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अयोध्या में ठंड का असर: हनुमंतलला को ओढ़ाई जा रही रजाई, बदला आरती का समय, रामलला के लिए भी हुआ इंतजाम

Mon, 08 Dec 2025 08:01 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: ishwar ashish Updated Mon, 08 Dec 2025 08:01 PM IST
सार

अयोध्या के मठ-मदिंरों में विराजमान देव विग्रह को ठंड से बचाने के लिए तरह-तरह के यत्न किये जा रहे हैं। हनुमंतलला को रजाई ओढ़ाई जा रही है। वहीं, रामलला के लिए भी जयपुर से रजाई मंगाई गई है।

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Effect of cold in Ayodhya: Hanumantlala is being covered with a quilt, Aarti timings changed
- फोटो : amar ujala

विस्तार

बढ़ती सर्दी के चलते भगवान पर भी ठंडी का असर दिखना शुरू हो गया है। रामनगरी के मठ-मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रह को ठंड से बचाने के के लिए तरह-तरह के यत्न किए जा रहे हैं। रामलला के लिए राजस्थान से जयपुरिया रजाई मंगाई गई है। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में भी आरती का समय बदल दिया गया है। हनुमंतलला को रजाई ओढ़ाई जाने लगी है।

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तापमान गिरने के साथ ही रामनगरी के मठ-मंदिरों में देवी-देवताओं की शीतकालीन सेवा- पंरपरा और गहन हो गई है। अयोध्या के राजा के रूप में प्रतिष्ठित हनुमानगढ़ी में अब सुबह की आरती चार के बजाय पांच बजे होने लगी है। पुजारी रमेश दास ने बताया कि गर्भगृह में गरमाहट बनाए रखने के लिए धूप-लोबान की सुगंधित आहट लगातार दी जा रही है। रात में हनुमंतलला को रजाई ओढ़ाई जा रही है। भोग में गर्म खाद्य पदार्थ पूड़ी, सब्जी, मालपुआ, रबड़ी, बादाम-केसरयुक्त दूध आदि दिए जा रहे हैं। दशरथ महल बड़ा स्थान में धनुषधारी भगवान को रजाई ओढ़ाई जा रही है। मौसम के अनुसार भगवान को भोग लगाया जा रहा है।
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लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने बताया कि ठंडक बढ़ गई है, इसलिए भगवान के शृंगार, भोग व आरती में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जब मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है तो वह जीव स्वरूप हो जाती है। इसलिए भगवान के विग्रह की पूजा जीव स्वरूप में ही की जाती है। जानकीमहल के पुजारी पंकज मिश्र ने बताया कि मंदिर में विराजमान देव विग्रहों को अभी कंबल ओढ़ाया जा रहा है। ठंडक और बढ़ने पर अंगीठी भी जलाई जाएगी। भोग में गर्म खाद्य पदार्थ दिए जा रहे हैं, सुबह का स्नान गुनगुने पानी से कराया जा रहा है।

बादाम-केसरयुक्त दूध व ड्राई फ्रूट्स दिए जा रहे
राम जन्मभूमि से सटे रंगमहल में विराजमान सीताराम सहित चारों भाइयों के विग्रह को ऊनी वस्त्र पहनाए जा रहे हैं। रंगमहल के महंत रामशरण दास ने बताया कि ठंड से बचने के लिए जहां मनुष्य गर्म वस्त्र पहनते हैं वैसे ही भगवान को भी गर्म वस्त्र पहनाए जाते हैं। भगवान को गर्म पानी से स्नान कराया जाता है। सप्ताह के सात दिन के लिए अलग-अलग ऊनी वस्त्र तैयार कराए गए हैं। रात में भगवान को शयन कराने के बाद उन्हें कंबल ओढ़ाया जा रहा है। भोग में आलू के पराठे, केसर-बादाम युक्त दूध, ड्राई फ्रूट्स दिए जा रहे हैं।

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