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अंबेडकर स्मारक समिति के 10 करोड़ रुपये का गबन, बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक सहित दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज
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बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक समेत दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
अंबेडकर पार्क स्मारक समिति के 10 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया है। समिति के मुख्य प्रबंधक और एलडीए सचिव पवन गंगवार ने बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक नागेंद्र पाल सहित दो के खिलाफ गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
तहरीर में मुख्य प्रबंधक ने कहा है कि जाली दस्तावेज का उपयोग कर शाखा प्रबंधक की मिलीभगत से व्यक्तिगत खाते में यह राशि जमा की गई।
बैंक के प्रबंधन के साथ वार्ता के बाद भी राशि को लौटाया नहीं जा सका है। वहीं, एलडीए वीसी ने प्रबंधक वित्त देवेंद्र मणि उपाध्याय को निलंबित कर दिया है।
एफआईआर में कहा गया है कि 31 मार्च को समिति ने तीन साल एक महीने की एफडी के लिए बैंक की रोशनाबाद शाखा को 48 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।
यह राशि मुख्य प्रबंधक और प्रबंधक वित्त देवेंद्र मणि उपाध्याय के संयुक्त हस्ताक्षर से ट्रांसफर हुई। 28 मई 2021 तक केवल 38 करोड़ के ही जरूरी प्रपत्र बैंक ने समिति को दिए।
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बैंक से जब पूछा गया तो बताया गया कि पांच अप्रैल को समिति की बैठक में एक बचत खाता खोलने का निर्णय लिया गया। इसमें सहायक लेखाकार कृष्णमोहन श्रीवास्तव को अधिकृत दिखाया गया।
नई ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर भी खाते से संबद्ध कराए गए। इससे मुख्य प्रबंधक और प्रबंधक वित्त को लेनदेन का अपडेट ही नहीं पहुंचा। ऐसे में मुख्य प्रबंधक ने शाखा प्रबंधक पर ही साठगांठ से गबन का आरोप लगाया। एफआईआर में कृष्णमोहन श्रीवास्तव भी नामजद है।
सरकारी पैसे का लेनदेन व्यक्तिगत खाते से नहीं होता
एलडीए सचिव का कहना है कि सरकारी पैसे का लेनदेन कभी भी व्यक्तिगत खाते से नहीं होता। समिति के पैसे के लेनदेन के लिए संयुक्त रूप से मुख्य प्रबंधक और प्रबंधक वित्त पदेन अधिकृत हैं। जिस पांच अप्रैल के पत्र का जिक्र किया जा रहा है। उस पर दोनों ही अफसरों के हस्ताक्षर जाली हैं। शाखा प्रबंधक ने जानबूझकर पत्रों का सत्यापन व हस्ताक्षरों का मिलान नहीं करते हुए कथित कृष्णमोहन श्रीवास्तव व अन्य के साथ मिलकर 10 करोड़ का गबन किया है। बैंक प्रबंधन से भी इस राशि को लौटाने की मांग की गई है। इसे लेकर विभूतिखंड स्थित कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी एलडीए सचिव ने 14 सितंबर को की थी।
समिति में नहीं मिला कृष्णमोहन श्रीवास्तव
स्मारक समिति में कृष्णमोहन श्रीवास्तव नाम का कोई कर्मचारी नहीं मिला है। समिति के अधिकारियों का कहना है कि सहायक लेखाकार ही नहीं किसी भी पद पर इस नाम से कोई कर्मचारी नहीं तैनात है। वहीं जिस पांच अप्रैल की बैठक का जिक्र किया गया है। उस दिन कोई बैठक नहीं हुई थी।
सभी एफडी की जांच के लिए समिति बनी
देवेंद्र मणि उपाध्याय की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए प्रबंधक वित्त का चार्ज हटाकर निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सदस्य सचिव व एलडीए वीसी अक्षय त्रिपाठी ने समय से एफडी का मिलान नहीं करने के चलते की है। वहीं, स्मारक समिति की सभी एफडी की जांच के लिए वित्त नियंत्रक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। उधर, एलडीए के वित्त नियंत्रक राजीव कुमार सिंह को प्रबंधक वित्त का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।
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तहरीर में मुख्य प्रबंधक ने कहा है कि जाली दस्तावेज का उपयोग कर शाखा प्रबंधक की मिलीभगत से व्यक्तिगत खाते में यह राशि जमा की गई।
बैंक के प्रबंधन के साथ वार्ता के बाद भी राशि को लौटाया नहीं जा सका है। वहीं, एलडीए वीसी ने प्रबंधक वित्त देवेंद्र मणि उपाध्याय को निलंबित कर दिया है।
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एफआईआर में कहा गया है कि 31 मार्च को समिति ने तीन साल एक महीने की एफडी के लिए बैंक की रोशनाबाद शाखा को 48 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।
यह राशि मुख्य प्रबंधक और प्रबंधक वित्त देवेंद्र मणि उपाध्याय के संयुक्त हस्ताक्षर से ट्रांसफर हुई। 28 मई 2021 तक केवल 38 करोड़ के ही जरूरी प्रपत्र बैंक ने समिति को दिए।
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बैंक से जब पूछा गया तो बताया गया कि पांच अप्रैल को समिति की बैठक में एक बचत खाता खोलने का निर्णय लिया गया। इसमें सहायक लेखाकार कृष्णमोहन श्रीवास्तव को अधिकृत दिखाया गया।
नई ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर भी खाते से संबद्ध कराए गए। इससे मुख्य प्रबंधक और प्रबंधक वित्त को लेनदेन का अपडेट ही नहीं पहुंचा। ऐसे में मुख्य प्रबंधक ने शाखा प्रबंधक पर ही साठगांठ से गबन का आरोप लगाया। एफआईआर में कृष्णमोहन श्रीवास्तव भी नामजद है।
सरकारी पैसे का लेनदेन व्यक्तिगत खाते से नहीं होता
एलडीए सचिव का कहना है कि सरकारी पैसे का लेनदेन कभी भी व्यक्तिगत खाते से नहीं होता। समिति के पैसे के लेनदेन के लिए संयुक्त रूप से मुख्य प्रबंधक और प्रबंधक वित्त पदेन अधिकृत हैं। जिस पांच अप्रैल के पत्र का जिक्र किया जा रहा है। उस पर दोनों ही अफसरों के हस्ताक्षर जाली हैं। शाखा प्रबंधक ने जानबूझकर पत्रों का सत्यापन व हस्ताक्षरों का मिलान नहीं करते हुए कथित कृष्णमोहन श्रीवास्तव व अन्य के साथ मिलकर 10 करोड़ का गबन किया है। बैंक प्रबंधन से भी इस राशि को लौटाने की मांग की गई है। इसे लेकर विभूतिखंड स्थित कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी एलडीए सचिव ने 14 सितंबर को की थी।
समिति में नहीं मिला कृष्णमोहन श्रीवास्तव
स्मारक समिति में कृष्णमोहन श्रीवास्तव नाम का कोई कर्मचारी नहीं मिला है। समिति के अधिकारियों का कहना है कि सहायक लेखाकार ही नहीं किसी भी पद पर इस नाम से कोई कर्मचारी नहीं तैनात है। वहीं जिस पांच अप्रैल की बैठक का जिक्र किया गया है। उस दिन कोई बैठक नहीं हुई थी।
सभी एफडी की जांच के लिए समिति बनी
देवेंद्र मणि उपाध्याय की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए प्रबंधक वित्त का चार्ज हटाकर निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सदस्य सचिव व एलडीए वीसी अक्षय त्रिपाठी ने समय से एफडी का मिलान नहीं करने के चलते की है। वहीं, स्मारक समिति की सभी एफडी की जांच के लिए वित्त नियंत्रक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। उधर, एलडीए के वित्त नियंत्रक राजीव कुमार सिंह को प्रबंधक वित्त का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।