निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रदर्शन, शक्ति भवन से लेकर मध्यांचल निगम मुख्यालय तक दिया धरना
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केंद्र सरकार की निजीकरण नीति के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने अलग-अलग स्थानों पर धरना देकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने निजीकरण की प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग को लेकर अल्टीमेटम दिया कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में अभियंताओं और कर्मचारियों ने कामकाज ठप करके शक्ति भवन पर डेरा डाला। इस आंदोलन की अगुवाई समिति के पदाधिकारी प्रभात सिंह, जय प्रकाश, सदरुददीन राना, जीवी पटेल ने की। इन्होंने बताया कि निजीकरण के विरोध में गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बरेली, प्रयागराज सहित प्रदेशभर में कर्मियों व अभियंताओें ने सभाएं करके नाराजगी व्यक्त की।
वक्ताओं ने कहा कि विद्युत उत्पादन, पारेषण व वितरण निगमों को एकीकृत यूपीएसईबी लिमिटेड कंपनी का गठन किये जाने से कर्मचारी पहले से ही भड़के थे। दूसरी तरफ विद्युत कर्मचारी मोर्चा संगठन के तत्वावधान में कर्मियों ने प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन करके ऊर्जा मंत्री को ज्ञापन भेजा।
बिजली को निजी हाथों में सौंपा गया तो उसके रेट बढ़ जाएंगे
कार्यकारी अध्यक्ष छोटे लाल दीक्षित व नवीन गौतम ने संयुक्त रूप से बताया कि ज्ञापन में कहा गया कि बिजली को निजी हाथों में सौंपा गया तो उसके रेट बढ़ जाएंगे जिससे आम जनता और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
इसके साथ ही कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण करने की भी मांग की। विरोध-प्रदर्शन में कर्मचारी नेता सरयू प्रसाद त्रिवेदी, आलोक कपूर आदि ने भी शिरकत की।
विद्युत मजदूर संगठन के तत्वावधान में बिजली कर्मियों ने आलोक सिन्हा के नेतृत्व में गोखले मार्ग स्थित मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर धरना देकर प्रदर्शन किया। यहां पर प्रदर्शनकारियों ने निजीकरण से प्रतिकूल पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की।