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Lucknow News: मिले यदि प्रेम का प्याला जहर भी जाम होता है...

Thu, 06 Feb 2025 01:50 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Feb 2025 01:50 AM IST
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Even if the cup of love is poisoned...
लखनऊ। बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में बुधवार को सजे कवि सम्मेलन में हिंदी संस्थान का सभागार काव्य रस की धारा से सराबोर रहा। कवियों ने अपने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।
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सरदार पटेल सामाजिक एवं साहित्यिक उत्थान संगठन की ओर से हिंदी संस्थान के निराला सभागार में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की शुरुआत शिव किशोर तिवारी खंजन ने सरस्वती वंदना से की। उन्होंने मिले यदि प्रेम का प्याला जहर भी जाम होता है, हृदय जो प्रेम में डूबा वो प्रभु का धाम होता है... सुनाकर माहौल का राममय कर दिया। डा. अंजना कुमार ने जब सुनाया कि चांद के पार तेरा मेरा आशियाना हो, धड़कने हो जवां, मौसम भी सुहाना हो... तो हर कोई वाह-वाह कर उठा। पहले बार मंच पर पहुंचे अनुज उपाध्याय नवांकुर ने पढ़ा, लगन के आगे मंजिल क्या, किरण के आगे बादल, दुष्टि के आगे दर्पण क्या, सृष्टि से बढ़कर अर्पण क्या...पर उन्हें सराहा गया।
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जमुना उपाध्याय ने पढ़ा कि हजारों योजनाओं के यहां बादल उमड़ते हैं, सबब क्या है कि इन फसलों का पीलापन नहीं जाता...। प्रेमा पांडेय ने प्रेम की भावना को कुछ इस तरह से पेश किया। उन्होंने पढ़ा कि, प्रेम पर जो भावना का हुआ कभी वज्रपात, स्वयं प्रेम हेतु आप ढाल बनी राधिका..। प्रदीप महाजन ने कहा, निज कार्य की हर योजना अब टालनी होगी, और धूल पशु बाजारों की खंगालनी होगी। बच्चों को मिले शुद्ध दूध इसलिए मित्रों, अध्यापकों को भैंस भी अब पालनी होगी...।
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गोबर गणेश ने अपने चुटीले अंदाज में श्रोताओं को ठहाके लगवाए, उन्होंने पढ़ा, देहो हमका का देहो, जो कुछ तुम देहो, अपने बिटिया दामाद का देहो...। दुर्गेश पांडेय दुर्लभ ने भगवा से सम्मान मिला है अवधी की परिपाटी को, भगवा से ही ज्ञान मिला है राम चंद्र की ठाटी को....पढ़कर माहौल में भगवा रंग भरने की सफल कोशिश की। सुनील कुमार वाजपेयी ने हिंदी भाषा से प्रेम को प्रकट किया। पढ़ा- मन के भाव प्रकट करता हूं, अपनी हिंदी भाषा में, लिखता हूं अन्त: सुख खातिर, नहीं किसी अभिलाषा में...। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग ने पढ़ा, मेरे मन का राम भाग्यशाली है कितना, जिसकी सीता कंचन मृग पर नहीं मचलती...। रजनीश मिश्र ने पढ़ा कि विश्व में भारत बने महान, जयति, जय जय जय हिंदुस्तान...।
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