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जिसने खोली दंगों की पोल, जांच उसी के हवाले
विष्णु मोहन/लखनऊ
Updated Thu, 26 Sep 2013 09:53 PM IST
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मुजफ्फरनगर व आसपास के जिलों में हुई हिंसा के सिलसिले में दर्ज हुए मामलों की जांच के लिए बनाए गए विशेष जांच प्रकोष्ठ के गठन के साथ ही उसमें बदलाव कर दिया गया है।
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प्रकोष्ठ के प्रभारी एसपी केएन मिश्र को हटाकर नेतृत्व की कमान एएसपी कल्पना सक्सेना को सौंपी गई है।
विशेष जांच प्रकोष्ठ मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत व सहानपुर में हिंसा को लेकर दर्ज हुए कुल 145 मामलों की जांच करेगा।
हिंसा को लेकर जो मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनमें मुजफ्फरनगर में 106 मुकदमे दर्ज हैं जबकि शामली, बागपत व सहारनपुर में 39 मामले दर्ज हुए।
आईजी कानून-व्यवस्था राजकुमार विश्वकर्मा ने बताया कि इन 145 मुकदमों में से 43 मुकदमे हत्या के हैं जबकि अन्य मुकदमे हिंसा, आगजनी, मारपीट, जानलेवा हमला आदि के हैं।
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सभी मुकदमों में कुल 954 आरोपी हैं। इनमें से हत्या के मुकदमों के आरोपियों की संख्या 408 है। अन्य मामलों में 546 नामजद हैं।
हत्या के मुकदमों में अब तक 40 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि अन्य मामलों में 213 गिरफ्तार किए गए हैं।
विशेष जांच प्रकोष्ठ सभी मामलों की अलग-अलग जांच कर इसके नतीजों व प्रगति से रेंज के डीआईजी व जोन के आईजी को अवगत कराएगा।
वहीं, डीजीपी मुख्यालय में तैनात आईजी क्राइम आशीष गुप्ता सभी 145 मामलों की तफ्तीश की दिशा व प्रगति पर नजर रखेंगे।
डीजीपी मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि मुजफ्फरनगर हिंसा में सरकार अब अपनी और किरकिरी नहीं कराना चाहती। इसी वजह से वह इस मामले में दर्ज मुकदमों की विवेचना अलग से कराना चाहती है।
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अभी तैनात रहेगा सुरक्षा बल
हिंसा की चपेट में आए मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर व मेरठ में अभी सुरक्षा बल तैनात रहेगा।
आईजी कानून-व्यवस्था आरके विश्वकर्मा ने बताया कि इलाके में सुरक्षा बलों की 78 कंपनियां मौजूद हैं।
अक्टूबर में नवमी, दशहरा, बकरीद समेत कई पर्व पड़ रहे हैं। इनके सकुशल संपन्न होने के बाद ही सुरक्षा बलों को हटाया जाएगा।