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अखिलेश के बाद अब मायावती पर जांच की आंच, स्मारक घोटाले में सात जगहों पर ईडी की छापेमारी

Thu, 31 Jan 2019 02:27 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 31 Jan 2019 02:27 PM IST
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ED raided on many places in monument scam.
अखिलेश यादव व मायावती - फोटो : amar ujala

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट रिवर फ्रंट घोटाले से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी के बाद अब मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट पर शिकंजा कसा है। ईडी ने बसपा प्रमुख से जुड़े स्मारक घोटाले में राजधानी में सात ठेकेदारों व अधिकारियों के ठिकानों पर बृहस्पतिवार को एक साथ छापेमारी की और कई दस्तावेज जब्त किए हैं। इस घोटाले में 111 करोड़ रुपये की अनियमितता का आरोप है।

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वर्ष 2012 में अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद इस घोटाले की जांच में तेजी आई थी, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2014 में विजिलेंस ने सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में गोमतीनगर थाने में केस दर्ज कराया था। इसी आधार पर ईडी ने भी अपने यहां मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
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दरअसल, मायावती के शासनकाल (2007-2012) में 2600 करोड़ रुपये की लागत से लखनऊ और नोएडा में स्मारक बनाए गए थे। इनमें पार्क के साथ डॉ. भीमराव आंबेडकर, कांशीराम और मायावती की मूर्तियां भी लगवाई गई थीं।

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आरोप है कि निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता से सरकारी खजाने को 111 करोड़ 44 लाख 35 हजार 066 रुपये का नुकसान हुआ और लोकसेवकों व निजी व्यक्तियों को अवैध फायदा हुआ। ईडी ने अपने यहां दर्ज एफआईआर में 19 लोगों को आरोपी बनाया है।

इनके खिलाफ दर्ज किया गया था मुकदमा

आरोपियों में बसपा सरकार में मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा, खनन विभाग के भूतपूर्व संयुक्त निदेशक व सलाहकार सुहैल अहमद फारूकी, निर्माण निगम के पूर्व एमडी सीपी सिंह व निर्माण निगम के 15 अन्य इंजीनियरों को नामजद किया गया है।

मालूम हो कि विजिलेंस ने लोकायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर पत्थर की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों, खनन विभाग और एलडीए के अधिकारियों व अन्य निजी लोगों को भी जांच के दायरे में रखा था।

नसीमुद्दीन कांग्रेस में, कुशवाहा ने बनाई अपनी पार्टी

बसपा सरकार के जिन तत्कालीन दो मंत्री इस घोटाले में आरोपी हैं उसमें से नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मायावती पार्टी से निकाल चुकी हैं और अब वह कांग्रेस में हैं। वहीं, बाबू सिंह कुशवाहा पहले भाजपा में गए और अब वह अपनी पार्टी के मुखिया हैं।

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