इस VIDEO में देखिए अखिलेश के सुशासन का हाल!
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सपा नेता यूपी में कैसे कानून और नियमों से खेलते हैं और कैसे चुनाव के दौरान सजायाफ्ता नेता प्रचार करते हैं, इसका खुलासा खुद इस नेता ने कर दिया है।
तीन साल बाद जेल से बाहर आए सपा नेता दिलीप वर्मा ने कुछ ऐसी बातें कह डालीं, जो कानून और चुनावी आचार संहिता दोनों पर सवाल उठा रही हैं।
बहराइच के दरगाह थाने के एक सिपाही पर हमले के मामले में सजा काट रहे वर्मा शनिवार को ही जेल से रिहा हुए और अपने समर्थकों के बीच आते ही अपनी शेखी बघारने लगे।
वर्मा ने डंके की चोट पर जिला प्रशासन व पुलिस महकमे पर भी आरोप मढ़ डाला। उन्होंने कहा कि पुलिस संरक्षण में उन्होंने सपा का प्रचार दो महीने तक लगातार किया।
इस वीडियो में आप देखेंगे कि कैसे एक मुलजिम नेता कानून और चुनावी आचांर संहिता को खिलौना बना लेता है और कायदे-कानून महज किताबी मालूम देने लगते हैं।
जेल से गया अस्पताल, वहां से किया प्रचार
दरअसल, दिलीप वर्मा ने जेल से छूटने के बाद एक जुलूस निकाला। डाक बंगले पर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए बोले कि दो महीने पहले उनकी तबियत बिगड़ गई और वे बहराइच के जिला अस्पताल में भर्ती हो गए। वर्मा आगे की कहानी भी खुद ही बताने लगे कि कैसे उन्होंने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बलहा उपचुनाव में सपा के प्रत्याशी बंशीधर बौद्ध के लिए जीतोड़ प्रचार किया।
वर्मा ने एक सनसनीखेज आरोप भी लगा दिया कि डीएम, एसएसपी और अन्य अधिकारी भी उनसे सपा को जिताने के लिए मदद मांग रहे थे। वर्मा ने यहां तक कह डाला कि इसकी कैसेट भी उनके पास मौजूद है। उन्होंने कहा कि कैसेट के आधार पर अधिकारियों को भी सजा मिल सकती है।
वर्मा ने बताया कि उनके फोन में भी हर कॉल का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। हालांकि, उन्होंने एक तरह से चुनाव आयोग को चुनौती देते हुए यह भी कहा, 'मैं कुबूल करता हूं कि मुझसे गलती हुई, मोबाइल से बात नहीं करनी चाहिए थी। पर दो महीने तक मैंने समाजवादी पार्टी के लिए दूरभाष से प्रचार किया। जो जुर्म बनता हो, प्रशासन लिख दे। मुझे कोई आपत्ति नहीं है।'
यहां देखिए इस नेता का वीडियो