{"_id":"5975c1f54f1c1b6b578b48a2","slug":"election-commission-refused-bsp-demand","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी मामला: बसपा की मांग को चुनाव आयोग की ना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोटबंदी मामला: बसपा की मांग को चुनाव आयोग की ना
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 24 Jul 2017 03:33 PM IST
विज्ञापन
election commission of india
चुनाव आयोग ने भाजपा, कांग्रेस, सपा सहित सभी बड़े दलों द्वारा नोटबंदी की अवधि सहित वर्ष 2016-17 में जमा की गई नकद धनराशि का विवरण सार्वजनिक करने की बसपा की मांग ठुकरा दी है।
विज्ञापन
आयोग ने बसपा को दो मार्च 2017 को नोटिस जारी किया था। इस पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने तीन मार्च के पत्र द्वारा आयोग से निवेदन किया था कि मीडिया की खबरों के अनुसार नोटबंदी के बाद सभी बड़े राजनीतिक दलों ने बसपा से कई गुना ज्यादा नकद धनराशि बैंकों में जमा कराई है।
विज्ञापन
उन्होंने सिर्फ बसपा को नोटिस देने को भेदभाव वाला कदम बताया था। उन्होंने पार्टी फंड में पारदर्शिता व उत्तरदायित्व लाने और सभी पार्टियों में समानता के लिए सभी दलों से पिछले 12 महीने के नकद जमाराशि का हिसाब मांगने के लिए कहा था।
विज्ञापन
आयोग ने इस प्रस्ताव को नजरंदाज कर दिया और बाद में अपने चार मई 2017 के आदेश में बसपा द्वारा व्यावहारिक परेशानी की बात कहे जाने को स्वीकार करते हुए प्रकरण समाप्त कर दिया।आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने कहा, यह दुखद है कि आयोग ने एक दल के ऐसे प्रस्ताव को ठुकरा दिया जो चुनावी शुचिता में सहायक होता।