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DHFL पीएफ घोटाला: अखिलेश के करीबी यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी एपी मिश्रा गिरफ्तार, कई पर लटकी तलवार

Tue, 05 Nov 2019 10:00 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 05 Nov 2019 10:00 AM IST
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EPF Scam former uppcl md ap mishra arrested
यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी एपी मिश्रा गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

पीएफ घोटाले की जांच का दायरा बढ़ने लगा है। जांच की आंच अब दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गई है। मंगलवार को तड़के यूपी पावर कार्पोरेशन (यूपीपीसीएल) के पूर्व एमडी अयोध्या प्रसाद मिश्रा को पुलिस ने उनके आवास से तड़के साढ़े तीन बजे हिरासत में ले लिया। एपी मिश्रा से दिन में कई राउंड ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने पूछताछ की। जांच की दिशा यही रही तो पावर कार्पोरेशन के पूर्व चेयरमैन संजय अग्रवाल भी जांच के दायरे में आएंगे।

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ईओडब्ल्यू के डीजी आरपी सिंह ने बताया कि यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। पूछताछ और दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया उनकी संलिप्तता पाई जा रही है। उन्होंने बताया कि एपी मिश्रा का आमना-सामना पीके गुप्ता और सुधांशु द्विवेदी से कराया जाएगा। पीके गुप्ता और सुधांशु दोनों ही जेल में हैं। 
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आज इनकी रिमांड पर सुनवाई होगी। शुरुआती पूछताछ में जो बातें एपी मिश्रा ने बताई उनका मिलान अभिलेखों से किया जा रहा है। अभिलेखों में छेड़छाड़ के सुबूत भी मिले हैं। आरपी सिंह ने बताया कि दिसंबर 2016 तक राष्ट्रीयकृत बैंकों की एफडी में ही पीएफ की धनराशि का निवेश किया जा रहा था। 
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दिसंबर 2016 में पीएनबी हाउसिंग को फंड देने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया, जो नियम विरुद्घ था। एपी मिश्रा ने इसके लिए 2 मार्च 2015 के भारत सरकार के आदेश का हवाला दिया जिस पर एक्सपर्ट ओपिनियन ली गई। बताया गया कि टर्म डिपॉजिट केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही हो सकती है। पीएनबी हाउसिंग इसके अधीन नहीं है।

बोर्ड की बैठक की तारीख में की गई छेड़छाड़

आरपी सिंह ने बताया कि 16 मार्च 2017 को डीएचएफएल में निवेश का निर्णय लिया गया। जिसका आदेश 17 मार्च को जारी किया गया। 17 मार्च को ही डीएचएफएल को 18 करोड़ रुपये का आरटीजीएस भी कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर 16 मार्च को इस्तीफा दे चुके एपी मिश्रा बोर्ड आफ ट्रस्ट की 22 मार्च को बुलाई गई बैठक में पहुंचे। 

इस बैठक में 16 मार्च को लिए गए निर्णय को वैधानिक रूप देने की कोशिश की गई। इसमें बोर्ड के सभी पांचों सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। आरपी सिंह ने बताया सीपीएफ का गठन 2006 में हुआ था, उसके बाद से कोई बैठक बुलाई ही नहीं गई थी। 22 मार्च 2017 को बुलाई गई बैठक पहली बैठक थी। उन्होंने बताया कि बैठक 22 मार्च को हुई जिसे बाद में ओवर कटिंग करके 24 मार्च किया गया।

ट्रस्ट की बैठक में यह अधिकारी थे शामिल
पीएफ के पैसे को डीएचएफएल में निवेश करने के लिए जो निर्णय लिया गया और उसके लिए हुई बैठक में बतौर चेयरमैन संजय अग्रवाल, एमडी एपी मिश्रा, निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी, निदेशक (कार्मिक प्रबंधन एवं प्रशासन) सत्य प्रकाश पांडेय और सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता के हस्ताक्षर हैं।
 

मंगलवार को दोबारा शक्ति भवन पहुंची ईओडब्ल्यू की टीम

उधर, मंगलवार को एक बार फिर ईओडब्ल्यू की टीम दस्तावेजों की छानबीन के लिए ईओडब्ल्यू के दफ्तर पहुंची और कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में ले गई। माना जा रहा है कि यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी एपी मिश्रा से पूछताछ में हासिल तथ्यों की पड़ताल के लिए ईओडब्ल्यू की टीम दोबारा शक्ति भवन पहुंची थी।
 
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