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बिजली खरीदः अखिलेश सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाली बीजेपी भी उसी राह पर
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:11 PM IST
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यूपी में निजाम भले ही बदल गया हो, पर महंगी बिजली खरीद का सिलसिला जारी है। महंगी बिजली खरीदने को लेकर अखिलेश सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाली भाजपा की सरकार भी उसी नक्शे कदम पर है।
केंद्रीय बिजली राज्यमंत्री पीयूष गोयल भले ही एनर्जी एक्सचेंज में सस्ती बिजली उपलब्ध होने का दावा कर रहे हों, लेकिन यूपी में उनकी पार्टी की सरकार निजी कंपनियों से बिजली खरीदने में पीछे नहीं है।
चालू वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित कुल बिजली खरीद में से लगभग 50 फीसदी निजी घरानों से ही खरीदने की तैयारी है। यह बिजली पांच रुपये से लेकर करीब सवा सात रुपये प्रति यूनिट तक में खरीदी जाएगी।
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बजाज हिंदुस्तान की पांच चीनी मिलों में स्थापित 90-90 मेगावाट क्षमता की पांच तापीय परियोजनाओं की बिजली सबसे महंगी 7.22 रुपये प्रति यूनिट में पड़ेगी जबकि उत्तराखंड के श्रीनगर में जीवीके की जल विद्युत परियोजना की बिजली के लिए कंपनियों को 5.84 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा। अन्य निजी कंपनियों से भी खरीदी जाने वाली बिजली भी पांच रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा में पड़ेगी।
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केंद्रीय बिजली राज्यमंत्री पीयूष गोयल भले ही एनर्जी एक्सचेंज में सस्ती बिजली उपलब्ध होने का दावा कर रहे हों, लेकिन यूपी में उनकी पार्टी की सरकार निजी कंपनियों से बिजली खरीदने में पीछे नहीं है।
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चालू वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित कुल बिजली खरीद में से लगभग 50 फीसदी निजी घरानों से ही खरीदने की तैयारी है। यह बिजली पांच रुपये से लेकर करीब सवा सात रुपये प्रति यूनिट तक में खरीदी जाएगी।
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बजाज हिंदुस्तान की पांच चीनी मिलों में स्थापित 90-90 मेगावाट क्षमता की पांच तापीय परियोजनाओं की बिजली सबसे महंगी 7.22 रुपये प्रति यूनिट में पड़ेगी जबकि उत्तराखंड के श्रीनगर में जीवीके की जल विद्युत परियोजना की बिजली के लिए कंपनियों को 5.84 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा। अन्य निजी कंपनियों से भी खरीदी जाने वाली बिजली भी पांच रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा में पड़ेगी।
देखें, कंपनियों की दरें
डेमो
- फोटो : अमर उजाला
पावर कॉर्पोरेशन द्वारा मध्यांचल, पूर्वांचल, पश्चिमांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की ओर से दाखिल किए गए मल्टी ईयर टैरिफ वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव व बिजनेस प्लान में 2017-18 में सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बिजलीघरों से लगभग 1,28,908 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद प्रस्तावित है।
इस पर कुल लागत 52,919 करोड़ रुपये अनुमानित है। एआरआर में बिजली खरीद की औसत दर 4.11 रुपये प्रति यूनिट बताई गई है। दिलचस्प यह है कि इसमें निजी घरानों की हिस्सेदारी 50 फीसदी के आसपास है।
निजी घरानों से लगभग 57,580 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद प्रस्तावित की गई है जिसकी कुल कीमत लगभग 25,457 करोड़ रुपये बैठेगी।
इन कंपनियों की दरें पांच रुपये से अधिक
निजी बिजली उत्पादक कुल खरीद (करोड़ रुपये में) दर (रुपये प्रति यूनिट)
बजाज हिंदुस्तान (450 मेगावाट) 1773 7.22
श्रीनगर परियोजना (जीवीके ग्रुप) 663 5.84
रोजा परियोजना- प्रथम 2046 5.03
रोजा परियोजना- द्वितीय 2047 5.04
ललितपुर परियोजना (बजाज ग्रुप) 4730 5.04
इस पर कुल लागत 52,919 करोड़ रुपये अनुमानित है। एआरआर में बिजली खरीद की औसत दर 4.11 रुपये प्रति यूनिट बताई गई है। दिलचस्प यह है कि इसमें निजी घरानों की हिस्सेदारी 50 फीसदी के आसपास है।
निजी घरानों से लगभग 57,580 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद प्रस्तावित की गई है जिसकी कुल कीमत लगभग 25,457 करोड़ रुपये बैठेगी।
इन कंपनियों की दरें पांच रुपये से अधिक
निजी बिजली उत्पादक कुल खरीद (करोड़ रुपये में) दर (रुपये प्रति यूनिट)
बजाज हिंदुस्तान (450 मेगावाट) 1773 7.22
श्रीनगर परियोजना (जीवीके ग्रुप) 663 5.84
रोजा परियोजना- प्रथम 2046 5.03
रोजा परियोजना- द्वितीय 2047 5.04
ललितपुर परियोजना (बजाज ग्रुप) 4730 5.04
उपभोक्ता परिषद करेगी विरोध
electricity demo pic
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि महंगी बिजली खरीद का बोझ दरों में वृद्धि के रूप में आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, इसलिए वह इसका विरोध करेगी।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि एनर्जी एक्सचेंज से सस्ती बिजली उपलब्ध होते हुए भी विद्युत क्रय अनुबंध (पीपीए) की शर्तों के तहत निजी घरानों से महंगी बिजली खरीदने को विवश होना पड़ रहा है।
ऐसे सभी पीपीए पर पुनर्विचार करके महंगी बिजली खरीद बंद की जानी चाहिए। एआरआर में एनर्जी एक्सचेंज व द्विपक्षीय समझौते के तहत 2507 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद प्रस्तावित है जिसकी औसत दर 3.80 रुपये प्रति यूनिट है।
जब एक्सचेंज में सरप्लस बिजली उपलब्ध है तोे निजी घरानों से महंगी बिजली खरीदने का कोई औचित्य नहीं है। राज्य सरकार को इसके लिए पहल करनी चाहिए।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि एनर्जी एक्सचेंज से सस्ती बिजली उपलब्ध होते हुए भी विद्युत क्रय अनुबंध (पीपीए) की शर्तों के तहत निजी घरानों से महंगी बिजली खरीदने को विवश होना पड़ रहा है।
ऐसे सभी पीपीए पर पुनर्विचार करके महंगी बिजली खरीद बंद की जानी चाहिए। एआरआर में एनर्जी एक्सचेंज व द्विपक्षीय समझौते के तहत 2507 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद प्रस्तावित है जिसकी औसत दर 3.80 रुपये प्रति यूनिट है।
जब एक्सचेंज में सरप्लस बिजली उपलब्ध है तोे निजी घरानों से महंगी बिजली खरीदने का कोई औचित्य नहीं है। राज्य सरकार को इसके लिए पहल करनी चाहिए।