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कितनी होगी मेट्रो में बिजली की खपत?
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 29 Jul 2013 10:12 PM IST
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एक छोटे बिजली घर के बराबर मेट्रो के नेटवर्क को हर रोज बिजली की जरूरत होगी।
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इतनी बिजली जिससे आधे राजाजीपुरम को रोशन किया जा सके। यह खपत साल दर साल बढ़ती जाएगी।
करीब 25 साल बाद बिजली की यह खपत एक बड़े बिजली घर के बराबर हो जाएगी।
मेट्रो रेल नेटवर्क को बिजली बड़े पावर हाउस से सीधे ट्रैक्शन सब स्टेशन के जरिये मिला करेगी ताकि कभी भी पावर कट की समस्या न हो।
केवल नॉर्दर्न ग्रिड के फेल होने की दशा में ही मेट्रो की बिजली व्यवस्था बाधित होगी।
लखनऊ मेट्रो रेल के लिए पेश की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में बिजली के खर्च के संबंध में भी काफी जानकारियां दी गई हैं।
इसके मुताबिक नॉर्थ साउथ कॉरिडोर में शुरुआत में रोजाना 21.23 मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ेगी।
2020 में यह बढ़ कर 27.64 मेगावाट हो जाएगी। 2025 में बिजली की यह जरूरत करीब 32.18 मेगावाट तक पहुंच जाएगी।
बिजली की खपत को ट्रैक्शन और ऑग्ज़लरी दो वर्गों में बांटा गया है। ट्रैक्शन से अर्थ उस खपत से है, जो मेट्रो के चलने के समय खर्च होती है जबकि आग्ज़लरी खपत वह जो मेट्रो के डिपो और स्टेशन पर खर्च होगी।
राजाजीपुरम जैसे बड़े इलाके में जितनी बिजली रोज खर्च होती है, उसकी आधी बिजली मेट्रो के नेटवर्क को अमौसी से मुंशी पुलिया के बीच संचालित करने में लगेगी।
बिजली सीधे पावर हाउस से टैक्शन सब स्टेशन को मिलेगी, जहां से अलग फीडर के जरिये मेट्रो के लिए पहुंचेगी। सरकार को इस क्षेत्र में भी एलएमआरसी की मदद करनी पड़ेगी।
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