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Lucknow News: मूल्य निर्धारण के बाद भी दवा बाजार में मनमानी कायम

Tue, 09 Sep 2025 02:44 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Sep 2025 02:44 AM IST
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Even after price fixation, arbitrariness prevails in the drug market
प्रतीकात्मक।
लखनऊ। सरकार ने किफायती दरों पर एंटीबायोटिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण और जन औषधि की व्यवस्था की है। इसके बावजूद दवा बाजार की मनमानी कायम है। एक ही फाॅर्मूले की एंटीबायोटिक दवाएं बाजार में 14 गुना ज्यादा कीमत तक धड़ल्ले से बिक रही हैं। इंडियन जर्नल ऑफ फिजियोलाॅजी एंड फार्माकोलाॅजी जर्नल में अगस्त में प्रकाशित केजीएमयू के अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है।
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यह अध्ययन जनवरी से फरवरी 2025 के बीच किया गया। इसमें 15 एंटीबायोटिक दवाएं शामिल की गईं। इन 15 एंटीबायोटिक बाजार की कीमतों की तुलना राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण और जन औषधि की वर्ष 2024 की मूल्य सूची से की गई। इसमें पाया गया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की मूल्य सूची के मुकाबले बाजार में बिक रहीं एंटीबायोटिक दवाओं की कीमत में भारी अंतर था। इसमें भी ओफ्लॉक्सासिन 400 मिलीग्राम एंटीबायोटिक की बाजार कीमत 14.73 गुना तक ज्यादा थी।
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अध्ययन में एंटीबायोटिक दवाओं के मूल्यों पर और प्रभावी नियंत्रण की जरूरत बताई गई है। इस अध्ययन में डाॅ. वर्तिका श्री, डाॅ. आयुष जैन, डाॅ. दीक्षा गुप्ता, डाॅ. शकील अहमद और डाॅ. सुयोग सिंधु शामिल रहे।
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बाजार में कम मिलीं जन औषधि की कीमतें
अध्ययन में यह भी देखा गया कि जन औषधि की दवाएं बाजार में सबसे कम कीमत पर उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की मूल्य सूची के मुकाबले भी जन औषधि की मूल्य सूची वाली दवाएं कम कीमत पर मिल रहीं हैं।

ऐसे होता है दवाओं की कीमत में खेल
दवा व्यापारी साैरभ त्रिपाठी ने बताया कि दवाओं की कीमत पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के साथ ही आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची माैजूद है। इसके बावजूद दवा कंपनियां इन दवाओं में कोई अतिरिक्त साल्ट जोड़कर कीमतें बढ़ा लेती हैं। आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची में जब तक दवाएं शामिल नहीं होतीं, तब तक मनमानी चलती रहती हैं।
अध्ययन में शामिल की गईं ये एंटीबायोटिक
एमोक्सिसिलिन 500, एजिथ्रोमाइसिन 250, एजिथ्रोमाइसिन 500, सेफैड्रोक्सिल 500, सेफिक्सिम 200, सेफ्पोडोक्सिम 200, सेफुरोक्साइम 500, सेफैलेक्सिन 500, सिप्रोफ्लोक्सासिन 250, सिप्रोफ्लोक्सासिन 500, डॉक्सीसाइक्लिन 100, लेवोफ्लोक्सासिन 500, मोक्सीफ्लोक्सासिन 400, नॉरफ्लोक्सासिन 400, ओफ्लाॅक्सासिन 400

Iदवाओं की कीमतों पर हो प्रभावी नियंत्रणI
Iसरकार को दवाओं की कीमत पर नियंत्रण के लिए सख्त कानून बनाने चाहिए। इनके दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। तभी जरूरतमंदों को सस्ती कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।I
Iप्रो. संतोष कुमार, महामंत्री केजीएमयू शिक्षक संघI
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