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ईडी ने जब्त की रिवर फ्रंट घोटाले से जुड़े इंजीनियरों की संपत्ति, ठेकेदारों से ली थी मोटी रिश्वत
Fri, 05 Jul 2019 11:10 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 05 Jul 2019 11:10 AM IST
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गोमती रिवर फ्रंट
- फोटो : amar ujala
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प्रवर्तन निदेशालय ने रिवर फ्रंट से जुड़े तीन इंजीनियरों की संपत्ति नोएडा, लखनऊ और गाजियाबाद में जब्त कर ली है। यह संपत्ति रिवर फ्रंट परियोजना के समय सिंचाई विभाग में तैनात रहे इंजीनियर रूप सिंह यादव, अनिल यादव और एसएन शर्मा की है।
प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों ने बताया कि जो संपत्ति जब्त की गई है, उसमें रूप सिंह का नोएडा स्थित प्लॉट, अनिल यादव के लखनऊ स्थित तीन प्लॉट और एसएन शर्मा का गाजियाबाद स्थित फ्लैट शामिल है। इन संपित्तयों की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
इन इंजीनियरों ने यह संपत्ति रिश्वत के पैसों से हासिल की थी। प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दौरान पता चला था कि रिवर फ्रंड के काम में इंजीनियरों ने ठेकेदारों से मोटी रिश्वत ली। रिश्वत के पैसे कैश के साथ-साथ सीधे खातों में भी ट्रांसफर कराए गए।
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प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों का दावा है कि पहली बार इंजीनियरों को ठेकेदारों द्वारा दी गई घूस की रकम को एक से दूसरे खातों में भेजा जाना साबित किया जा सका है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि इंजीनियरों ने अपनी पत्नियों के खातों में रिश्वत के पैसे लिए। इन इंजीनियरों के पास बड़े पैमाने पर अघोषित आय का पता चला है। जिसकी जांच की जा रही है।
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प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों ने बताया कि जो संपत्ति जब्त की गई है, उसमें रूप सिंह का नोएडा स्थित प्लॉट, अनिल यादव के लखनऊ स्थित तीन प्लॉट और एसएन शर्मा का गाजियाबाद स्थित फ्लैट शामिल है। इन संपित्तयों की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
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इन इंजीनियरों ने यह संपत्ति रिश्वत के पैसों से हासिल की थी। प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दौरान पता चला था कि रिवर फ्रंड के काम में इंजीनियरों ने ठेकेदारों से मोटी रिश्वत ली। रिश्वत के पैसे कैश के साथ-साथ सीधे खातों में भी ट्रांसफर कराए गए।
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प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों का दावा है कि पहली बार इंजीनियरों को ठेकेदारों द्वारा दी गई घूस की रकम को एक से दूसरे खातों में भेजा जाना साबित किया जा सका है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि इंजीनियरों ने अपनी पत्नियों के खातों में रिश्वत के पैसे लिए। इन इंजीनियरों के पास बड़े पैमाने पर अघोषित आय का पता चला है। जिसकी जांच की जा रही है।
मालूम हो कि प्रदेश में वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद योगी सरकार ने अखिलेश सरकार के दौरान हुए निर्माण कार्यों की जांच शुरू की थी। इसी कड़ी में गोमती रिवर फ्रंट में हुए काम की जांच के लिए आलोक सिंह के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की थी। जिसने प्रथम दृष्टया इस परियोजना में गड़बड़ी की बात कही थी।
इस मामले में गोमतीनगर थाने में 19 जून 2017 को एफआईआर दर्ज की गई थी। जुलाई 2019 में इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का फैसला किया गया। सीबीआई ने 30 नवंबर 2017 को अधिशासी अभियंता, लखनऊ खंड, शारदा कैनाल की तहरीर पर केस दर्ज किया था।
इस मामले में सीबीआई की जांच जारी थी, तभी प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले वर्ष सितंबर माह में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में तत्कालीन मुख्य अभियंताओं गुलेश चंद्र, एसएन शर्मा, काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता शिव मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव और कार्यकारी अभियंता सुरेंद्र यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इसमें से गुलेश चंद्र, शिव मंगल यादव, अखिल रमन और रूप सिंह यादव सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
इस मामले में गोमतीनगर थाने में 19 जून 2017 को एफआईआर दर्ज की गई थी। जुलाई 2019 में इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का फैसला किया गया। सीबीआई ने 30 नवंबर 2017 को अधिशासी अभियंता, लखनऊ खंड, शारदा कैनाल की तहरीर पर केस दर्ज किया था।
इस मामले में सीबीआई की जांच जारी थी, तभी प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले वर्ष सितंबर माह में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में तत्कालीन मुख्य अभियंताओं गुलेश चंद्र, एसएन शर्मा, काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता शिव मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव और कार्यकारी अभियंता सुरेंद्र यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इसमें से गुलेश चंद्र, शिव मंगल यादव, अखिल रमन और रूप सिंह यादव सेवानिवृत्त हो चुके हैं।