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Lucknow News: प्राकृतिक खेती, बहुफसली मॉडल, नई तकनीकों पर जोर
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व्याख्यान में बोलते आर के अग्रवाल
लखनऊ। तेलीबाग स्थित गन्ना अनुसंधान संस्थान में चल रही छठवीं कृषि विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को खेती को ज्यादा लाभकारी और टिकाऊ बनाने पर जोर रहा। प्रदर्शनी में गन्ना संस्थान में तैयार सिरका, गुड़ और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार किए गए विभिन्न किस्मों के चेरी टमाटर और गाय के गोबर व मूत्र से तैयार कीटनाशक आकर्षण का केंद्र बने रहे।
सात तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि अब खेती को केवल उत्पादन नहीं, बल्कि व्यवसाय के रूप में विकसित करना होगा। प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने, मार्केटिंग और वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई। एक खेत–अनेक फसल मॉडल के तहत गन्ने के साथ हल्दी, मूंग और अन्य फसलों की खेती को लाभकारी बताया गया। मृदा सुधार, नई तकनीकों और कार्बन क्रेडिट जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया गया। साथ ही युवाओं को नौकरी के बजाय कृषि उद्यमिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से खेती ज्यादा फायदेमंद बनेगी और किसानों की आय बढ़ेगी। कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी विनोद कुमार तिवारी और कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरजी अग्रवाल समेत कई कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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सात तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि अब खेती को केवल उत्पादन नहीं, बल्कि व्यवसाय के रूप में विकसित करना होगा। प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने, मार्केटिंग और वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई। एक खेत–अनेक फसल मॉडल के तहत गन्ने के साथ हल्दी, मूंग और अन्य फसलों की खेती को लाभकारी बताया गया। मृदा सुधार, नई तकनीकों और कार्बन क्रेडिट जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया गया। साथ ही युवाओं को नौकरी के बजाय कृषि उद्यमिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से खेती ज्यादा फायदेमंद बनेगी और किसानों की आय बढ़ेगी। कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी विनोद कुमार तिवारी और कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरजी अग्रवाल समेत कई कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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