‘क्यों मातम मना रहे हो मेरा बेटा तो सो रहा है’
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लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में 12 साल के एक बच्चे की जिद पूरी नहीं हुई तो उसने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। माता-पिता घर लौटे तो उन्हें इकलौते बेटे की लाश पंखे के कुंडे में मां के दुपट्टे के सहारे लटकी मिली।
पीजीआई के रक्षाखंड निवासी ऑटो चालक सुनील कुमार की पत्नी सुधा पीडब्ल्यूडी विभाग में क्लर्क हैं। अपने इकलौते बेटे यशवर्धन (12) और आठ वर्ष की बेटी तेजस्विनी को सुबह तैयार करके स्कूल भेज दिया था।
यश साउथ सिटी के एसएन मिश्रा ओवीई मेमोरियल स्कूल में आठवीं कक्षा का और तेजस्विनी तीसरी कक्षा की छात्रा है। इसके बाद सुधा दफ्तर चली गई थीं।
दोपहर दो बजे स्कूल की छुट्टी होने पर सुनील उन्हें घर ले आए। फिर पत्नी को दफ्तर से घर लाने के लिए जाने लगे तो बेटी तेजस्विनी भी साथ चलने की जिद करने लगी। यश भी साथ चलने की जिद पर अड़ गया।
मां ने खो दिया होश
इस पर सुनील ने उसे जमकर डांट लगा दी और तेजस्विनी को साथ लेकर चले गए। शाम साढ़े चार बजे सभी घर लौटे तो दरवाजे की कुंडी अंदर से बंद मिली।
काफी देर तक कॉल बेल बजाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने खिड़की से अंदर झांका। भीतर यशवर्धन का शव लटका दिखा। इसके बाद उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि कर दी।
रक्षाखंड कॉलोनी में इस घटना की वजह से बुधवार को मातम छाया रहा। परिवारवालों के साथ-साथ पड़ोसियों की आखों में भी आंसू झलक रहे थे। यश कॉलोनी में सभी का चहेता था।
चंचल स्वभाव को होने की वजह से सभी लोग उसे काफी पसंद करते थे। मां सुधा बार बार यही कहती रही कि ये सब क्यों मातम मना रहे हैं।
मेरे बेटे को कुछ नहीं हुआ, वो सो रहा है। यह कहते ही वो बेहोश हो जा रही थी। पिता बार बार उस घड़ी को कोसते रहे जब उन्होंने यश को अकेले घर में छोड़ दिया था।