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स्वाइन फ्लू से तड़पता रहा, नहीं मिली दवा, मौत!

Wed, 14 Jan 2015 03:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 14 Jan 2015 03:18 PM IST
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Ex soldier died from swine flu.

पूर्व सैनिक स्वाइन फ्लू की दवा से हार गया। पूरा परिवार उसके इलाज के लिए ‘टैमी फ्लू’ दवा शहर के मेडिकल स्टोर से लेकर सरकारी अस्पतालों तक खोजता रहा, लेकिन यह दवा नहीं मिली। आखिरकार राजधानी में इस साल मिले स्वाइन फ्लू के पहले मरीज ने मंगलवार देर शाम दवा के अभाव में दम तोड़ दिया। 7 जनवरी को इस लांसनायक को निमोनिया की शिकायत पर सेना के कमांड हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गयाथा।

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एसजीपीआई की रिपोर्ट में सोमवार को कृष्णा नगर निवासी इस पूर्व सैनिक को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट आने के 24 घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई। सैनिक के परिवारीजनों का कहना है कि कमांड हॉस्पिटल से फ्लूविर नाम का 75 मिलीग्राम का कैप्सूल लाने का पर्चा मिला था। शहर भर में घूमने पर भी ये दवा नहीं मिली।
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स्वाइन फ्लू का मरीज मिलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अफसर पूर्व सैनिक के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं की। वहीं, कमांड अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नहीं दी थी। इलाज में तत्परता की बजाय स्वास्थ्य महकमा केंद्र से टैमी फ्लू मिलने के इंतजार में बैठा रहा। सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव का कहना है कि एक-दो दिन में केंद्र से दवा आ जाएगी।

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खुली स्वास्‍थय विभाग की पोल

Ex soldier died from swine flu.

कमांड हॉस्पिटल में स्वाइन फ्लू से पूर्व सैनिक (लांस नायक) की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलकर रख दी है। स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए जरूरी दवा टैमी फ्लू अभी तक विभाग के पास नहीं है। वह केंद्र से दवा मिलने का इंतजार ही कर रहा है। सीएमओ ऑफिस के अफसर बीमारी के फैलने की रोकथाम की भी तैयारी नहीं कर रहे हैं। पूर्व सैनिक की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बावजूद अभी तक टैमी फ्लू दवा सीएमओ के पास नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग इस स्तर तक लापरवाह बना रहा कि मीडिया में खबर आने के बावजूद स्वाइन फ्लू पीड़ित पूर्व सैनिक के परिवारीजनों की तलाश भी नहीं की गई। शायद इसलिए कि परिवार को ढूंढते तो उन्हें दवाएं देनी पड़ती। सीएमओ कार्यालय की यही लापरवाही पूर्व सैनिक के परिवारीजनों पर भारी पड़ी। कमांड हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने लक्षणों के आधार पर इस पूर्व सैनिक के स्वैब की जांच एसजीपीजीआई भेजी थी जिसमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी।

पूर्व सैनिक के परिवारीजनों का कहना है कि डॉक्टर ने जो दवा लिखकर दी थी वो कहीं नहीं मिली। यहां तक कि उसकी तीमारदारी में लगे अन्य लोगों को भी स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कोई दवा उपलब्ध नहीं कराया है, जबकि ये उनकी जिम्मेदारी है।

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