इबोला नहीं था, मगर भेज दिया आइसोलेशन वार्ड में
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इबोला को लेकर स्वास्थ्य विभाग के तैयारियों का दावा उस वक्त धरा का धरा रह गया जब सऊदी अरब एयरलाइंस के विमान से लखनऊ पहुंचे एक यात्री को इबोला का मरीज समझ आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया गया। यही लापरवाही मरीज और उसके परिवार पर भारी पड़ी और जिसको खबर मिली वो दहशत में आ गया।
घटनाक्रम कुछ इस तरह रहा, सुल्तानपुर के ग्राम अझई रैपुरवा के रहने वाले अब्दुल हक (41) मंगलवार देर रात सऊदी एयरलाइंस के विमान से लखनऊ के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पहुंचे। रात 10 बजे एयरपोर्ट पर चेकआउट एरिया पर उनकी जांच करने के बाद क्लीयरेंस रिपोर्ट दे दी गई।
एयरपोर्ट से निकलते ही उनके मुंह और नाक से खून आने लगा। एयरपोर्ट पर उनको लेने पहुंचे उनके मामा मुख्तार अहमद ने मामले की जानकारी एयरपोर्ट अधिकारियों को दी। मामले को गंभीरता से लेते हुए 108 एम्बुलेंस की मदद से उनको आशियाना के लोकबंधु राजनारायण अस्पताल पहुंचाया गया।
वहां पर इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर डीके सिंह ने प्राथमिक उपचार के बाद सीधे बलरामपुर अस्पताल भेज दिया। सूत्रों की मानें तो अब्दुल को इबोला वायरस के लक्षण दिखने के बाद बलरामपुर भेजा गया था। इसी का नतीजा था कि मरीज जब बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचा तो डॉ. सर्वेश सिंह ने उसे आनन-फानन में इबोला के लिए आरक्षित किए गए आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया।
डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप
मरीज के मामा मुख्तार अहमद ने बताया कि मरीज को कोई दिक्कत नहीं है। डॉक्टरों की लापरवाही से उनको मानसिक और शारीरिक परेशानी सहनी पड़ रही है। डॉक्टरों के स्वास्थ्य रिपोर्ट देने के बाद परिवारीजन अब्दुल को दोपहर 12 बजे लामा (लिव अंगेस्ट मेडिकल एडवाइज) कराकर ले गए।
मामले की जानकारी प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को मिली तो वो भी मौके पर पहुंचे। प्राथमिक जांच में सब कुछ सामान्य मिला। एसीएमओ डॉ. राजेंद्र चौधरी का दावा है कि मरीज में विश्व स्वास्थ्य संगठन की बनाई गई गाइडलाइन के अनुसार कुछ नहीं मिला। इस आधार पर उसे छोड़ा गया।
इबोला का लक्षण दक्षिणी अफ्रीकी देशों की यात्रा करने वाले लोगों में ही मिल सकता है। जबकि अब्दुल हक सऊदी अरब से आया है और वहां पर ऐसा कोई खतरा नहीं है। दोपहर दो बजे केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल पहुंची तो उसे मायूस होना पड़ा और तब तक मरीज जा चुका था।
बीमार बेटी से मिलने आए थे अब्दुल
अब्दुल हक ने बताया कि वो पिछले साल दिसंबर में सऊदी अरब गए थे। वह हायल में जानवरों के चारे का कारोबार करते हैं। बेटी आसमां (11) की तबियत खराब होने की सूचना मिली तो वो वहां से सीधे घर के लिए निकले।
लखनऊ पहुंचे तो एयरपोर्ट के बाहर निकलते ही मुंह और नाक से खून आने लगा। आनन-फानन में डॉक्टरों ने इबोला वायरस का लक्षण दिखने की बात कहकर बलरामपुर भेज दिया। अस्पताल पहुंचे तो आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया। घर परिवार के लोग बेटी की बीमारी से परेशान हैं और डॉक्टरों की लापरवाही ने परेशानी को और बढ़ा दिया।
बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. यूएन राय का कहना है कि इबोला वायरस दक्षिण अफ्रीकी देश गिनिया, सियरालिओन, लाईबेरिया और नाईजीरिया में फैला है। अब्दुल हक ने देशों की कोई यात्रा नहीं की है और न ही वहां के किसी व्यक्ति से मिला जुला है।
मरीज को ब्लीडिंग होने पर एहतियात के तौर पर और उसके कहने पर डिलक्स वार्ड में भर्ती किया गया था। किसी तरह का कोई लक्षण उसके भीतर नहीं दिखा है। मरीज ठीक था और अपनी बेटी से मिलने के लिए उसने लामा करा लिया।