यूपी: दो हफ्ते में होगी 2800 डॉक्टरों की नियुक्ति
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स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने बताया कि दो हफ्ते के भीतर 2,800 डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए सभी कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
अस्पतालों में डॉक्टरों के संकट को जल्द से जल्द हल किया जाएगा, ताकि मरीजों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने सीनियर डॉक्टरों को सुझाव देते हुए कहा कि वे काम पर ध्यान दें, राजनीति के चक्कर में न पड़े।
चिकित्सकों का स्थानांतरण जनहित में किया जाता है और वो निरंतर होता रहेगा। लापरवाही करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे और 27 डॉक्टर निलंबित कर दिए गए हैं।
शिशु मृत्यु दर का प्रमुख कारण
डायरिया शिशु मृत्यु दर बढ़ने का प्रमुख कारण है। सीएचसी-पीएचसी पर इलाज की व्यवस्था बेहतर होगी तो ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
बच्चों के इलाज से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। डायरिया के मामलों को रोकने के लिए घर-घर ओआरएस और जिंक के पैकेट वितरित किए जाएंगे, जिससे समय पर सही इलाज मिल सके। मौका था स्वास्थ्य विभाग की ओर से सप्रु मार्ग स्थित एक होटल में आयोजित ‘सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा’ का।
स्वास्थ्यमंत्री अहमद हसन ने ‘जीरो चाइल्ड डेथ ड्यू टू चाइल्डहूड डायरिया’ विषय पर बोलते हुए कहा कि प्रदेश में हर साल 45 हजार बच्चे डायरिया की वजह से मौत के मुंह में समा जाते हैं। इसलिए बच्चों की सेहत का ध्यान रखना पहली प्राथमिकता होगी।
डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई
सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डायरिया का बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए केंद्रों को हाईटेक बनाया जा रहा है।
उन्होंने डॉक्टरों को चेताते हुए कहा कि हर चिकित्सक को एक दिन की ओपीडी में कम से कम 40 मरीज देखना है। अगर ओपीडी में मरीजों के आंकड़े में कोई गड़बड़ी होगी तो बर्दाशत नहीं किया जाएगा।
इस मौके पर नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशक अमित घोष ने कहा कि 42 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं, जिसमें 10 फीसदी बच्चे डायरिया की वजह से कुपोषण के शिकार होते हैं।
53 फीसदी है शिशु मृत्युदर
अमित घोष के अनुसार इन बच्चों को डायरिया की शिकायत होने पर सही इलाज और देखभाल की जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है। प्रमुख सचिव चिकित्सा परिवार कल्याण अरविंद कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सुविधा पर अधिक जोर दिया है।
उसी का नतीजा है कि शिशु मृत्यु दर 57 फीसदी से 53 हो गई है। उन्होंने कहा कि शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए ओआरएस और जिंक के पैकेट घर-घर वितरित किए जाएंगे, जिससे सही समय पर बेहतर इलाज मिल सके। ‘सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा आठ अगस्त तक मनाया जाएगा।
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
- 36 फीसदी महिलाएं जन्म के एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान कराती हैं
- 20 फीसदी महिलाएं छह माह तक शिशु को स्तनपान कराती हैं
- 42 फीसदी माता-पिता बच्चों को ओआरएस नहीं देते
- 2 फीसदी लोग बच्चों को जिंक नहीं देते