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लखनऊ की जंग में दिखेगा ‘अटल’ रंग, भाजपा की कोशिश जीत का अंतर और बढ़े, विपक्ष ने भी कसी कमर

Mon, 01 Apr 2019 11:04 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 01 Apr 2019 11:04 AM IST
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Effect of atal bihari on lucknow loksabha seat.
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। - फोटो : amar ujala

आजादी के बाद लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी के बिना यह पहला चुनाव होगा। लखनऊ वालों के नाम न तो इस बार उनकी कोई चिट्ठी आएगी और न भाजपा उम्मीदवार को आशीर्वाद के रूप में कोई संदेश। बावजूद इसके लखनऊ की जंग ‘अटल’ रंग में ही रंगी दिखेगी।

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भाजपा की कोशिश होगी कि जीत के अंतर को और बढ़ाकर वह अटल के गढ़ में अपने पैर ज्यादा मजबूती से जमाने का संदेश दे। विपक्ष भी प्रयास करेगा कि अटल के घर में अपना झंडा फहराकर यहां तीन दशक से भाजपा की जीत का सिलसिला तोड़ा जाए। साथ ही अटल के घर से प्रदेश में भाजपा के विजय रथ को रोकने का संदेश देकर प्रदेश के सियासी समीकरण दुरुस्त किए जाएं।
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वैसे तो अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म लखनऊ में नहीं हुआ था। पर उनका लखनऊ से किशोरावस्था से ही ऐसा नाता जुड़ा कि उनके लिए यह दूसरा घर सा हो गया था। लखनऊ उनकी कर्मभूमि ही नहीं, बल्कि चुनावी समर भूमि भी बना। उन्होंने पहला चुनाव भी लखनऊ से ही लड़ा और जीवन का अंतिम चुनाव भी यहीं से लड़ा।
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यह बात अलग है कि वह पहला चुनाव यहां से जीत नहीं सके। लेकिन जब जीते तो फिर लगातार पांच बार लखनऊ से ही। यहीं से सांसद बनकर वह प्रधानमंत्री भी बने और नेता प्रतिपक्ष भी। यही वजह रही कि लखनऊ में कोई चुनाव उनसे अछूता नहीं रहा। वह कभी उम्मीदवार के रूप में यहां के चुनाव में रंग जमाते दिखे तो तो कभी प्रचारक के रूप में पार्टी के लिए वोट मांगते हुए।

तब आई खड़ाऊं

Effect of atal bihari on lucknow loksabha seat.
अटल बिहारी वाजपेयी

वाजपेयी अंतिम बार 2007 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के समर्थन में लखनऊ में सभा करने आए थे। स्वास्थ्य ठीक न होने से इसके बाद वे नहीं आ पाए। 2009 में उनकी जगह लोकसभा चुनाव लालजी टंडन लड़े थे।

टंडन अपनी चुनावी नैया पार लगाने के लिए अटल की खड़ाऊं (पादुका) लेकर आए। बाद में उनके लिए अटलजी की चिट्ठी भी आई और वह अटल की खड़ाऊं और चिट्ठी के सहारे चुनाव लड़े। अटल की चिट्ठियां घर-घर पहुंचाई गई। टंडन चुनाव जीत गए।

वर्ष 2014 में राजनाथ सिंह लखनऊ के चुनावी मैदान में उतरे तो उनके लिए वाजपेयी ने अंगवस्त्रम भेजा। जिसे गले में डालकर राजनाथ ने न सिर्फ नामांकन किया, बल्कि चुनाव प्रचार भी किया। साफ है कि लखनऊ में भाजपा उम्मीदवारों की चुनावी नैया अटल के नाम के सहारे ही पार लगती रही है।

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