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घूस का सालाना धंधा अरबों में, पुलिस सबसे बड़ी घूसखोर!

Thu, 22 Aug 2013 08:39 PM IST
लखनऊ/अतुल भारद्वाज
लखनऊ/अतुल भारद्वाज Updated Thu, 22 Aug 2013 08:39 PM IST
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eye opening data given on bribe tendency in india

महंगाई से जूझ रहे शहरवासियों के लिए रिश्वत भी एक बड़ा खर्च है। शहर में रिश्वत का सालाना कारोबार करीब 50 लाख रुपये का है। कुल आबादी को ध्यान में रखें तो यह आंकड़ा अरबों में पहुंच सकता है।

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यहां हर साल प्रति व्यक्ति को करीब 22 हजार रुपये बतौर रिश्वत चुकाने होते हैं। यह रकम रोजमर्रा के छोटे-मोटे कामों के लिए देनी पड़ती है।

एक संस्था की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम ‘आई पेड ए ब्राइब’ पर रिश्वत देने वालों की शिकायत में ये तथ्य सामने आए।

500 शहरों में किया सर्वे
छोटी-छोटी चीजों के लिए रिश्वत देने के चलन पर यह सर्वेक्षण जनाग्रह एनजीओ ने किया। संस्था ने ऑनलाइन व खुद को मिली शिकायतों के आधार पर यह सर्वेक्षण लखनऊ समेत देश के करीब 500 छोटे-बड़े शहरों में किया।
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तीन साल तक जुटाए आंकड़े

इसमें देखा गया कि लोगों ने किसको और कितनी रिश्वत दी। संस्था के प्रबंधक गीतेश बंसल ने बुधवार को एक प्रेसवार्ता में बताया कि तीन साल से हम लखनऊ के आंकड़े जुटा रहे हैं। इस बीच वेबसाइट के जरिए हमारे पास रिश्वत देने के 245 मामले आए। जिसके तथ्य काफी चौंकाने वाले हैं।
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बंसल के मुताबिक, तीन साल के अंदर लखनऊ में 245 लोगों ने 1 करोड़ 60 लाख 43 हजार 318 रुपये की रिश्वत दी। सालाना आंकलन करें तो यह रकम 50 लाख रुपये से ज्यादा है। उन्होंने यह भी बताया कि कुल आबादी को ध्यान में रखें तो यह आंकड़ा अरबों में पहुंच सकता है।

पुलिस सबसे ज्यादा भ्रष्ट
राजधानी में हुए सर्वेक्षण में सबसे ज्यादा मामले पुलिस को रिश्वत देने के थे। पासपोर्ट बनवाने से लेकर दूसरे काम के लिए पुलिस सत्यापन में खासी रकम घूस के तौर पर दी गई। वहीं ट्रैफिक पुलिस के झंझट से बचने के लिए 10 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक की घूस देने के मामले सामने आए।


छह लाख करोड़ का खुदरा भ्रष्टाचार
टूजी, कोयला आवंटन जैसे भ्रष्टाचार जनता को सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करते। इनके दूरगामी परिणाम महंगाई में देखने को मिलते हैं। वहीं खुदरा भ्रष्टाचार को ऐसे मामलों से जोड़कर देखा जाता है, जहां रोजमर्रा के अपने कामों के लिए लोगों को छोटी-छोटी रिश्वत देनी पड़ती है।

जनाग्रह के आंकलन के मुताबिक हर साल पूरे देश में करीब छह लाख करोड़ रुपये की रिश्वत खुदरा भ्रष्टाचार के रूप में दी जाती है।

फैक्टफाइल
लखनऊ
प्रति व्यक्ति रिश्वत-21,828 रुपये
तीन साल में रिश्वत-1,60,43,318 रुपये
सबसे बड़ा रिश्वतखोर-पुलिस महकमा

उत्तर प्रदेश

प्रति व्यक्ति रिश्वत-10,513 रुपये
तीन साल में रिश्वत-3,66,47,383 रुपये
सबसे बड़ा रिश्वतखोर-पुलिस महकमा

तीन साल में कहां कितने मामले
दिल्ली - 1007
महाराष्ट्र - 3300
कर्नाटक - 7327
उत्तर प्रदेश - 1334
तमिलनाडु - 2022
आंध्रप्रदेश - 2417

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