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फिर लड़खड़ाई बिजली व्यवस्था

Wed, 20 Aug 2014 01:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 20 Aug 2014 01:55 PM IST
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electricity system derails in uttar pradesh

प्रदेश की बिजली व्यवस्था एक बार फिर लड़खड़ा गई है। अनपरा की

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500 मेगावाट क्षमता इकाई के चालू होने के बाद थोड़ी राहत मिली तो केंद्रीय बिजलीघरों की इकाइयों ने झटका दे दिया।

कोयले की कमी, भीगे कोयले की आपूर्ति तथा अन्य तकनीकी कारणों से एनटीपीसी के बिजलीघरों की कई इकाइयों के बंद हो जाने से प्रदेश को केंद्र से मिलने वाली बिजली में लगभग 1000 मेगावाट की कमी हो गई है।

बारिश न होने की वजह से गर्मी और उमस ने भी बिजली की मांग बढ़ा दी है। मांग के मुकाबले बिजली की उपलब्धता काफी कम होने की वजह से गांवों से लेकर महानगरों तक भारी आपात कटौती की जा रही है।

गर्मी व उमस के चलते प्रदेश में बिजली की मांग फिर 13,500 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई है जबकि तमाम प्रयासों के बावजूद उपलब्धता 11,000 मेगावाट तक ही है।

जन्माष्टमी पर तो जैसे-तैसे अतिरिक्त बिजली का इंतजाम करके आपूर्ति पटरी पर रखी गई लेकिन मंगलवार से हालात फिर बिगड़ गए।

बीती रात से ही मांग में इजाफा होने लगा। कोयले की कमी, भीगे कोयले की आपूर्ति तथा तकनीकी वजहों से एनटीपीसी के बिजलीघरों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

रिहंद सुपर ताप बिजलीघर की 500-500 मेगावाट की दो, सिंगरौली की 200 मेगावाट की एक, दादरी की 490 मेगावाट की एक इकाई बंद चल रही है।

सिंगरौली में 2000 मेगावाट के बजाय 1200-1300 मेगावाट उत्पादन ही हो पा रहा है। इसके चलते केंद्र से प्रदेश को मिलने वाली बिजली के कोटे में भारी कमी हो गई है।

अनपरा, रोजा, ओबरा व पारीछा की इकाइयों केबंद होने से राज्य के बिजलीघरों का उत्पादन पहले से ही कम चल रहा है।

इसका सीधा असर प्रदेश की आपूर्ति पर पड़ा है। अभियंताओं का कहना है बिजली की कमी के चलते ग्रामीण इलाकों को बमुश्किल छह घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है।

जिला मुख्यालयों पर 14-15 घंटे, मंडल मुख्यालयों व महानगरों में 18-19 घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है। एनर्जी एक्सचेंज से लगभग 1000 मेगावाट तथा अन्य स्रोतों से लगभग 500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली ली जा रही है।

इसके बाद भी मांग पूरी नहीं हो पा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बृहस्पतिवार तक केंद्रीय सेक्टर की कुछ इकाइयों के चलने की उम्मीद है।

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