यूपी में चुनाव प्रचार चरम पर, किसके पक्ष में बन रही है 'हवा'
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यूपी चुनाव के पहले चरण की तारीख नजदीक आने के साथ ही सियासी पारा भी चढ़ने लगा है। सियासी दलों में पश्चिमी यूपी के 15 जिलों की 73 सीटों पर हवा बनाने के साथ-साथ प्रचार में भी आगे निकलने की होड़ चल रही है। सपा-कांग्रेस, भाजपा व बसपा जैसे प्रमुख दलों के साथ-साथ राष्ट्रीय लोकदल ने भी प्रचार अभियान में बढ़त लेकर माहौल बनाने की मुहिम छेड़ रखी है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रोजाना पांच-छह चुनावी सभाएं कर रहे हैं तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य समेत अन्य नेता भी तकरीबन आधा दर्जन सभाएं कर रहे हैं।
मायावती हर रोज दो सभाएं ही कर रही हैं, जबकि रालोद अध्यक्ष चौ. अजित सिंह व उनके पुत्र जयंत चौधरी भी जाटलैंड में ताबड़तोड़ सभाओं में जुटे हैं। राहुल-अखिलेश ने 29 जनवरी को लखनऊ के बाद शुक्रवार को आगरा में भी साझा रोड शो निकालकर गठबंधन के पक्ष में फिजां तैयार करने की कोशिश की। अलबत्ता मेरठ में अमित शाह का रोड शो नहीं हो सका।
मेरठ में पीएम नरेंद्र मोदी की रैली जरूर हुई है। अब तक के प्रचार अभियान पर नजर डालें तो भाजपा सबसे आगे है। इसके बाद सपा, रालोद और उसके बाद बसपा है। दिलचस्प यह है कि सभी प्रमुख दलों ने प्रचार में भले ही पूरी ताकत झोंक रखी हो, पर अभी किसी के पक्ष में ‘हवा’ नहीं दिखाई दे रही है। अनिल श्रीवास्तव की एक रिपोर्ट-
भाजपा : सभाओं से लेकर दरवाजों तक दस्तक
पार्टी उम्मीदवारों के वोट के लिए भाजपा सभाओं से लेकर दरवाजों तक दस्तक दे रही है। प्रचार पर निकले नेता केंद्र सरकार के कामकाज तो दूसरी तरफ सपा सरकार की विफलता और सरकार में रहते बसपा की कार्यशैली को लेकर हमलावर हैं।
पार्टी ने पश्चिम के सियासी समीकरणों के चलते पूरब के गोरखपुर से सांसद भगवा तेवर वाले आदित्यनाथ को प्रचार के मोर्चे पर मुख्य जिम्मेदारी सौंपी है तो शाह ने भी बिगुल फूंक दिया है।
उन्होंने शुक्रवार को मेरठ में संपर्क करने के साथ धौलाना व खुर्जा में भी सभाओं को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पीछे नहीं हैं। पीएम मोदी मेरठ और अलीगढ़ में रैली कर चुके हैं। एक रैली में उन्होंने ‘स्कैम’ तो दूसरे में विकास की बातें कर विपक्ष को घेरने की कोशिश की।
भाजपा शुरू करेगी प्रचार गीतों का सिलसिला
आदित्यनाथ जहां एक दिन में तीन से चार सभाओं को संबोधित कर रहे हैं, वहीं हेमामालिनी व केंद्र सरकार में मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, महेश शर्मा, डॉ. संजीव बालियान के अलावा अन्य कई सांसद व पार्टी नेता भाजपा प्रत्याशियों के लिए छोटी-छोटी सभाएं व जनसंपर्क कर रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव भी एक दिन में तीन से चार सभाएं कर रहे हैं। जल्द ही भाजपा की तरफ से प्रचार गीतों का सिलसिला भी शुरू करने की तैयारी की गई है।
इसके अलावा भाजपा की तरफ से सभी जिलों में चुनाव अभियान समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों में शामिल स्थानीय कार्यकर्ताओं व नेताओं ने मोहल्ले-मोहल्ले जाकर लोगों से संपर्क करना शुरू कर दिया है।
सपा-कांग्रेस : रोड शो व अखिलेश की ताबड़तोड़ सभाएं
सपा-कांग्रेस गठबंधन के चुनाव अभियान की बागडोर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद संभाल रखी है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी उनके साथ गाहे-बगाहे मंच साझा कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह जुगलबंदी और रफ्तार पकड़ सकती है। हालांकि कांग्रेस की तरफ से अभी राहुल को छोड़कर कोई बड़ा चेहरा मैदान में नहीं उतरा है।
शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने फिरोजाबाद में चुनाव अभियान की शुरुआत जरूर की, लेकिन वे सपा के साये में ही नजर आ रह है। अखिलेश-राहुल के दो रोड शो व दो सभाएं हो चुकी हैं, जबकि अखिलेश पहले चरण के जिलों में 30 से ज्यादा सभाएं कर चुके हैं।
अखिलेश का पूरा ध्यान पश्चिमी यूपी पर
हालांकि अखिलेश ने अपने चुनाव अभियान का श्रीगणेश 24 जनवरी को सुल्तानपुर से किया था, लेकिन अब उनका पूरा ध्यान वेस्ट यूपी पर है। अखिलेश अपना प्रचार अभियान विकास पर ही केंद्रित रखते हुए भाजपा व केंद्र सरकार को निशाने पर रख रहे हैं। वे अपनी सरकार के कामकाज के नाम पर वोट मांग रहे हैं।
एक्सप्रेस-वे, मेट्रो, डायल-100, एंबुलेंस सेवा समेत कई योजनाओं का जिक्र करते हैं। मोदी सरकार के अच्छे दिन के जुमले का जरूर जिक्र करते हैं। नोटबंदी से रोजगार छिन जाने का उल्लेख करते हैं।
अखिलेश 11 फरवरी को राहुल गांधी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रोड शो व सभा करेंगे। राहुल सोमवार को भी अलीगढ़ के इगलास में सभा कर चुके हैं तो मेरठ में मंगलवार को उनका रोड शो रहा।
बसपा : सपा-भाजपा पर तीखा वार, कांग्रेस पर सुस्त प्रहार
बसपा के प्रचार की पूरी जिम्मेदारी पार्टी सुप्रीमो मायावती के कंधों पर है, क्योंकि बसपा की पूरी सियासत उन्हीं के इर्द-गिर्द ही घूमती है। मायावती भी पश्चिम यूपी में ताबड़तोड़ चुनावी सभाएं कर रही हैं। इसमें वे दूसरे दलों की तरह लुभावने वादे भी कर रही हैं।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी व सतीश चंद्र मिश्र छोटी सभाएं कर रहे हैं, वहीं मायावती कई-कई विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी जनसभा कर रही हैं।
वे मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, हाथरस, मुजफ्फरनगर, एटा बरेली व फिरोजाबाद, आगरा, फर्रुखाबाद में चुनावी सभाएं कर चुकी हैं। पार्टी के को-ऑर्डिनेटरों के निर्देशन में कार्यक्रम हो रहे हैं।
मायावती सत्ताधारी सपा को कानून-व्यवस्था और पारिवारिक कलह का हवाला देकर कमजोर साबित करने में जुटी हैं। वहीं भाजपा को वह आरक्षण, नोटबंदी व दलित उत्पीड़न जैसे मामलों को उठाकर घेर रही हैं।
कांग्रेस उपाध्यक्ष द्वारा बसपा अध्यक्ष के प्रति सकारात्मक रुख दिखाए जाने के बाद मायावती का कांग्रेस पर फोकस पहले की अपेक्षा कम हुआ है।
रालोद : किसान-मुसलमानों के पुराने समीकरण पर नजर
रालोद के चुनाव प्रचार के लिए अजित सिंह और जयंत चौधरी ने ताकत झोंक रखी है। हर रोज दौरे कर रहे हैं। जयंत की पत्नी चारू कुछ सीटों पर रोड शो कर रही हैं। उसकी नजर किसान-मुसलमान के पुराने समीकरण पर है।
उसका चुनाव प्रचार भी इसी के इर्द-गिर्द चल रहा है। अजित के निशाने पर प्रदेश व केंद्र दोनों सरकारे हैं। वे किसानों के मुद्दे उठा रहे हैं। मोदी सरकार द्वारा किए गए वादों की याद दिला रहे हैं। पश्चिमी यूपी में शांति एवं सौहार्द के लिए भाजपा को दूर रखने की अपील कर रहे हैं। अभी तक 10 जिलों में उनकी सभाएं हो चुकी हैं।
दूसरे चरण के बिजनौर, अमरोहा में भी वे चुनावी सभाओं को संबोधित कर चुके हैं। जाट बहुल छपरौली और माट सीट पर चारू के रोड कराए गए हैं।
रालोद के दूसरे पंक्ति के नेता भी चुनाव प्रचार के लिए निकल रहे हैं। जाट आरक्षण संघर्ष समिति की अपील भी जाट बहुल क्षेत्रों में कुछ असर छोड़ती दिख रही है।