऑनलाइन शॉपिंग में वे सबसे ज्यादा कपड़े, फिल्मों के टिकट, किताबें, म्यूजिक और हवाई जहाज व रेल टिकट खरीद रहे हैं।
आईटी में चाहिए कॅरिअर, सरकारी नौकरी के दोगुने दीवाने
लखनऊ के 43.71 प्रतिशत किशोरों में आईटी सेक्टर में कॅरिअर बनाने की चाहत है जबकि राष्ट्रीय औसत 36.58 प्रतिशत ही रहा।
वहीं उच्च शिक्षा के लिए 22.87 किशोरों ने इंजीनियरिंग को चुना। यह भी राष्ट्रीय औसत 20.58 प्रतिशत से आगे रहा।
हालांकि नौकरियों के लिहाज से 9 प्रतिशत ने सरकारी क्षेत्र को अपनी पसंद बताया जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 4.5 प्रतिशत इसके प्रति उत्सुक दिखे। अन्य क्षेत्रों में मीडिया एक उभरता हुआ क्षेत्र बना।