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जेल में बंद कैदियों को भी दिखने लगी उम्मीद

Tue, 29 Oct 2013 02:19 AM IST
अभिषेक यादव/लखनऊ
अभिषेक यादव/लखनऊ Updated Tue, 29 Oct 2013 02:19 AM IST
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education open the new path

‘10 साल से जेल में हूं, लेकिन अब लिखना-पढ़ना सीखने के बाद लग रहा है कि जीवन सिर्फ काटने का नाम नहीं है।

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एक उम्मीद बंधी है कि अब कुछ अच्छा काम करूंगा।’ यह कहना है हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे वकील खान का।

साक्षर होने के बाद अपने जीवन में आ रहे बदलावों पर बात करते-करते उसकी आंखों में चमक आ जाती है।

सोमवार को जिला कारागार में आयोजित समारोह में वकील उन 157 कैदियों में शामिल थे, जिन्हें साक्षर होने का तमगा मिला है।

जेल प्रशासन ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के साथ इस जन साक्षरता कार्यक्रम को आयोजित किया था।

इसमें 208 कैदी शरीक हुए और इनमें से 75 प्रतिशत कैदियों को साक्षर होने का तमगा दिया गया।

कार्यक्रम में आईजी कारागार आरपी सिंह, डीआईजी कारागार शरद कुलश्रेष्ठ, टीसीएस रीजनल हेड जयंत कृष्णा, गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के राजेंद्र सिंह बग्गा सहित कई गणमान्य अतिथियों ने कैदियों को सर्टिफिकेट दिए।

इस दौरान जयंत कृष्णा ने बताया कि साक्षरता कार्यक्रम के दौरान कैदियों को प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और विजुअल के जरिये पढ़ाया गया ताकि वे चीजों को जल्दी समझें।
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आमतौर पर भारत में किसी निरक्षर व्यक्ति को संपूर्ण साक्षर बनाने में 200 घंटे का अध्ययन करवाया जाता है, लेकिन इस कार्यक्रम में कैदियों ने अपने बुद्धि कौशल के अनुसार 40 से 80 घंटे में साक्षरता हासिल की जो सुखद है।
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इन्हें पढ़ाने वाले 6 शिक्षक भी कैदी ही हैं, जिन्हें विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। कार्यक्रम में आईजी कारागार आरपी सिंह ने बताया कि लखनऊ के अन्य जिलों की 6 सेंट्रल जेलों में भी कैदियों को साक्षर किया जाएगा।

इसके लिए 6-6 कैदी शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है अब वे जेलों में जाकर पढ़ाएंगे। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के राजेंद्र सिंह बग्गा ने बताया कि कमेटी इस कार्यक्रम को बाकी जेलों में भी संचालित करने के लिए टीवी, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और ट्रेनिंग उपलब्ध करवाएगी।


वहीं, टीसीएस ने भी सॉफ्टवेयर सुविधाएं व अन्य उपकरण उपलब्ध करवाने का वादा किया। कार्यक्रम के समापन पर जेल अधीक्षक दधिराम मौर्य ने सभी का आभार जताया और संचालन डिप्टी जेलर अजय सिंह ने किया।

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