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दुर्गेश की हत्या का मामलाः नौकरी के नाम पर ठगी का गिरोह चला रहा था प्रॉपर्टी डीलर 

Thu, 03 Sep 2020 12:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 03 Sep 2020 12:14 AM IST
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durgesh murder case Property dealer was cheating people in the name of job
घटना के बाद घर पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला

पीजीआई थानाक्षेत्र के वृंदावन सेक्टर-14 में दुर्गेश हत्याकांड में पुलिस ने मानवेंद्र यादव के किराए के मकान को खंगाला तो कई सरकारी विभागों के नियुक्ति पत्र और अहम दस्तावेज बरामद हुए। डीसीपी पूर्वी चारू निगम के मुताबिक, कई युवकों के अंकपत्र, मुहर, सचिवालय का पास, आवेदन, सिंचाई, रेलवे और खाद्य एवं रसद विभाग के नियुक्ति पत्र, बुलावा पत्र, मुहर और कई दस्तावेज मिले हैं। 

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डीसीपी पूर्वी ने बताया कि दुर्गेश के खिलाफ हजरतगंज थाने में सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने वारदात स्थल से 7-8 पिट्ठू बैग में नियुक्ति पत्र, बुलावा पत्र व कई सरकारी दस्तावेज, संगठन से जुड़े दस्तावेज, फर्जी प्रेस का पहचान पत्र भी बरामद किया है।
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प्रॉपर्टी डीलर व उसके साथी करते थे ठगी का धंधा 
पुलिस के मुताबिक, प्रॉपर्टी डीलर व उसके साथी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करते थे। गिरोह का नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला हुआ है। पिछली सरकार में सचिवालय, रेलवे, सिंचाई व खाद्य एवं रसद विभाग में कई पदों पर सीधी भर्ती निकली थी। इसमें नौकरी दिलाने के नाम पर गिरोह ने लोगों से करोड़ों रुपये वसूले थे। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि पलक ठाकुर व मनीष यादव ने दुर्गेश को नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 90 लाख रुपये दिये थे। नौकरी न लगने पर दोनों ने रकम वापस मांगी तो दुर्गेश टालमटोल कर रहा था। उधर, आरोपियों पर पीड़ित युवकों ने रुपये वापस करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया था। इसके बाद नाराज आरोपियों ने बुधवार सुबह रकम वापस मांगने के लिए बैठक करने को कहा तो दुर्गेश ने विरोध कर दिया। नाराज होकर सभी उसे सबक सिखाने घर आ धमके थे।
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आरोपी मनीष के पास से मिला दरोगा का फर्जी पहचान पत्र
प्रभारी निरीक्षक पीजीआई के के मिश्रा के मुताबिक हत्या कांड का आरोपी मनीष प्रतापगढ़ से गिरफ्तार कर लिया गया। वह रिटायर्ड डिप्टी एसपी का बेटा है। उसके पास से पुलिस ने कई कागजात बरामद किये। जिसमें एक पहचान पत्र भी शामिल हैं। जिसमें मनीष दरोगा की वर्दी पहने हुए हैं। पुलिस ने इस पहचान पत्र को फिलहाल फर्जी बताया है। उसकी पत्नी हाईकोर्ट प्रयागराज में अधिवक्ता हैं। वारदात को अंजाम देकर मनीष छिपने के लिए प्रयागराज जा रहा था।

अधिकारियों की कुर्सी पर बैठकर खिंचवाता था फोटो
दुर्गेश यादव लोगों को सचिवालय में अधिकारी होने की बात कहता था। फेसबुक पर उसने कई अधिकारियों की कुर्सी पर बैठे हुए फोटो भी पोस्ट की थी। जिसके कारण लोग झांसे में आ जाते थे। दुर्गेश नौकरी की आश में आये लोगों को सचिवालय गेट नंबर चार से अंदर लेकर जाता था। परिसर स्थित बैडमिंटन कोर्ट में रुपये के लेनदेन की बात करता था। वहां दुर्गेश के कई परिचित भी होते थे। जो उसके साथ बतौर अधिकारी व्यवहार करते थे।

किराए पर लेकर हड़प ली थी डिजायर कार
कुछ दिनों पहले दुर्गेश ने कृष्णा नगर के मधुवन इलाके में रहने एक युवक से 8 माह डिजायर कार 25 हजार रुपये महीने पर किराए पर ली थी। एक माह पैसा देने के बाद उसकी कार हड़प ली। कार मालिक ने कई बार उससे गाड़ी मांगने का प्रयास किया लेकिन कार लापता हो गई। दुर्गेश का कातिल मनीष यादव कभी उसका खास था। हालांकि पैसों के लेनदेन के विवाद में मनीष ने दुर्गेश का साथ छोड़ दिया और वर्तमान में वह महिला पलक ठाकुर के साथ हो गया था। दोनों गुट एक दूसरे से पहले से परिचित थे। इनके खिलाफ फर्जी मार्कशीट का गैंग चलाने व नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामले भी पुलिस की जांच में प्रकाश में आए हैं।

गोरखपुर विश्वविद्यालय से लड़ चुका है चुनाव
दुर्गेश यादव गोरखपुर में रामगढ़ ताल थाना क्षेत्र के रामपुर गांव में घर बनवाकर रहता था। पढ़ाई के समय से ही दबंगई दिखाना उसकी आदत में शामिल था।  हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई उसने उरुवा स्थित रामरेखा सिंह इंटर कालेज से की थी। गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीए करने के दौरान छात्रसंघ का वह चुनाव भी लड़ा था। करीब चार साल पहले लखनऊ जाकर जमीन के कारोबार से जुड़ गया।

छोटी बहन की शादी की तैयारी चल रही थी
दुर्गेश की तीन बहनें हैं। दो की शादी हो चुकी है। सबसे छोटी बहन की शादी की तैयारी चल रही है। दुर्गेश की शादी 6 साल पहले तिवारीपुर इलाके के जगतबेला में हुई थी। उसकी पांच वर्ष की एक बेटी और तीन वर्ष का एक बेटा है।

पलक ठाकुर ने सोशल मीडिया पर दी थी दुर्गेश को धमकी
पुलिस की माने तो पलक ठाकुर और दुर्गेश के बीच रुपये के लेनदेन का विवाद इतना बढ़ गया था। पलक ठाकुर ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर संदेश भेजा कि ‘सीधी सी बात है मेरी आपसे कोई दुश्मनी नहीं है अगर आप चाहते हो कि सब कुछ ठीक रहे तो आप मेरे पैसे प्यार से लौटा दो नहीं तो तुम हर न्यूज चैनल सोशल मीडिया थाने हर जगह तुम्हारी फोटो विथ प्रूफ आएगी तो तुम सोचो कहा जाओगे, लेकिन तुम नौकरी के नाम पर लोगों से पैसा लेते हो और फिर भाग जाते हो, लेकिन कितने दिन तक भागोगे यादव जी, पूरी दुनिया कहती रही कि दुर्गेश एक नंबर का फ्रॉड है लोगों का पैसा लेेकर भागा है, लेकिन मैने तुम जैसे घटिया इंसान पर भरोसा किया, तुम जैसे धोखेबाज और फ्रॉड दुनिया में कोई नहीं होगा, अब तुम देखना तुम्हारी थाने से लेकर सचिवालय और सोशल मीडिया पर विथ प्रूफ क्या हालत होती है न तो लखनऊ में रहने लायक रहोगे और न ही गोरखपुर में’। इन संदेशों के बाद भी दुर्गेश ने कोई जवाब नहीं दिया। 

गोरखपुर का हिस्ट्रीशीटर था दुर्गेश
दुर्गेश यादव गोरखपुर का हिस्ट्रीशीटर था। गोला, उरूवा और बड़हलगंज थाने में उसके खिलाफ डकैती और लूट के सात मुकदमे दर्ज हैं। कुछ दिन पहले ही गोला थाने में उसके खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई की गई थी। इस मामले में पुलिस को उसकी तलाश थी। गोला पुलिस ने लखनऊ में दुर्गेश के किराए के मकान पर दबिश दी थी, लेकिन हत्थे नहीं चढ़ा। गोला थाने में हत्या की कोशिश, रंगदारी और गैंगेस्टर के तीन मामले दुर्गेश पर दर्ज थे। बालू ठेकेदार पीयूष पंकज कौशिक से रंगदारी मांगी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 27 नवंबर 2018 को दुर्गेश सहित उसके ग्यारह साथियों पर केस दर्ज किया था। गिरफ्तारी न हो पाने पर पुलिस ने उस पर 15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। 2018 में ही पुलिस टीम पर गोली चलाने के आरोप में उस पर हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज हुआ था। एक अप्रैल 2019 को गोला पुलिस ने गैंगस्टर के तहत उसे जेल भेजा था। इसके अलावा उरूवा इलाके के एक पेट्रोल पंप पर डकैती के मामले में भी वह वांछित था। (इनसेट गोरखपुर)

फर्जी दरोगा बनकर जमाता था धौंस
मनीष यादव की तलाशी के दौरान नवाबगंज पुलिस को एक दरोगा का फर्जी आईकार्ड मिला। उसमें मनीष की वर्दी पहने फोटो लगी थी। पूछताछ में उसने कुबूला कि कार्ड फर्जी है। चेकिंग में फंसने पर फर्जी कार्ड दिखाकर बच निकल लेता था। दुर्गेश यादव किसान उमाकांत का इकलौता बेटा था। पढ़ाई-लिखाई के बाद वह राजनीति में आ गया और प्रॉपर्टी का कारोबार भी करने लगा। कुछ दिन गोरखपुर में काम करने के बाद लखनऊ चला आया, यहां उसने कई बड़ी संपत्तियों का सौदा कराया। इनमें कुछ विवादित संपत्तियां भी थीं। पुलिस के मुताबिक, दुर्गेश ने 2015 में हुए जिला पंचायत चुनाव में उरूवा से किस्मत आजमाई थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद वह लखनऊ में ही आकर रहने लगा। इस बीच उसने उरूवा से ब्लॉक प्रमुख पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी। इलाके में लोग उसे सपा नेता के तौर पर जानते थे। उसने क्षेत्र में होर्डिंग व बैनर भी लगवा रखे थे।
 
दोनों मुख्य आरोपी गिरफ्तार, असलहा बरामद
पीजीआई प्रभारी निरीक्षक केके मिश्रा के मुताबिक, पुलिस ने दुर्गेश हत्याकांड में शामिल दोनों मुख्य आरोपियों फिरोजाबाद के नसीरपुर स्थित धनपुरा निवासी मनीष यादव और गोमतीनगर विस्तार के हिमालयन अपार्टमेंट सेक्टर-4 निवासी पलक ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से 7.65 एमएम की पिस्तौल, पांच कारतूस, एसयूवी और दुर्गेश यादव का मोबाइल बरामद किया है। आरोपी मौके से मोबाइल ले गए थे। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने वारदात का पर्दाफाश महज पांच घंटे में कर दिया। 

हत्या के पहले दुर्गेश की हमलावरों ने की थी पिटाई
डीसीपी पूर्वी चारू निगम के मुताबिक हमलावर जब घर में दाखिल हुए उस वक्त दुर्गेश बाथरूम में था। इसके बाद जैसे ही वह बाहर निकला तो मनीष यादव और पलक ठाकुर ने अपने साथियों संग उस पर हमला बोल दिया। उसकी कमरे में जमकर पिटाई कर दी। इस दौरान दुर्गेश सिर्फ बनियान व अंडरवियर पर था। उसके कपड़े भी फट गये। पिटाई के दौरान पलक ठाकुर दुर्गेश के कमरे में मौजूद लोगों को कमरे बंद करने व उनका मोबाइल छीनने के लिए भी कहती मिली है। इसके बाद हमलावरों ने दुर्गेश के दोस्तों को कमरे में बंद कर दिया। उनका मोबाइल छीन लिया। पिटाई के दौरान बनाई गई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसी बीच दुर्गेश मौका देखकर नीचे की तरफ भागा, लेकिन गेट के बाहर पहुंचने पर  मनीष ने गोली मार दी। गेट के बाहर सड़क पर वह लहूलुहान होकर गिर गया।

घर से मिले कई सरकारी विभाग के नियुक्ति पत्र सहित अहम दस्तावेज

पीजीआई के वृंदावन सेक्टर-14 में मानवेंद्र यादव व दुर्गेश यादव के किराए के मकान की जांच में पुलिस को कई सरकारी विभागों के नियुक्ति पत्र सहित अहम दस्तावेज बरामद हुए। पूछताछ में सामने आया कि सभी मिलकर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का गिरोह चलाते थे। रुपयों के लेनदेन में ही वारदात को अंजाम दिया गया है।

डीसीपी पूर्वी चारू निगम के मुताबिक, किराए के मकान में छह लोग रह रहे थे। तलाशी में कई युवकों के अंकपत्र, मुहर, सचिवालय का पास, कई युवकों के आवेदन, सिंचाई, रेलवे और खाद्य एवं रसद विभाग के नियुक्ति पत्र, बुलावा पत्र, मुहर और कई दस्तावेज मिले हैं। जिनसे पुष्टि होती हैं, ये सभी नौकरी व ठेका दिलाने के नाम पर ठगी करते थे। डीसीपी ने बताया कि दुर्गेश के खिलाफ हजरतगंज थाने में सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने वारदात स्थल से 7-8 पिट्ठू बैग में नियुक्ति पत्र, बुलावा पत्र व कई सरकारी दस्तावेज, संगठन से जुड़े दस्तावेज, फर्जी प्रेस का पहचान पत्र भी बरामद किया है।
 

पिटाई के बाद अगवा करने का था इरादा

पीजीआई के वृंदावन कालोनी सेक्टर-14 में दुुर्गेश यादव की हत्या करने वाले हमलावरों ने उसकी कमरे में बंद कर पिटाई थी। करीब 20 मिनट तक हमलावर कभी उसका गला घोंटते तो कभी लात व घूंसे से मारते थे। तो कोई उसके दोनों हाथ बेल्ट से बांधता। ताकि वह भाग न सके। वह अपने साथियों से बचाने की गुहार लगा रहा था लेकिन हमलावरों ने गन प्वाइंट पर सभी को एक कमरे में बंद कर दिया। उनके मोबाइल भी छीन लिये थे। डीसीपी पूर्वी चारू निगम ने भी दुर्गेश की कमरे में पिटाई की बात कुबूृल की थी।

तुम लोग मुझे गोली मार दो...
कमरे के अंदर अपने दोस्तों के सामने पिटाई के दौरान दुर्गेश आहत हो गया था। उसने हमलावरों से चीख-चीखकर कह रहा था तुम लोग मुझे गोली मार दो। इस दौरान हमलावर कह रहे थे दुर्गेश को गाड़ी में डालो। यही नहीं दुर्गेश ने कई बार मानवेंद्र को बुलाने को कहा तो नाराज होकर पलक ठाकुर और मनीष यादव ने सभी को गाड़ी में डालकर साथ ले चलने को कहने लगे।

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