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अगर नाबालिग लड़के के साथ भागी बालिग लड़की तो किस पर चलेगा केस, जानें

Sat, 28 May 2016 02:48 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 28 May 2016 02:48 PM IST
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ehsas organisation workshop about child right in lucknow
डेमो

प्रेम प्रसंग में कई दफा लड़का और लड़की घर से भाग जाते हैं। जब पुलिस उन्हें पकड़ती है तो लड़की के पक्ष की ओर से लड़के पर बलात्कार का केस दर्ज करा दिया जाता है। लेकिन क्या होगा, अगर लड़के की उम्र 18 वर्ष से कम हो और लड़की की 18 वर्ष से ज्यादा?

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राजधानी में बाल अधिकारों पर काम कर रहे संगठन अहसास के एक सेमिनार में शुक्रवार को लखनऊ पुलिस ने इस सवाल पर विशेषज्ञों ने कहा, लड़की पर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसिव (पोक्सो) के तहत लड़के के दुराचार का केस दर्ज हो सकता है। 
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दूसरी ओर लड़के पर बलात्कार का केस दर्ज तो होगा, लेकिन वह जेजे बोर्ड में चलाया जाएगा, वहीं लड़की पर दर्ज हुआ केस जिला अदालत में चलाया जाएगा। इस बारे में चाइल्ड लाइन लखनऊ के निदेशक अंशुमालि शर्मा ने कहा कि पुलिस को दोनों केस में अलग-अलग फाइल बनानी होगी।
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वहीं जीआरपी की पुलिस अधीक्षक ने कहा कि दोनों ओर से केस दर्ज करना होगा। वहीं, अहसास की संस्था की महासचिव शचि सिंह ने बताया कि पोक्सो कानून जेंडर न्यूट्रल है, यानी वह बच्चों को लड़के और लड़की के भेद में नहीं बांटता और उनके साथ होने वाले यौन अपराधों पर समान रूप से सजा का प्रावधान करता है।

ehsas organisation workshop about child right in lucknow
सेमिनार - फोटो : amar ujala

कार्यक्रम में एसपी सोनिया सिंह, राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के व्याख्याता केए पांडे, डीएसपी महिला सम्मान प्रकोष्ठ, अनैतिक मानव तस्करी इकाई के प्रभारी ओपी सिंह, विशेष किशोर पुलिस इकाई की प्रभारी शिवा शुक्ला, उत्तर रेलवे लखनऊ के स्टेशन मास्टर अरविंद बघेल, कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी शामिल थे।

सेमिनार में यह मुद्दा उठा कि कई बाल गृह रात में बच्चों को आश्रय देने से इन्कार कर देते हैं। खासतौर पर लड़कियों को, जिनके बारे में धारणा बना ली जाती है कि रात के समय अगर लड़की को आश्रय की जरूरत है तो उसके चरित्र में कोई खराबी होगी। 

इस पर लखनऊ बाल कल्याण समिति के पूर्व निदेशक विपिन चंद्रा ने कहा कि बाल गृह बच्चों को आश्रय देने से इन्कार नहीं कर सकते। कोई ऐसा करता है तो बाल कल्याण समितियां उन पर कार्रवाई करें। 

सेमिनार में तय किया गया कि विभिन्न संगठन मिलकर एक समूह बनाएंगे, जिसके जरिये बच्चों को समय पर मदद दी जा सकेगी। वहीं बच्चों के विभिन्न मामलों से जुड़े आंकड़ों का भी संकलन किया जा सकेगा।

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