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ई-गवर्नेंस में फिसड्डी है अखिलेश का यूपी

Mon, 14 Jul 2014 02:39 PM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 14 Jul 2014 02:39 PM IST
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e governance in uttar pradesh

सूबे में आईटी सिटी से लेकर मेट्रो दौड़ाने तक के लिए भले ही यूपी सरकार भरपूर कोशिशें कर रही हों पर ई-गवर्नेंस में यूपी गुजरात साहित अन्य राज्यों से काफी पीछे है।

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सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने से लेकर उनके उपयोग तक स्थिति काफी खराब है। हालत यह है कि ई-ट्रांजेक्शन के आंकड़ों में यूपी प्रति सेवा उपयोग में चौथे और कुल उपयोग में पांचवें पायदान पर है।
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यह हकीकत नेशनल ई-ट्रांजेक्शन काउंट में सामने आई है। केंद्र सरकार के इलैक्ट्रॉनिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग, संचार एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर ई-ताल ने इन आंकड़ों को जुटाने का काम किया है।
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गुजरात में यूपी से दोगुनी सेवाएं

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एक जनवरी 2014 से लेकर 12 जुलाई 2014 के डाटा के मुताबिक प्रति सर्विस उपयोग के मामले में यूपी के ई-ट्रांजेक्शन केवल 5,88,420 हुए। वहीं गुजरात में यह संख्या 17,61,741 थी।

गुजरात में ट्रांजेक्शन की यह संख्या यूपी की करीब तीन गुनी है। वहीं ई-गवर्नेंस के जरिए ऑनलाइन उपलब्ध सेवाओं की यह संख्या भी यूपी से गुजरात में दोगुनी से ज्यादा है।

ऑनलाइन सर्विस के लिए यूपी में 101 सेवाएं मौजूद हैं। वहीं गुजरात में इनकी संख्या 221 है। सबसे ज्यादा सेवाएं ऑनलाइन करने में बाजी आंध्रप्रदेश ने मारी है।

यहां 378 सेवाएं अब तक ई-गवर्नेंस के जरिए लोगों की सुविधा के लिए मौजूद हैं। कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष और आईआईएम लखनऊ के प्रोफेसर भरत भास्कर का कहना है कि ई-ट्रांजेक्शन की संख्या में कमी असल में सुविधा के लोगों तक पहुंच पर निर्भर करती है।

दयनीय है उत्तर प्रदेश की स्थिति

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भरत भास्कर के अनुसार कितनी सेवाएं हमने लोगों के लिए उपलब्ध कराई हैं। इनकी लोगों तक पहुंच के लिए कितने कॉमन सर्विस सेंटर हमने बनाए?

ई-गवर्नेंस को पॉपुलर बनाने के लिए हमने क्या किया? यूपी में तीनों ही बिंदुओं पर स्थिति गुजरात जैसे राज्यों से खराब है। कॉमन सर्विस सेंटर की उपलब्धता से लेकर सरकार इनका प्रचार-प्रसार भी नहीं कर पाई।

कुछ जनसुविधा केंद्र खोले भी गए लेकिन यह यूपी की जरूरत को देखते हुए नाकाफी हैं। गुजरात, आंध्रप्रदेश ने इस क्षेत्र में बड़ा काम किया है, इसकी वजह से वहां ई-ट्रांजेक्शन बढ़े।

क्या करना होगा?

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प्रो. भास्कर के मुताबिक, लोगों की जरूरत वाली सेवाओं की ऑनलाइन संख्या बढ़ाने के अलावा इनके प्रचार प्रसार पर सरकार को काम करना होगा। इसके अलावा कॉमन सर्विस सेंटर ज्यादा से ज्यादा खुलवाने होंगे।

इन सेंटर्स को सरकारी दस्तावेज सर्टिफाई करने और उनकी विधिक वैधता को सुनिश्चित करना होगा। कुछ सेवाएं जैसे जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र को नए सिरे से डिजाइन करने की जरूरत भी है। जिससे किसी दूर-दराज के इलाके में बैठा परिवार कॉमन सर्विस सेंटर से पा सके।

टॉप मेरिट
ई-गवर्नेंस में सेवाएं
राज्य--संख्या
आंध्रप्रदेश--378
गुजरात--221

मध्यप्रदेश--158
महाराष्ट्र--143
तेलंगाना--113
पंजाब--104
यूपी--101

देखें फैक्ट फाइल

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कुल ई-ट्रांजेक्शन
राज्य--संख्या
गुजरात--38,93,44,875
तमिलनाडु--12,24,54,674
मध्यप्रदेश--11,58,61,657
आंध्रप्रदेश--9,12,92,300
यूपी--5,94,30,421
(यूपी और गुजरात के आंकड़ों में करीब छह गुने से ज्यादा का अंतर है।)

ई-ट्रांजेक्शन प्रति सेवा
राज्य--संख्या
गुजरात--17,61,741
तमिलनाडु--12,12,422
मध्यप्रदेश--7,33,301
यूपी--5,88,420
कर्नाटक--4,12,100

फैक्टफाइल
देश में कुल ई-ट्रांजेक्शन- 74,87,38,914
यूपी की आबादी- 1,21,01,93,422
गुजरात की आबादी- 6,04,39,692

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