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चुनावी हिसाब किताब दुरुस्त रखने के लिए ढूंढे जा रहे हैं अनुभवी व भरोसेमंद सीए

Fri, 29 Mar 2019 03:40 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 29 Mar 2019 03:40 PM IST
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exprienced and reliable ca are being searched by politicians for election expense
सांकेतिक तस्वीर
चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे प्रत्याशी खर्च का हिसाब-किताब दुरुस्त रखने के लिए प्रोफेशनल एक्सपर्ट की तलाश में जुटे हैं। इनमें सभी प्रमुख सियासी दलों के प्रत्याशियों से लेकर निर्दलीय तक शामिल हैं। ऐसा चुनाव आयोग की विशेष सख्ती के चलते हो रहा है। यही वजह है कि सभी प्रत्याशी नामांकन दाखिल करने से पहले से ही भरोसेमंद चार्टर्ड अकाउंटेंट अथवा तजुर्बेकार लेखाकार की खोज पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
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उम्मीदवार चुनाव खर्च की पाई-पाई का हिसाब रखने के लिए व्यय रजिस्टर को अपडेट कराने के लिए फिलहाल ऐसे अनुभवी लोगों को वरीयता दे रहे हैं जो चुनावी खर्च को नियम के दायरे में रहकर दुरुस्त बना सकें। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रत्याशी स्वतंत्र तौर पर व्यवसाय करने वाली चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म से संपर्क कर उनकी क्षमता की माप-तौल कर रहे हैं। 
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महानगर क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित फर्म के संचालक व सीए मनीष गर्ग हों अथवा हजरतगंज में कार्यालय में प्रेक्टिस कर रहे सीए प्रशांत डालमिया। सभी के पास शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण परिवेश से जुड़ी मोहनलालगंज लोकसभा सीटों के संभावित प्रत्याशी व उनके खास प्रतिनिधि चुनाव खर्च की देखरेख कर चुनाव व्यय रजिस्टर तैयार करवाने के लिए प्रोफेशनल एक्सपर्ट की क्षमता आंकने में जुटे हैं। 
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दरअसल, जनता की रहनुमाई का दावा कर नामांकन की तैयारी में जुटे ज्यादातर संभावित प्रत्याशियों को चुनावी हिसाब-किताब दुरुस्त रखने के लिए चुनाव आयोग से निर्धारित मानदंडों की जानकारी ही नहीं है। इसीलिए चुनावी खर्च का सत्यापन दुरुस्त तरीके से कराने और व्यय रजिस्टर अपडेट कर तय समय में प्रस्तुत कराने के लिए ये सब ज्यादा परेशान हैं। 

रही-सही कसर आयोग स्तर से सोशल मीडिया से होने वाले प्रचार प्रसार को भी प्रत्याशी के चुनाव खर्च में जोड़ने के फरमान ने पूरी कर दी। इससे ज्यादातर संभावित उम्मीदवारों का गणित और उलझ गया है। अब तक उन्होंने जिन विशेषज्ञों पर नजरें गड़ाई थीं, उन्हें वे फिर से आंकने को मजबूर हो रहे हैं।
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