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कुलपति की नियुक्ति में होगा यूजीसी के नियमों का पालन
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कुलपतियों की नियुक्ति में होगा यूजीसी के मानकों का पालन
राजभवन ने उच्च शिक्षा विभाग को जारी किए निर्देश
‘अमर उजाला’ ने उठाया था कुलपतियों की नियुक्ति का मुद्दा
राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों का पालन न होने को राजभवन ने गंभीरता से लिया है। राजभवन ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर सभी विश्वविद्यालयों में इसका अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा है। फिलहाल जारी व्यवस्था के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में यूजीसी के नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि कुलपति की नियुक्ति के लिए विज्ञापन तक जारी नहीं किया जाता है।
‘अमर उजाला’ ने 16 सितंबर को ‘कुलपति के चयन में यूजीसी के नियम दरकिनार’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर यह मुद्दा उठाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। पिछले दिनों राजभवन में कुलपतियों की बैठक में भी यह मुद्दा छाया रहा। लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने भी राजभवन में इस मामले में दो अगस्त को अपना ज्ञापन दिया था। यूजीसी के नियम कहते हैं कि कुलपति बनने के लिए अच्छे शिक्षाविद् को प्रोफेसर पद पर कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए। कुलपति पद पर नियुक्ति के लिए पब्लिक नोटिफिकेशन होना अनिवार्य है।
राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में इन दोनों नियमों की अनदेखी की जाती है। इसके बजाय कुलपति का चयन करने के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया जाता है। यह सर्च कमेटी कम से कम तीन और अधिकतम पांच नाम राज्यपाल के पास भेजती है। इन्हीं में से कुलपति का चयन किया जाता है। पद का विज्ञापन जारी न होने की वजह से कई अच्छे शिक्षाविद् इसके लिए आवेदन भी नहीं कर पाते हैं। राजभवन द्वारा उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि नई नियुक्तियों में यूजीसी के सभी नियमों का पालन किया जाएगा।
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राजभवन ने उच्च शिक्षा विभाग को जारी किए निर्देश
‘अमर उजाला’ ने उठाया था कुलपतियों की नियुक्ति का मुद्दा
राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों का पालन न होने को राजभवन ने गंभीरता से लिया है। राजभवन ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर सभी विश्वविद्यालयों में इसका अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा है। फिलहाल जारी व्यवस्था के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में यूजीसी के नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि कुलपति की नियुक्ति के लिए विज्ञापन तक जारी नहीं किया जाता है।
‘अमर उजाला’ ने 16 सितंबर को ‘कुलपति के चयन में यूजीसी के नियम दरकिनार’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर यह मुद्दा उठाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। पिछले दिनों राजभवन में कुलपतियों की बैठक में भी यह मुद्दा छाया रहा। लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने भी राजभवन में इस मामले में दो अगस्त को अपना ज्ञापन दिया था। यूजीसी के नियम कहते हैं कि कुलपति बनने के लिए अच्छे शिक्षाविद् को प्रोफेसर पद पर कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए। कुलपति पद पर नियुक्ति के लिए पब्लिक नोटिफिकेशन होना अनिवार्य है।
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राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में इन दोनों नियमों की अनदेखी की जाती है। इसके बजाय कुलपति का चयन करने के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया जाता है। यह सर्च कमेटी कम से कम तीन और अधिकतम पांच नाम राज्यपाल के पास भेजती है। इन्हीं में से कुलपति का चयन किया जाता है। पद का विज्ञापन जारी न होने की वजह से कई अच्छे शिक्षाविद् इसके लिए आवेदन भी नहीं कर पाते हैं। राजभवन द्वारा उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि नई नियुक्तियों में यूजीसी के सभी नियमों का पालन किया जाएगा।
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