...तो मुसीबत में फंस जाएँगी कॉंग्रेस की रीता
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भाजपा के यूपी प्रभारी अमित शाह और सपा के कैबिनेट मंत्री आजम खां के बाद अब कांग्रेस प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी को भी चुनाव अयोग की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
चुनावी खर्च का ब्यौरा न देना लखनऊ संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी को भारी पड़ेगा।
व्यय कमेटी द्वारा चुनावी खर्च रजिस्टर सत्यापित कराने को अनुपस्थित रहने के कारण दो बार रीता जोशी को नोटिस जारी किया जा चुका है।
मुख्य कोषाधिकारी ने बताया कि अगर मंगलवार को भी कांग्रेस प्रत्याशी अथवा उनका नामित प्रतिनिधि नोटिस के जवाब में अपने चुनावी खर्च रजिस्टर का हिसाब-किताब निरीक्षण को प्रस्तुत नहीं करता तो आयोग के व्यय प्रेक्षक के निर्देश पर कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
तीन और प्रत्याशियों को नोटिस
इसके तहत रीता बहुगुणा जोशी के चुनाव प्रचार वाहनों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोका जाना संभावित है।
व्यय कमेटी दो बार कांग्रेस प्रत्याशी को खर्च रजिस्टर का हिसाब-किताब सत्यापित कराने को बुला चुकी है।
दूसरी तरफ मोहनलालगंज सीट से खर्च का विवरण देने के लिए सोमवार को बुलाए गए तीनों प्रत्याशी अनुपस्थित रहे। इन्हें नोटिस जारी कर अब 23 अप्रैल को व्यय रजिस्टर के साथ तलब किया गया है।
इसके साथ ही लोकसभा की लखनऊ सीट से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के चुनावी खर्च रजिस्टर के सत्यापन व निरीक्षण का दूसरा चरण भी मंगलवार से शुरू होगा।
बढ़ेंगी कांग्रेस की मुश्किलें
चुनाव आयोग की नोटिस मिलने के बाद भी अगर रीता चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो पाती हैं तो उन पर कार्रवाई होगी।
रीता पर कार्रवाई होने की स्थिति में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वैसे भी जानकारों के अनुसार यूपी में कांग्रेस भाजपा को टक्टर देती हुई नजर नहीं आ रही है।
उत्तर प्रदेश्ा में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच मुकाबला माना जा रहा है।
वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह हर रोज यहां सभाएं कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में लगे हुए हैं।
शाह और आजम पर लग चुका है प्रतिबंध
चुनाव आयोग पहले भी अमित शाह और आजम खां पर चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगाकर सख्ती की बानगी पेश कर चुका है।
हालांकि माफी मांग लेने के कारण शाह पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है वहीं आजम पर लगा प्रतिबंध अभी भी बरकरार है।
अमित शाह को मिली राहत के बाद भी वह लगातार आयोग की निगरानी में हैं।
आयोग के अनुसार शाह और आजम ने आचार संहिता का उल्लंघन किया था।