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मनरेगा के काम ठप होने की कगार पर!
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 12 Nov 2013 08:20 AM IST
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मनरेगा में वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए मांग के हिसाब से बजट न मिला तो साल की अंतिम तिमाही में मनरेगा से हो रहे तमाम काम ठप पड़ सकते हैं।
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प्रदेश ने केंद्र से अतिरिक्त 1555 करोड़ रुपये इसी महीने के अंत तक देने की मांग की है।
शासन ने केंद्र से यहां तक गुजारिश की है कि यदि श्रम बजट संशोधन में किसी वजह से देरी की संभावना हो तो संशोधन की प्रत्याशा में रकम जारी कराई जाए।
दरअसल प्रदेश ने चालू वित्त वर्ष के लिए 6960 करोड़ रुपये की मांग की थी, मगर केंद्र ने पिछले वित्तीय वर्ष के परफॉर्मेंस को देखते हुए 2013-14 का श्रम बजट 3274.71 करोड़ रुपये ही तय किया।
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इससे 1585.87 लाख मानव दिवस का काम उपलब्ध होना था, मगर इस साल प्रदेश ने मनरेगा में तेजी से काम की रणनीति बनाई।
नतीजतन अब तक 74 फीसदी रकम खर्च की जा चुकी है और नवंबर के शुरू में केवल 789.93 करोड़ रुपये ही बचे थे।
यदि अतिरिक्त बजट न मिला तो सूबे की 52 हजार ग्राम पंचायतों में से तमाम जगह इस महीने के अंत से ही कामों पर असर पड़ना शुरू हो जाएगा।
जानकार बताते हैं कि रकम न मिलने पर जनवरी से मार्च 2014 के बीच वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में काम पूरी तरह ठप पड़ने की नौबत आ सकती है।
ग्राम्य विकास विभाग ने केंद्र को सूबे की पूरी स्थिति की जानकारी देते हुए नवंबर 2013 से मार्च 2014 तक के पांच महीनों के लिए अतिरिक्त बजट जारी करने के लिए श्रम बजट में संशोधन की मांग की है।
इसके लिए प्रदेश ने वित्तीय वर्ष के स्वीकृत बजट 3274.71 करोड़ रुपये को बढ़ाकर 4839.18 करोड़ करने की मांग की है।
इससे प्रदेश को जहां 1554.92 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिल जाएंगे, वहीं 458.82 लाख मानव श्रम दिवसों का अतिरिक्त सृजन हो सकेगा।
विभाग ने बढ़ी हुई रकम इस महीने के अंत तक हर हाल में स्वीकृत करने का आग्रह किया है। पिछले साल भी बजट की कमी से अंतिम तिमाही में तमाम ग्राम पंचायतों के काम ठप पड़ गए थे।
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