यूपी का भयंकर भ्रष्टाचार, सीज हुए 60 करोड़
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करोड़ों रुपये के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी यूपी के पूर्व मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा समेत अन्य की 60 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है।
ईडी ने मनी लांड्रिंग कानून के तहत यह कार्रवाई की है। यूपी में भ्रष्टाचार के मामले में किसी राजनेता की संपत्ति जब्त किए जाने का संभवत: यह पहला मामला है।
इस बहुचर्चित घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। सुनवाई गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट में चल रही है।
भ्रष्टाचार के कारण ही मायावती ने भी पार्टी से निकाला
एक दौर में मायावती के बेहद विश्वस्त लोगों में शुमार और बसपा सरकार में परिवार कल्याण व सहकारिता मंत्री रहे कुशवाहा और उनके सहयोगी पूर्व विधायक रामप्रसाद जायसवाल दो साल से गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं।
घोटाले के चलते ही उन्हें मंत्री पद गंवाना पड़ा था। यही नहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें पार्टी से भी बाहर कर दिया था।
इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ स्थित जोनल ऑफिस ने कार्रवाई करते हुए कुशवाहा और सह आरोपी आरपी जायसवाल के कई फ्लैट और जमीनें जब्त कर लीं।
सूत्रों के मुताबिक जब्त की गई संपत्तियां लखनऊ, बांदा, नोएडा और दिल्ली में हैं।
5700 करोड़ रूपये का है घोटाला
ईडी जल्द ही इन संपत्तियों को लेकर निषेधाज्ञा जारी करेगा। हालांकि आरोपियों के पास कार्रवाई के खिलाफ अपील करने का अधिकार है।
वह 180 दिनों के भीतर प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) में अपील कर सकते हैं।
यूपी के बड़े घोटालों में शुमार एनएचआरएम घोटाला करीब 5700 करोड़ रुपये का है।
बसपा राज में यह घोटाला खासा सुर्खियों में रहा था। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच की कमान संभाली थी।
पहली बार जब्त हुई किसी नेता की सम्पत्ति
घोटाले में नाम आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 7 अप्रैल 2011 को कुशवाहा को मंत्री पद से बर्खास्त किया था, फिर पार्टी से भी निकाले गए।
तीन मार्च, 2012 को जैसे ही विधानसभा चुनाव का मतदान खत्म हुआ, सीबीआई ने कुशवाहा को धर दबोचा था। तब से वह डासना जेल में बंद हैं।
मामले में अन्य आरोपी गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं।
पत्नी लड़ रही सपा से चुनाव
बसपा से निकाले जाने के बाद सियासी ठिकाने की तलाश में कुशवाहा विधानसभा चुनाव से पहले 3 जनवरी 2012 को भाजपा में शामिल हो गए।
इसका तगड़ा विरोध हुआ तो पार्टी ने कुशवाहा को बाहर का रास्ता दिखा दिया। राज्य में सरकार बदलते ही सपा से उनकी नजदीकियां बढ़ीं।
सपा ने भाजपा से सबक लेते हुए बाबूसिंह को पार्टी में शामिल न कर उनकी पत्नी शिवकन्या और भाई शिवचरण को शामिल कर लिया।
लोकसभा चुनाव में शिवकन्या गाजीपुर से सपा की उम्मीदवार भी हैं।