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सबसे ज्यादा शिक्षित लोग हो रहे साइबर जालसाजों के शिकार

Mon, 15 Nov 2021 02:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 15 Nov 2021 02:18 AM IST
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educated persons on target for cyber fraud
लखनऊ। साइबर ठगी के शिकार सबसे अधिक शिक्षित लोग हो रहे हैं। ऐसे लोगों को साइबर जालसाजी के बारे में पूरी जानकारी होती है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही में ठगी के शिकार हो जा रहे हैं। साइबर क्राइम से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि ठगी के शिकार होने वालों में 80 प्रतिशत संख्या ऐसे ही लोगों की है। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी, शिक्षक, सरकारी विभागों के कर्मचारी, पुलिस में तैनात अधिकारी व कर्मचारी, रिटायर पुलिसकर्मी, वकील, नेता व प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। अभी 2021 पूरा भी नहीं हुआ है लेकिन ढाई हजार के करीब मामले साइबर क्राइम सेल व थानों में दर्ज कराए जा चुके हैं। एनसीआरबी भी इस बात को मानती है कि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मामले साइबर ठगी के सामने आ रहे हैं। प्रदेश के आठ जोन में साइबर ठगी के मामले में लखनऊ पहले नंबर है। जबकि इसके बाद मेरठ में ठगी के मामले सामने आये हैं।
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नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक साइबर ठगी के मामले में सामने आये हैं। पिछले तीन साल में साइबर क्राइम का ग्राफ तीन गुना ज्यादा हो गया है। 2015 में साइबर क्राइम के 700, 2017 में यह आंकड़ा एक हजार पहुंचा, 2018 में 1500 तो 2019-2020 में दो हजार के ऊपर पहुंच गया। जबकि 2020 में करीब तीन से चार महीने तक लॉक डॉउन भी रहा। वहीं इस साल अभी साल पूरे होने में 49 दिन बाकी है जबकि साइबर क्राइम का आंकड़ा ढाई हजार केकरीब पहुंच गया है।
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75 प्रतिशत लोग शिक्षित फिर भी बनते है सबसे अधिक शिकार
राजधानी में करीब 75 प्रतिशत आबादी शिक्षित हैं लेकिन उनकी शिक्षा सिर्फ कागजी ही दिख रही है। हालात यह है कि राजधानी में सबसे अधिक लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। जबकि साइबर क्राइम सेल की टीम लगातार जागरूकता अभियान भी चला रही है। प्रमुख स्थानों पर पोस्टर व हैंडबिल लगाया गया है। ताकि लोगों को साइबर ठगों से बचाया जा सके। इसके बाद भी प्रतिदिन 10 से 15 शिकायतें साइबर क्राइम सेल और थानों में पहुंच रही है। इनमें से ज्यादातर मामले दर्ज तक नहीं किये जाते हैं। साइबर क्राइम सेल के अधिकारी के मुताबिक साइबर ठगी के सबसे अधिक मामले सोशल मीडिया प्लेटफार्म, ऑन लाइन ट्रांजेक्शन व एटीएम क्लोन के सामने आ रहे हैं। ज्यादातर साइबर ठग सोशल मीडिया और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर सक्रिय हैं। इसकी संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। साइबर क्राइम सेल के एसीपी विवेक रंजन राय के मुताबिक साइबर क्राइम सेल की टीम लगातार लोगों को जागरूक कर रही है। इसके बाद भी पढ़ा लिख तबका इस तरह की ठगी का शिकार हो रहा है। ठग मोबाइल पर लिंक भेज, वेबसाइट हैक कर, एटीएम क्लोनिंग कर खातों को साफ कर रहे हैं। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को कॉल कर बैंक कर्मचारी बनकर ठगी की जा रही है।
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राजधानी के पॉश इलाके साइबर ठगों के निशाने पर
कमिश्नरेट व लखनऊ ग्रामीण इलाके के थानों में दर्ज मुकदमों की संख्या खुद ही कहानी बयां करती है कि पॉश इलाकों में रहने वाले लोग ही साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। कमिश्नरेट के तीन जोन में पॉश कालोनियां हैं। इसमें मध्य जोन जिसमें 313, पूर्वी जोन 408 और उत्तरी जोन जहां 457 मामले सामने आये हैं। वहीं दक्षिणी जोन में महज 93 और पश्चिम में 199 मामले दर्ज किये गये हैं। वहीं ग्रामीण इलाके के पांच थानों में मात्र 34 मुकदमें दर्ज किये गये। थानावार आंकड़ों के मुताबिक मध्य जोन के हजरतगंज में 84, हुसैनगंज में 23, गौमतपल्ली में 5, कृष्णानगर में 44, मानकनगर में 22, सरोजनीनगर 66, बंथरा 22, आलमबाग 47 मुकदमें दर्ज हैं। वहीं पूर्वी में विभ्ूातिखंड 38, पीजीआई में 81, चिनहट 63, कैंट 57, आशियाना 67, गोमतीनगर 56, गोमतीनगर विस्तार 46 मामले दर्ज हैं। उत्तरी जोन में अलीगंज 55, गाजीपुर 62, गुडंबा 50, हसनगंज 36, इंदिरानगर 89, जानकीपुरम 43, महानगर 27, मड़ियांव 54, विकानगर 41 मामले हैं। दक्षिणी में पारा 22, मोहनलालगंज 6, नगराम 1, काकोरी 7, गोसाईंगंज 22 और सुशांत गोल्फ सिटी 35 मामले दर्ज हैं। वहीं सबसे कम मामले पश्चिमी जोन के हैं। यहां नाका 14, अमीनाबाद 18, बाजारखाला 25, चौक 30, कैसरबाग 22, सआदतगंज 18, तालकटोरा 39, ठाकुरगंज में 32 और वजीरगंज में 9 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाके में बीकेटी मे सबसे अधिक 28, इटौंजा, माल, मलिहाबाद में 2-2 मामले दर्ज किये गये है। इसके अलावा साइबर क्राइम सेल में भी कई शिकायतें दर्ज कराई गई है। जिनमें मुकदमा दर्ज नहीं हो सका है।

बैंकों से बढ़ रही लोगों की दूरी भी बड़ा कारण
एसीपी साइबर क्राइम सेल विवेक रंजन राय का कहना है कि साइबर अपराधियों के शिकार होने के पीछे बड़ा कारण बैंक से दूरी बढ़ना है। पिछले 5-7 सालों में ऑनलाइन बैंकिंग प्रणाली, एटीएम और अन्य तरह के एप प्रयोग करने के कारण बैंक से लोगों की दूरियां बढ़ती जा रही है। यहां तक लोगों को मालूम नहीं होता है कि बैंक का मैनेजर कौन है। कौन कर्मचारी उनका खाता देख रहा है। इसके कारण साइबर जालसाज, लोगों को आसानी से शिकार बना रहे हैं। कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद से अब साइबर ठगों के 17 गिरोहों के 76 अपराधियों को पकड़ा गया है। लोगों को खुद जागरूक होना होगा। साइबर ठगी से बचने के लिए ऑन लाइन बैंकिंग के सेफ्टी एप के बारे में भी जानकारी जरूरी है। साइबर क्राइम सेल लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है।
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