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खुशखबरीः यूपी में सस्ती होने जा रही है बिजली!

Fri, 27 Feb 2015 02:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ Updated Fri, 27 Feb 2015 02:55 PM IST
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Electricity will Cheaper in UP - Akhilesh Yadav

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार द्वारा बिजली की दरों में 50 फीसदी की कमी किए जाने के बाद यूपी में भी इसके लिए मांग जोर पकड़ सकती है। ऐसे में यूपी सरकार और राज्य विद्युत नियामक आयोग पर प्रदेश में बिजली दरें कम करने का दबाव बढ़ गया है।

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बिजली को लेकर यूपी वालों को मिली बड़ी खुशखबरी

उपभोक्ता संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। दो साल बाद सूबे में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में बिजली दरों का मुद्दा अखिलेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती भी बन सकता है।
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सूबे में लंबे समय से बिजली दरों में कमी की मांग चल रही है। पिछले साल मामले ने तूल पकड़ा तो नियामक आयोग ने भी माना कि बिजली तीन रुपये यूनिट तक सस्ती हो सकती है बशर्ते बिजली कंपनियां प्रभावी ढंग से चोरी रोकें और अपने परफॉर्मेंस में सुधार लाएं।

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आयोग ने बाकायदा परफॉरमेंस पैरामीटर तय करते हुए पिछले साल अक्तूबर में जारी टैरिफ ऑर्डर के साथ बिजली कंपनियों के लिए लक्ष्य तय करके स्पष्ट कर दिया कि इन्हें पूरा नहीं किया गया तो दरों में बढ़ोतरी की अनुमति नहीं दी जाएगी। उल्टे दरें कम हो सकती हैं।

हालांकि परफॉर्मेंस में सुधार और लक्ष्य प्राप्ति के लिए कोशिश करने के बजाय बिजली कंपनियां दरें बढ़वाने की तिकड़म में ही लगी रहती हैं। बिजली दरें कम करके जनता को राहत देने में राज्य सरकार की फिलहाल कोई दिलचस्पी नजर नहीं आ रही है।

इन कदमों से कम हो सकती हैं दरें

Electricity will Cheaper in UP - Akhilesh Yadav

सरकार भी घाटे की दुहाई देकर बिजली कंपनियों के सुर में सुर मिला रही है। बिजली कंपनियों ने वर्ष 2015-16 के लिए दरों में फिर से लगभग 10 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग को सौंपा है। हालांकि आयोग ने अभी पावर कॉर्पोरेशन का टैरिफ प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया है।

आयोग का मानना है इस समय प्रदेश में एकीकृत तकनीकी एवं वाणिज्यिक लाइन हानियां 40 फीसदी से ज्यादा हैं जबकि राष्ट्रीय औसत 26.3 प्रतिशत है। अगर लाइन हानियों में पांच फीसदी की कमी कर ली जाए तो बिजली कंपनियों को 2450 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। वहीं, वितरण लाइन हानियां 27.51 फीसदी हैं।

आयोग ने इसे घटाकर 23.52 तक लाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन कंपनियों ने दो फीसदी से ज्यादा कमी लाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। लक्ष्य के मुताबिक इसमें कमी लाकर इसका सीधा फायदा बिजली उपभोक्ताओं को दरों में कमी के रूप में दिया जा सकता है।

मौजूदा समय में प्रदेश के बिजलीघरों का प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) 60 प्रतिशत के आसपास है जबकि राष्ट्रीय औसत 90 फीसदी के  करीब है। अगर सूबे के बिजलीघरों का पीएलएफ बढ़ाकर 85 फीसदी तक पहुंचा दिया जाए तो लगभग 2000 करोड़ रुपये का फायदा होगा। उत्पादन लागत कम होगी तो उपभोक्ताओं पर भी कम बोझ पड़ेगा।

ये हैं बिजली के मौजूदा हालात

Electricity will Cheaper in UP - Akhilesh Yadav

इस समय प्रदेश में आवासों की संख्या लगभग 3.29 करोड़ है, जबकि बिजली के कनेक्शन 1.08 करोड़ ही हैं। अगर बगैर कनेक्शन वाले लगभग सवा दो करोड़ घरों को बिजली कंपनियां अपने लेजर पर ले आएं तो राजस्व बढ़ने के साथ ही दरें भी कम हो सकती हैं। आयोग ने चालू वित्तीय वर्ष में 36 लाख नए कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है लेकिन इसे पूरा करने में बिजली कंपनियां नाकाम रही हैं।राज्य योजना आयोग भी बिजली दरों में कमी को लेकर मंथन कर रहा है। उसने उपभोक्ता परिषद के प्रस्ताव पर पावर कॉर्पोरेशन से दुबारा रिपोर्ट मांगी है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने पिछले साल जनवरी में राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चंद्र वाजपेयी को बिजली दरों में कमी करने के संबंध में प्रस्ताव दिया था। इसमें कहा गया था कि हर साल हो रही करीब 6000 करोड़ रुपये की बिजली चोरी पर अंकुश लगाकर तथा लाइन हानियों में पांच फीसदी की कमी करके दरों में 25 फीसदी तक की कमी की जा सकती है।

सीएजी ऑडिट से आधी हो सकती हैं दरें

Electricity will Cheaper in UP - Akhilesh Yadav

पावर कॉर्पोरेशन ने अभी तक राज्य योजना आयोग को बिंदुवार विश्लेषणात्मक रिपोर्ट नहीं उपलब्ध कराई है। प्रमुख सचिव नियोजन देवेश चतुर्वेदी ने पिछले महीने प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल को पत्र भेजकर बिजली की दरों में कमी करने के मामले पर विश्लेषणात्मक रिपोर्ट देने को कहा है।

पावर कॉपोरेशन वाणिज्य के पूर्व निदेशक उदय नारायण कहते हैं कि निजी बिजली उत्पादक कंपनियां अपने अनाप-शनाप खर्च को बैलेंस शीट में शामिल कर लेती हैं और फिर उसी के हिसाब से ज्यादा दरों के  निर्धारण का दबाव बनाती हैं। इनका सीएजी ऑडिट अनिवार्य करके बिजली दरों में आधी कमी की जा सकती है। दिल्ली में भी यही फॉर्मूला अपनाया गया है।

वहीं, पावर कॉर्पोरेशन के नियंत्रण वाली कंपनियां बिजली चोरी रोकने से लेकर राजस्व से जुडे़ हर मुद्दे पर संजीदगी से ध्यान दें। नियामक आयोग को भी दरों के निर्धारण के समय देखना होगा कि बिजली कंपनियां गाइडलाइन में तय से ज्यादा मुनाफा तो नहीं कमा रही हैं।

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