प्रदेशवासियों को मिल सकता है सस्ती बिजली दरों का तोहफा
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इस साल प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ने के बजाय कम हो सकती हैं। पावर कॉर्पोरेशन ने अभी तक राज्य विद्युत नियामक आयोग को वर्ष 2018-19 के लिए बिजली दरों का प्रस्ताव नहीं सौंपा है। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए 2018-19 की बिजली दरों के निर्धारण के लिए स्वत: संज्ञान कार्यवाही शुरू कर दी है।
नियामक आयोग बिजली दरें न बढ़ाने संकेत पहले ही दे चुका है। दूसरी तरफ, बिजलीघरों की उत्पादन लागत में हुई कमी के आधार पर दरें कम करने संबंधी याचिका भी आयोग के विचाराधीन है।
पावर कॉर्पोरेशन ने गत वर्ष तीन साल के लिए मल्टी ईयर टैरिफ दाखिल तो किया था लेकिन टैरिफ प्रस्ताव सिर्फ 2017-18 का ही सौंपा था। इसके आधार पर आयोग ने दरों का निर्धारण किया जो मौजूदा समय में लागू हैं।
विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुसार बिजली कंपनियों को अब तक 2018-19 की बिजली दरों का प्रस्ताव आयोग के समक्ष दाखिल कर देना चाहिए था। इसी के साथ ही बिजली कंपनियों को 2015-16 की ट्रू-अप (अनुमानित एवं वास्तविक व्यय में अंतर की धनराशि की भरपाई) याचिका व 2017-18 का एनुअल परफॉर्मेंस रिव्यू भी दाखिल करना है लेकिन पावर कॉर्पोरेशन ने इसे दाखिल नहीं किया है।
इसे गंभीरता से लेते हुए नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को 15 दिनों के भीतर सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने का नोटिस भेजा है। साथ ही चेताया है कि ऐसा न करने पर उनके खिलाफ विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
केंद्रीय योजनाओं से जुड़ी सूचनाएं तलब
आयोग ने बिजली कंपनियों के सीएजी ऑडिट के अलावा रेगुलेटरी सरचार्ज के मद में उपभोक्ताओं से वसूल की गई धनराशि, उदय व पावर फॉर ऑल से बिजली कंपनियों को हुए फायदे का भी ब्योरा मांगा है।
2017-18 के टैरिफ ऑर्डर के साथ तय किए गए परफॉर्मेंस पैरामीटर पर अमल का भी ब्योरा मांगा गया है। उदय के तहत प्रदेश में लाइन हानियां कम करके 15 प्रतिशत तक लाने और राजस्व वसूली 90 फीसदी से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन दोनों ही मोर्चों पर बिजली कंपनियां पीछे हैं। आयोग के सूत्रों का कहना है कि बिजली कंपनियों से सूचनाएं मिलते ही दरों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
दरें बढ़ने के आसार कम
केंद्र सरकार की उदय योजना के तहत हर साल बिजली दरों में औसतन 8.6 फीसदी की वृद्धि प्रस्तावित की गई है। चूंकि पिछले साल बिजली दरों में करीब 13 फीसदी की वृद्धि की जा चुकी है, इसलिए आयोग इस साल उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। अलबत्ता बिजली इकाइयों की उत्पादन लागत में कमी का फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय बिजली कंपनियों की ओर से आमदनी और खर्च के आंकड़े दाखिल करने के बाद ही होगा।
मनगढ़ंत आंकड़ों का विरोध करेगी उपभोक्ता परिषद
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि अगर बिजली कंपनियां वास्तविक आंकड़े पेश करती हैं तो दरों में कमी होनी तय है। अगर कंपनियां दरें बढ़वाने के लिए मनगढ़ंत आंकड़े दाखिल करती हैं तो परिषद इसका विरोध करेगी।