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आजम खां पर शिकंजा: सरकारी धन का दुरुपयोग, ब्लैक मनी, फर्जी दानदाता, डमी ट्रस्टी; ये प्रमाण बने कार्रवाई की वजह
Thu, 20 Aug 2026 09:09 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 20 Aug 2026 09:09 AM IST
सार
आजम खां और जौहर ट्रस्ट पर सरकारी धन का दुरुपयोग, ब्लैक मनी, फर्जी दानदाता, डमी ट्रस्टी कार्रवाई की वजह बने हैं। ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी के निर्माण में महज 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया था। आयकर जांच में 494 करोड़ रुपये खर्च होने के प्रमाण मिले थे।
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ED action Azam Khan
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पूर्व मंत्री आजम खां और उनकी जौहर ट्रस्ट पर ईडी की कार्रवाई की वजह यूनिवर्सिटी के भवनों के निर्माण में सरकारी विभागों के धन का दुरुपयोग, फर्जी दानदाता, डमी ट्रस्टी और यूनिवर्सिटी के निर्माण में बड़े पैमाने पर काले धन का इस्तेमाल का आरोप है। ईडी द्वारा बीते चार साल से इसकी गहन जानकारी जुटाई जा रही थी।
इससे पूर्व आयकर विभाग की जांच के दौरान ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी के 59 भवनों के निर्माण में महज 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया था जबकि जांच में यह करीब 494 करोड़ रुपये मिला था। बड़े पैमाने पर काले धन को ट्रस्ट में डायवर्ट करने से ईडी को मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई का मजबूत आधार मिला है।
सूत्रों के मुताबाकि, जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में आठ सरकारी विभागों का करीब 110 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया था। आयकर विभाग की जांच में जौहर विश्वविद्यालय में अवस्थापना संबंधी कार्यों में इन विभागों का करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने के प्रमाण मिले थे।
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इससे पूर्व आयकर विभाग की जांच के दौरान ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी के 59 भवनों के निर्माण में महज 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया था जबकि जांच में यह करीब 494 करोड़ रुपये मिला था। बड़े पैमाने पर काले धन को ट्रस्ट में डायवर्ट करने से ईडी को मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई का मजबूत आधार मिला है।
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सूत्रों के मुताबाकि, जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में आठ सरकारी विभागों का करीब 110 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया था। आयकर विभाग की जांच में जौहर विश्वविद्यालय में अवस्थापना संबंधी कार्यों में इन विभागों का करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने के प्रमाण मिले थे।
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इनमें सीएंडडीएस, लोक निर्माण विभाग, संस्कृति विभाग, ग्राम्य विभाग विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, नगर विकास और सिंचाई विभाग शामिल थे। जल निगम का दो अलग-अलग मदों में बजट खर्च किया गया था। इससे पुल, सड़क, रिवरफ्रंट, नहर को चौड़ा करने, इमारतों के निर्माण समेत तमाम कार्य कराए गए थे।
सबसे ज्यादा सीएंडडीएस और जल निगम का करीबन 75 करोड़ रुपये और लोक निर्माण विभाग का 13.73 करोड़ रुपये व्यय हुआ था। हालांकि बाद में विभागीय अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सांसद-विधायक निधि का मनमाना प्रयोग
आजम खां के प्रभाव की वजह से उनकी यूनिवर्सिटी पर सांसद और विधायक निधि का करीब 4.57 करोड़ रुपये भी लगाया गया। मामला हाईकोर्ट में पहुंचने पर पूरी रकम वापस करनी पड़ी थी। यूनिवर्सिटी के अवस्थापना कार्यों के लिए दो दर्जन विधायकों ने अपनी निधि में से 10 लाख रुपये से लेकर 45 लाख रुपये तक दिए थे।
आजम खां के प्रभाव की वजह से उनकी यूनिवर्सिटी पर सांसद और विधायक निधि का करीब 4.57 करोड़ रुपये भी लगाया गया। मामला हाईकोर्ट में पहुंचने पर पूरी रकम वापस करनी पड़ी थी। यूनिवर्सिटी के अवस्थापना कार्यों के लिए दो दर्जन विधायकों ने अपनी निधि में से 10 लाख रुपये से लेकर 45 लाख रुपये तक दिए थे।
आजम खां की पत्नी एवं तत्कालीन सांसद तजीन फात्मा ने अपनी सांसद निधि से तीन बार 22.39 लाख रुपये दिये थे। एमएलसी सरोजनी अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के लॉ संकाय में मूट कोर्ट के निर्माण के लिए 45 लाख रुपये और विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना से तीन बार में 50 लाख रुपये दिये थे।
इसी तरह अखिलेश यादव ने अपनी निधि से लॉ संकाय में शौचालय के निर्माण के लिए 20 लाख रुपये, पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने लॉ संकाय में डीन व प्रिसिंपल कक्ष के निर्माण के लिए 10 लाख रुपये और विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के तहत 10 लाख रुपये दिए थे।
बैंक में करोड़ों रुपये नकद जमा किए
ट्रस्ट ने वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक बैंकों में अपनी आय से अधिक नगदी जमा कराई थी। जांच में यह भी सामने आया कि दान की रकम को स्वेच्छा के बजाय जबरदस्ती जमा कराया गया। बिना हिसाब-किताब वाली रकम को दान दिखाकर खाते में जमा कराया गया। ट्रस्ट ने कई वर्षों का अपना आईटीआर भी जमा नहीं किया था।
ट्रस्ट ने वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक बैंकों में अपनी आय से अधिक नगदी जमा कराई थी। जांच में यह भी सामने आया कि दान की रकम को स्वेच्छा के बजाय जबरदस्ती जमा कराया गया। बिना हिसाब-किताब वाली रकम को दान दिखाकर खाते में जमा कराया गया। ट्रस्ट ने कई वर्षों का अपना आईटीआर भी जमा नहीं किया था।
इन तत्कालीन विधायकों ने भी दी थी निधि
- बुक्कल नवाब - 40 लाख रुपये
- मधु गुप्ता - 30 लाख
- बलराम यादव - 15 लाख
- रमेश यादव - 20 लाख
- राम सुंदर दास - 20 लाख
- यशवंत सिंह - 10 लाख
- विजय यादव - 20 लाख
- अंबिका चौधरी - 15 लाख
- अहमद हसन - 10 लाख
- लीलावती कुशवाहा - 50 लाख
- एसआरएस यादव - 25 लाख
- अशोक बाजपेई - 25 लाख
- राम सकल गुर्जर - 10 लाख
- राम जतन राजभर - 10 लाख
जौहर ट्रस्ट पर सरकारी धन लुटाने पर मनी लांड्रिंग का फंदा, ईडी ने खंगाले ठिकाने
पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिजनों द्वारा संचालित जौहर ट्रस्ट पर मनी लांड्रिंग का फंदा भी कसने लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को जौहर ट्रस्ट से जुड़े भवनों जिसमें रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी भी शामिल है, और पदाधिकारियों के ठिकानों पर छापे मारकर अहम सुबूत जुटाए हैं।
पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिजनों द्वारा संचालित जौहर ट्रस्ट पर मनी लांड्रिंग का फंदा भी कसने लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को जौहर ट्रस्ट से जुड़े भवनों जिसमें रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी भी शामिल है, और पदाधिकारियों के ठिकानों पर छापे मारकर अहम सुबूत जुटाए हैं।
ईडी की टीमों ने सहारनपुर में जौहर ट्रस्ट का लेखा-जोखा संभालने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता का कार्यालय और आवास पर भी छापा मारा है। दिल्ली में एक सहयोगी ट्रस्ट के ठिकानों को खंगाला गया है। देर शाम तक सभी ठिकानों पर छापे की कार्रवाई जारी थी।
राजधानी स्थित ईडी के जोनल कार्यालय की टीमों ने सुबह सात बजे सुरक्षा बलों की मौजूदगी में सभी ठिकानों पर एक-साथ छापे मारे। जौहर यूनिवर्सिटी में ट्रस्ट से जुड़े सभी कमरों की गहन तलाशी ली गई। अधिकारियों ने जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों के निर्माण में सरकारी विभागों के धन के दुरुपयोग की जांच के सुबूत तलाशे और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए।
इसके अलावा दिल्ली में जौहर ट्रस्ट की एक अन्य सहयोगी ट्रस्ट के दफ्तर की छानबीन भी हुई है। इससे पहले ईडी ने रामपुर पुलिस से पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ दर्ज 84 एफआईआर और उनके खिलाफ अब तक हुई कानूनी कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
वहीं आयकर विभाग द्वारा जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद करने से जुड़े आदेश का भी गहनता से अध्ययन भी किया था। माना जा रहा है कि ईडी गैरकानूनी तरीके से बनाए गए भवनों को मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत जब्त करने की कार्रवाई करेगा। इन भवनों को ध्वस्त करने का आदेश डीएम रामपुर द्वारा बीते दिनों दिया गया था हालांकि कमिश्नर ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।