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Lucknow News : बैंककर्मियों से मिलकर पूर्व साझेदार ने हड़पे 93 करोड़, रेलवे के ठेके के भुगतान के साथ हुआ खेल

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 24 Nov 2022 12:42 PM IST
सार

प्रशांत के मुताबिक विवेक व कवि ने खाता खुलवाने के बाद कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन के अधिकारियों से मिलीभगत की। उनके साथ मिलकर पिसेसिया सेवरॉनिक जेवी एलएलपी के कामों का लगभग 93 करोड़ रुपये का भुगतान आईसीआईसीआई गुरुग्राम शाखा के दोनों खातों में करवा लिया गया।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कोंकण रेलवे में टेंडर पर काम कराने के बाद 93 करोड़ के भुगतान को हड़पने के लिए लखनऊ की कंपनी के पूर्व साझीदार व बैंककर्मियों ने मिलकर फर्जीवाड़ा किया। रकम को हड़पने के लिए कंपनी के निदेशक का नाम हटाने के लिए सबसे सुरक्षित वेबसाइटों में से एक मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स  के मास्टर डेटा में छेड़छाड़ की गई। 



आरोप है कि फर्जी दस्तावेज के जरिए गुरुग्राम में दो बैंक खाते खोले गए। इनमें ठेका लेने वाली कंपनी का पूर्व साझीदार खुद सिग्नेचर अथॉरिटी बना। मामले में पीड़ित कंपनी के निदेशक द्वारा लगातार पुलिस व अन्य उच्चाधिकारियों से शिकायतें की जाती रही। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित ने जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की तो विभूतिखंड पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। मामले की जांच शुरू की है।


पुलिस के बताया कि लखनऊ के प्रशांत सिंह विभूतिखंड स्थित पिसेसिया पावर ट्रांसमिशन प्रालि. (पीपीटीपीएल) के निदेशक व शेयरधारक हैं। प्रशांत ने तहरीर में लिखा है कि 2020 में कंपनी व तुर्की की कंपनी सेवरॉनिक इलेक्ट्रिॉनिक सनाई वीई टाइकेरेट एएस ने साथ मिलकर एक ज्वाइंट वेंचर लि. लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म बनाई थी। कंपनी का नाम पिसेसिया सेवरॉनिक जेवी एलएलपी रखा गया था। इस फर्म को कोंकण रेलवे के दो अलग-अलग निविदाओं के कामों को पूरा करना था। इसमें पिसेसिया पॉवर प्रालि. की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत और सेवरॉनिक इलेक्ट्रॉनिक की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत थी। 

पिसेसिया कंपनी ने पीएसजेवी एलएलपी में पार्टनर बनने के लिए प्रशांत को नामित किया था। साथ ही टेंडर व उसके निष्पादन के लिए पीपीटीपीएल की तरफ से भी वही सारा काम करते थे। सेवरॉनिक इलेक्ट्रॉनिक की ओर से कवि नेहरा सिग्नेचरी अथॉरिटी थे।

प्रशांत के मुताबिक उनके पूर्व साझीदार विवेक यादव ने कवि नेहरा के साथ मिलकर जाली दस्तावेज तैयार किए। इन्हीं के आधार पर मिनिस्ट्री ऑफ  कॉर्पोरेट अफेयर्स के मास्टर डाटा में उनके नाम की जगह अपना नाम दर्ज करा लिया। साथ ही आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों की सांठगांठ से पीड़ित के केवाईसी दस्तावेज (आधार व पैन कार्ड) का दुरुपयोग किया। इसके जरिए बैंक के गुरुग्राम शाखा में पिसेसिया सेवरॉनिक जेवी एलएलपी के नाम से दो अलग-अलग खाते खुलवा दिए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मिनिस्ट्री के रिकॉर्ड में फेरबदल के लिए किसी सीए या सीएस का सहयोग लेना ही पड़ेगा। इसकी पड़ताल की जा रही है।

रेलवे अधिकारियों की मिलीभगत भी संभव 
प्रशांत के मुताबिक विवेक व कवि ने खाता खुलवाने के बाद कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन के अधिकारियों से मिलीभगत की। उनके साथ मिलकर पिसेसिया सेवरॉनिक जेवी एलएलपी के कामों का लगभग 93 करोड़ रुपये का भुगतान आईसीआईसीआई गुरुग्राम शाखा के दोनों खातों में करवा लिया गया। आरोपी विवेक यादव, उसकी पत्नी वंदना व साले शैलेंद्र के खिलाफ  गोमतीनगर व कानपुर में पूर्व में कई आपराधिक मामले में दर्ज हैं। मामलों में शैलेंद्र को जेल भेजा गया था। जबकि विवेक व वंदना फरार हैं।

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