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कोटे से ज्यादा नौकरियां दे डाली इस विभाग ने
शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Mon, 14 Oct 2013 09:34 AM IST
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नि:शक्तजनों को नौकरी देने के मामले में जहां प्रदेश के ज्यादातर विभाग कंजूसी बरत रहे हैं वहीं अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने दरियादिली दिखाई है।
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इस विभाग ने नि:शक्तजनों को निर्धारित कोटे से काफी ज्यादा नौकरियां दे दी हैं। आखिर यह कैसे हुआ? इसका जवाब किसी भी अधिकारी के पास नहीं है। इसके पीछे कुछ न कुछ गड़बड़ी की भी आशंका व्यक्त की जा रही है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को वर्ष 2010 व जुलाई 2013 में नि:शक्तजनों के कोटे की तीन फीसदी आरक्षण पर नौकरियां न देने के मामले में कड़ी फटकार लगाई थी।
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इसी के बाद सरकारी मशीनरी हरकत में आई और खुद मुख्य सचिव ने मामले की समीक्षा शुरू की। वर्ष 2010 में 76 विभागों में नि:शक्तजनों के 3959 पद खाली थे।
सितंबर 2013 तक सरकार ने इसमें से 1940 पद भर लिए। अभी भी सरकारी विभागों में दो हजार पद खाली हैं।
इसी सख्ती के बाद अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने बैकलॉग के इन पदों पर भर्तियां कीं। विभाग को नि:शक्तजनों के 53 पदों पर नियुक्तियां करनी थी लेकिन इनके सापेक्ष 64 पदों पर भर्तियां कर लीं गईं।
इनमें से ज्यादातर पदों पर भर्तियां नोएडा में लिपिक व चपरासी के पदों पर हुई हैं। इस मामले का खुलासा पिछले दिनों तब हुआ जब विकलांग कल्याण विभाग के अधिकारी नि:शक्तजनों के बैकलॉग पदों की भर्ती की समीक्षा कर रहे थे।
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विकलांग कल्याण विभाग ने जब इस पर जवाब तलब किया तो औद्योगिक विकास विभाग के अधिकारी कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए।
बहरहाल, विभाग के अधिकारी अब भविष्य में होने वाली भर्तियों में इन पदों को एडजस्ट करने की बात कर रहे हैं।
अब इस बात की पड़ताल की जा रही है कि इस विभाग में निर्धारित पदों से ज्यादा भर्तियां कैसे हों गईं? कहीं इसके पीछे कोई बड़ा खेल तो नहीं है?
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